देश में सोने की खरीद को लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर एक व्यक्ति कितनी मात्रा में गोल्ड खरीद सकता है और क्या इसके लिए कोई तय लिमिट है। हाल ही में सोने को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है।
दरअसल, भारत में किसी व्यक्ति के लिए सोना खरीदने की कोई अधिकतम कानूनी सीमा तय नहीं की गई है। यानी अगर किसी के पास आय का वैध स्रोत है तो वह अपनी क्षमता के अनुसार कितनी भी मात्रा में गोल्ड खरीद सकता है। हालांकि, खरीदारी के दौरान भुगतान के तरीके और दस्तावेजों को लेकर कुछ जरूरी नियम लागू होते हैं।
नकद भुगतान पर सख्त नियम
अगर कोई ग्राहक कैश में सोना खरीदता है तो आयकर विभाग के नियम लागू हो जाते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 269ST के अनुसार एक दिन में ₹2 लाख या उससे अधिक का नकद लेन-देन नहीं किया जा सकता। ऐसे में ₹2 लाख से ज्यादा कीमत का गोल्ड खरीदने पर ग्राहक को डिजिटल या बैंकिंग माध्यम से भुगतान करना जरूरी होता है। इसके लिए UPI, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या चेक जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं। वहीं ₹2 लाख से कम की खरीदारी नकद में की जा सकती है और उस स्थिति में PAN या Aadhaar देना अनिवार्य नहीं होता।
बड़ी खरीदारी में जरूरी होंगे दस्तावेज
यदि सोने की कीमत ₹2 लाख से ऊपर है तो ग्राहक को KYC दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। इसमें PAN कार्ड या Aadhaar कार्ड शामिल हैं। यह नियम पारदर्शिता बनाए रखने और बड़े लेन-देन पर निगरानी रखने के लिए बनाया गया है।
कितनी मात्रा में गोल्ड खरीद सकते हैं?
भारतीय कानून किसी व्यक्ति को किलो के हिसाब से भी सोना खरीदने की अनुमति देता है। हालांकि, भविष्य में जांच होने पर खरीदार को अपनी आय और धन के स्रोत की जानकारी देनी पड़ सकती है। इसलिए बड़ी मात्रा में खरीदारी करते समय वैध आय का रिकॉर्ड होना जरूरी माना जाता है।
डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के नियम
डिजिटल गोल्ड में निवेश पर अभी कोई तय सरकारी सीमा नहीं है, लेकिन कई प्लेटफॉर्म सुरक्षा कारणों से प्रतिदिन लेन-देन की सीमा तय कर देते हैं। आमतौर पर यह सीमा करीब ₹2 लाख तक हो सकती है। वहीं सरकार की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना में एक व्यक्ति एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम 4 किलोग्राम सोने के बराबर बॉन्ड खरीद सकता है।