भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी ताजा वार्षिक रिपोर्ट में आगाह किया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मॉनसून की आशंका देश में महंगाई को बढ़ा सकती है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन चुनौतियों का असर अल्पकाल में अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ सकता है, हालांकि दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है। इससे आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है, जिसका असर भारत की आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति दोनों पर पड़ सकता है।
आरबीआई ने कहा कि देश की बैंकिंग व्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में तेजी से हो रहे बदलावों पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। केंद्रीय बैंक का मानना है कि समय-समय पर उचित नीतिगत कदम उठाकर संभावित जोखिमों को नियंत्रित किया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूती दिखाई। आने वाले समय में मजबूत घरेलू मांग, सरकार के पूंजीगत निवेश पर फोकस और प्रमुख देशों के साथ व्यापारिक समझौतों से विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
महंगाई के मोर्चे पर आरबीआई ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के बाद वर्ष के अंतिम महीनों में दबाव बढ़ने के संकेत मिले। वहीं, सामान्य से कम बारिश के अनुमान ने खाद्य कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
कृषि क्षेत्र के संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की खेती अब भी काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर निर्भर है। ऐसे में 2026-27 के कृषि प्रदर्शन और ग्रामीण मांग की दिशा काफी हद तक बारिश की प्रगति और उसके वितरण पर निर्भर करेगी।
आरबीआई का मानना है कि भारतीय बैंक और वित्तीय संस्थान पर्याप्त पूंजी और मजबूत बैलेंस शीट के कारण संभावित आर्थिक झटकों का सामना करने में सक्षम हैं। विवेकपूर्ण नियामकीय सुधारों और संतुलित ऋण वृद्धि से वित्तीय क्षेत्र की मजबूती आगे भी बनी रहने की संभावना है।