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The Scoopp

 

होर्मुज में फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही, तेल सप्लाई बहाल होने से भारत को बड़ी राहत की उम्मीद

करीब दो महीने से तनाव का केंद्र बने होर्मुज जलडमरूमध्य से अब धीरे-धीरे राहत की खबरें सामने आ रही हैं। लंबे समय तक बाधित रहने के बाद तेल और गैस से भरे जहाज इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने लगे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में सुधार की उम्मीद जगी है।

हाल ही में जहाज ट्रैकिंग डेटा से संकेत मिला है कि एलएनजी टैंकर “मुबाराज” सफलतापूर्वक इस मार्ग को पार कर चुका है। अबू धाबी के दास द्वीप से लोड होने के बाद यह जहाज कुछ समय तक रडार से गायब था, लेकिन अब श्रीलंका के पास देखा गया है। यह टैंकर चीन की ओर जा रहा है, जो इस रूट के दोबारा सक्रिय होने का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

इसी के साथ जापान की कंपनी इदेमित्सु कोसान द्वारा संचालित “इदेमित्सु मारू” नाम का सुपरटैंकर भी होर्मुज से गुजर चुका है। यह जहाज सऊदी अरब से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जापान की ओर बढ़ रहा है। खास बात यह रही कि जहाज ने जोखिम वाले उत्तरी मार्ग से दूरी बनाते हुए सुरक्षित रास्ता चुना।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं से साफ होता है कि ऊर्जा आपूर्ति धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकती है, हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। सुरक्षा को लेकर चिंताओं के चलते कई जहाज ऑपरेटर अब भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन दोनों देशों के नरम रुख के संकेत मिल रहे हैं। खबर है कि अमेरिका, जहाजों की आवाजाही बहाल करने को प्राथमिकता देते हुए ईरान के साथ एक संभावित समझौते पर विचार कर रहा है, जबकि परमाणु मुद्दों को फिलहाल पीछे रखा जा सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। यह अरब खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के तेल-गैस परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अपने सबसे संकरे हिस्से में यह केवल 33 किलोमीटर चौड़ा है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ जाती है।

हालिया गतिविधियों से यह संकेत मिल रहा है कि चीन और जापान जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों का भरोसा इस मार्ग पर फिर से लौटने लगा है। अगर हालात इसी तरह सुधरते रहे, तो भारत सहित कई एशियाई देशों को ऊर्जा आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है।