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ट्रम्प की चेतावनी- समझौते तक ईरान के पास रहेगी सेना, ईरान का आरोप- अमेरिका ने तोड़ीं सीजफायर की शर्तें

मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी शांत नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच भले ही युद्धविराम की घोषणा हुई हो, लेकिन जमीन पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे वैश्विक बाजार भी प्रभावित हो रहा है। पहले जहां इस रास्ते से रोज करीब 135 जहाज गुजरते थे, अब उनकी संख्या काफी घट गई है। ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंगें होने की बात भी कही है, जिससे जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है।

इस बीच लेबनान में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। इजराइली सेना ने बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक करते हुए कई इलाकों को निशाना बनाया। इन हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि हजार से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। बेरूत, बेक्का वैली, दक्षिण लेबनान समेत कई क्षेत्रों में हुए हमलों के बाद देश में राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया है। इजराइल का दावा है कि उसने हिजबुल्लाह के कई ठिकानों और कमांड सेंटर को निशाना बनाया।

उधर, अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर भी मतभेद सामने आ गए हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते की अहम शर्तों का उल्लंघन किया है, जिससे बातचीत की आधारशिला ही कमजोर हो गई है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि जब शर्तें ही टूट चुकी हैं, तो आगे बातचीत का कोई औचित्य नहीं बचता।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि जब तक समझौते का पूरी तरह पालन नहीं होता, तब तक अमेरिकी सेना ईरान के आसपास तैनात रहेगी। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि समझौता टूटा, तो संघर्ष पहले से ज्यादा गंभीर हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति की संभावना कम है।

इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है, जबकि कुछ देशों का मानना है कि इसे भी इस समझौते में शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसे विरोधाभासी बयानों के चलते क्षेत्र में असमंजस और तनाव दोनों बढ़ गए हैं।