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The Scoopp

 

ईरान का साफ इनकार: ट्रम्प की शर्तों पर नहीं थमेगी जंग, सीजफायर के लिए रखीं अपनी शर्तें

ईरान ने अमेरिका की ओर से आए युद्धविराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि वह पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से जुड़ी शर्तों के आधार पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा मध्यस्थ देशों के जरिए भेजा गया प्रस्ताव वास्तविक हालात से मेल नहीं खाता और केवल दबाव बनाने की कोशिश है। ईरान ने दो टूक कहा कि संघर्ष खत्म करने के लिए उसकी शर्तें मानना जरूरी है, अन्यथा जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।

ईरान की प्रमुख मांगें

तेहरान ने युद्धविराम के लिए पांच स्पष्ट शर्तें सामने रखी हैं—

  • ईरान पर सभी हमलों और टारगेटेड किलिंग्स को तुरंत रोका जाए
  • भविष्य में दोबारा संघर्ष न हो, इसकी ठोस गारंटी दी जाए
  • युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की जाए
  • हर मोर्चे पर पूरी तरह संघर्ष समाप्त किया जाए
  • Strait of Hormuz पर ईरान के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले

ईरान का कहना है कि जब तक इन मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक वह अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा।


अमेरिका का 15 बिंदुओं वाला प्लान

दूसरी ओर, अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए 15 सूत्रीय प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान तक पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रक्रिया में पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल नियंत्रण और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों को शामिल किया गया है।

अमेरिका की मुख्य शर्तें

अमेरिका ने जिन बिंदुओं पर जोर दिया है, उनमें शामिल हैं—

  • ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए और हथियार न बनाने की गारंटी दे
  • यूरेनियम संवर्धन सीमित करे या बंद कर दे
  • अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को परमाणु ठिकानों तक पूरी पहुंच दे
  • बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल कार्यक्रम में कटौती करे
  • Strait of Hormuz को वैश्विक आवाजाही के लिए खुला रखे
  • क्षेत्रीय तनाव कम करे और सहयोगी मिलिशिया को समर्थन घटाए

इसके बदले अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, सिविल न्यूक्लियर सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दीर्घकालिक योजना का प्रस्ताव रखा है।


गतिरोध बरकरार

दोनों देशों के रुख में फिलहाल बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। जहां अमेरिका अपनी शर्तों पर समझौता चाहता है, वहीं ईरान अपने हितों से समझौता करने के मूड में नहीं है। ऐसे में युद्धविराम को लेकर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।