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सिगरेट से मिलता है सुकून या बढ़ता है तनाव? जानिए निकोटीन की असली सच्चाई

काम का दबाव हो, पारिवारिक परेशानियां हों या रोजमर्रा की भागदौड़, कई लोग तनाव दूर करने के लिए सिगरेट का सहारा लेते हैं। उन्हें लगता है कि धूम्रपान करने से मन शांत होता है और तनाव कम हो जाता है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह राहत वास्तविक नहीं, बल्कि निकोटीन की लत से जुड़ा एक अस्थायी प्रभाव है।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट में मौजूद निकोटीन बेहद तेजी से दिमाग तक पहुंचता है। इसके बाद मस्तिष्क में डोपामाइन नामक केमिकल रिलीज होता है, जो कुछ समय के लिए खुशी और आराम का एहसास कराता है। यही वजह है कि धूम्रपान करने के तुरंत बाद व्यक्ति को तनाव कम महसूस हो सकता है।

हालांकि यह प्रभाव ज्यादा देर तक नहीं रहता। शरीर में निकोटीन का स्तर घटने लगते ही बेचैनी, घबराहट, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। ये लक्षण निकोटीन की कमी यानी विड्रॉल के कारण पैदा होते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब व्यक्ति दोबारा सिगरेट पीता है, तो वह अपने जीवन की वास्तविक समस्याओं या तनाव को दूर नहीं कर रहा होता। वह केवल निकोटीन की कमी से उत्पन्न असहजता को शांत कर रहा होता है। इसी वजह से कई लोग यह मान लेते हैं कि सिगरेट उनके तनाव को कम कर रही है।

अध्ययनों में भी पाया गया है कि धूम्रपान करने वालों में चिंता और तनाव का स्तर अक्सर गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में अधिक होता है। वहीं, जो लोग स्मोकिंग छोड़ देते हैं, उनमें समय के साथ मानसिक स्थिति बेहतर होने और एंग्जायटी कम होने के संकेत देखे गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट किसी भी तनाव की जड़ को खत्म नहीं करती। उल्टा, लगातार निकोटीन लेने से दिमाग उसकी आदत का शिकार हो जाता है और सामान्य महसूस करने के लिए भी सिगरेट की जरूरत महसूस होने लगती है। यही निर्भरता लंबे समय में तनाव को और बढ़ा सकती है।