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The Scoopp

 

भारत के पास सिर्फ 25 दिन का तेल ? मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर सवाल

पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की एनर्जी सप्लाई पर भी दिखने लगा है। सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि देश के पास इस समय कच्चे और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक करीब 25 दिनों का ही बचा है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

तनाव की सबसे बड़ी वजह ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दी गई चेतावनी है। इस अहम समुद्री रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल कारोबार होता है। अगर यह रूट लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत समेत कई एशियाई देशों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और आम लोगों पर बोझ नहीं डाला जाएगा। वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने तेल भंडार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कुछ हफ्ते पहले सरकार ने 74 दिनों के स्टॉक की बात कही थी, जो अब अचानक घटकर 25 दिन कैसे रह गया।

तेल के साथ-साथ गैस सप्लाई भी संकट में है। कतर ने सुरक्षा कारणों से भारत को LNG की सप्लाई कम कर दी है, जिससे कई उद्योगों को कम गैस मिल रही है। इसका असर उत्पादन और लागत दोनों पर पड़ सकता है। सप्लाई में अनिश्चितता को देखते हुए भारत अब रूस और अन्य देशों से तेल खरीद बढ़ाने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद रूसी टैंकरों से तुरंत तेल लेने की तैयारी की जा रही है ताकि समय और ट्रांसपोर्ट खर्च बचाया जा सके।

इस पूरे हालात का असर सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। शिपिंग रूट बदलने, ट्रांजिट टाइम बढ़ने और इंश्योरेंस लागत महंगी होने से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर भी दबाव बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% तेल आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर सीधा असर डाल सकता है।