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प्रदोष व्रत 2026: 28 फरवरी या 1 मार्च? जानिए सही दिन, पूजा समय और पूरा महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर महीने कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई शिव उपासना से जीवन में सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु का वरदान मिलता है। आमलकी एकादशी के बाद आने वाले प्रदोष व्रत को लेकर लोगों के मन में तिथि को लेकर भ्रम बना हुआ है। आइए स्पष्ट रूप से जानते हैं सही तारीख और शुभ मुहूर्त।


प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? (Pradosh Vrat 2026 Date)

मार्च माह का प्रदोष व्रत रविवार, 1 मार्च 2026 को रखा जाएगा।
हालांकि त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 फरवरी की रात से हो रही है, लेकिन व्रत और पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए व्रत की मान्य तिथि 1 मार्च ही मानी जाएगी।


त्रयोदशी तिथि का समय

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी 2026, रात 08:43 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 1 मार्च 2026, शाम 07:09 बजे

प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त

  • पूजा का समय: शाम 06:21 बजे से 07:09 बजे तक

इसी अवधि में भगवान शिव की आराधना करना सर्वश्रेष्ठ फलदायी माना गया है।


प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। यह व्रत मानसिक बल और आत्मविश्वास को भी मजबूत करता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत शिव कृपा प्राप्त करने का उत्तम साधन माना जाता है।


प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि

प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, धूप व दीप से विधिवत पूजा करें। इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा सुनें, शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव की आरती कर पूजा पूर्ण करें। इस दिन दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है। इस प्रकार, यदि आप प्रदोष व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो 1 मार्च 2026 की तारीख नोट कर लें और बताए गए मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा अवश्य करें।