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The Scoopp

 

कहां दी जा सकती है बकरीद की कुर्बानी और सोसायटियों में क्यों होता है विवाद? जानिए नियम, कानून और पूरा मामला

ईद-उल-अजहा से पहले देश के कई बड़े शहरों में कुर्बानी को लेकर नियम और व्यवस्थाएं चर्चा में हैं। खासतौर पर मुंबई की कुछ हाउसिंग सोसायटियों में बकरे लाने और कुर्बानी देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद मामला राजनीतिक बहस तक पहुंच गया। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर शहरों में बकरीद के दौरान कुर्बानी के क्या नियम हैं और किन जगहों पर इसकी अनुमति होती है।

दरअसल, गांवों और छोटे कस्बों के मुकाबले महानगरों में आबादी ज्यादा घनी होती है और ज्यादातर लोग अपार्टमेंट या हाईराइज सोसायटियों में रहते हैं। इसी वजह से प्रशासन और नगर निगम खुले स्थानों पर पशु वध को लेकर सख्त नियम लागू करते हैं। सड़क, पार्क, फुटपाथ या सोसायटी के कॉमन एरिया में खुलेआम कुर्बानी देना कानूनन गलत माना जाता है। कई शहरों में इसके लिए तय स्लॉटर हाउस या विशेष स्थान निर्धारित किए जाते हैं।

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार कुर्बानी के जानवर के लिए कुछ शर्तें भी जरूरी मानी गई हैं। बकरा पूरी तरह स्वस्थ होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम एक साल होनी चाहिए। किसी गंभीर बीमारी, लंगड़ापन या शारीरिक कमी वाले पशु की कुर्बानी मान्य नहीं मानी जाती। साथ ही ईद की नमाज के बाद ही कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू की जाती है और यह सिलसिला तीन दिनों तक चल सकता है।

धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि कुर्बानी बेहद संवेदनशील और रहमदिली के साथ की जानी चाहिए। जानवर को कम से कम तकलीफ पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। वहीं मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा है, जिसमें गरीबों, रिश्तेदारों और अपने परिवार के लिए अलग-अलग हिस्सा रखा जाता है।

बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए RWA और हाउसिंग सोसायटी के नियम भी अहम हो जाते हैं। कई सोसायटियों में परिसर के अंदर किसी भी तरह के पशु वध या धार्मिक गतिविधि पर रोक होती है। ऐसे मामलों में नियम तोड़ने पर पुलिस कार्रवाई, जुर्माना या विवाद की स्थिति बन सकती है। इसी कारण प्रशासन लोगों को पहले से स्थानीय दिशा-निर्देश जानने की सलाह देता है।

कुर्बानी के बाद सफाई और पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन भी अनिवार्य होता है। खून या पशु अवशेषों को खुले में फेंकना प्रतिबंधित है। नगर निगम की गाइडलाइन के मुताबिक इन्हें सुरक्षित तरीके से पैक करके निर्धारित कचरा व्यवस्था के जरिए ही निपटाना होता है। सोशल मीडिया पर विचलित करने वाले वीडियो या तस्वीरें साझा करने पर भी कार्रवाई हो सकती है।

मुंबई के घाटकोपर और मीरा रोड इलाके में इसी मुद्दे को लेकर तनाव की स्थिति देखने को मिली। कुर्बानी के लिए लाए गए बकरों को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ, जिसके बाद पुलिस और बीएमसी की टीमों को मौके पर पहुंचना पड़ा। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और अलग-अलग दलों के नेताओं ने बयानबाजी शुरू कर दी। इसके बाद से बकरीद के दौरान सोसायटी नियमों और कानूनी व्यवस्थाओं को लेकर बहस और तेज हो गई है।