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कैंसर से लेकर बुढ़ापे तक की चुनौती से निपटने की तैयारी, अंतरिक्ष में स्टेम सेल्स पर बड़ा प्रयोग कर रहा NASA

धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में वैज्ञानिक एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो भविष्य में कैंसर, रक्त संबंधी बीमारियों और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। NASA और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के शोधकर्ता इन दिनों स्टेम सेल्स पर माइक्रोग्रेविटी के प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष का विशेष वातावरण स्टेम सेल्स को तेजी से विकसित होने और उनकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली कोशिकाएं तैयार की जा सकेंगी।

आखिर क्या हैं स्टेम सेल्स?

मानव शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना है और हर कोशिका का अपना अलग कार्य होता है। लेकिन स्टेम सेल्स सामान्य कोशिकाओं से अलग होती हैं। इन्हें “मास्टर सेल” कहा जाता है क्योंकि ये जरूरत पड़ने पर शरीर की विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। शरीर में किसी ऊतक के क्षतिग्रस्त होने या बीमारी की स्थिति में ये कोशिकाएं मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम करती हैं। यही वजह है कि चिकित्सा विज्ञान में इन्हें बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्टेम सेल्स मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं— भ्रूण स्टेम सेल, वयस्क स्टेम सेल और रक्त निर्माण से जुड़ी विशेष स्टेम सेल्स, जो लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं के साथ प्लेटलेट्स बनाने में मदद करती हैं।

अंतरिक्ष में ही क्यों हो रही है रिसर्च?

ISS पर मौजूद माइक्रोग्रेविटी का वातावरण पृथ्वी से बिल्कुल अलग है। यहां गुरुत्वाकर्षण लगभग नगण्य होता है, जिससे मानव शरीर और कोशिकाओं का व्यवहार बदल जाता है। NASA के अनुसार लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से हड्डियों की मजबूती घटती है, मांसपेशियां कमजोर होती हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि इस वातावरण में स्टेम सेल्स किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।

माइक्रोग्रेविटी में मिला बड़ा फायदा

शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी पर स्टेम सेल्स को लंबे समय तक स्वस्थ अवस्था में बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। गुरुत्वाकर्षण के कारण कई बार कोशिकाएं अपनी विशेष क्षमताएं खोने लगती हैं। इसके विपरीत अंतरिक्ष में ये कोशिकाएं त्रि-आयामी (3D) संरचना विकसित करती हैं, जो मानव शरीर की वास्तविक बनावट के अधिक करीब मानी जाती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे बेहतर गुणवत्ता वाली कोशिकाओं का उत्पादन संभव हो सकता है।

कैंसर और रक्त रोगों के इलाज की उम्मीद

ISS Expedition 74 के दौरान वैज्ञानिक विशेष रूप से रक्त कैंसर, रक्त विकारों और गंभीर प्रतिरक्षा रोगों के उपचार के लिए उपयोगी स्टेम सेल्स तैयार करने की संभावनाओं का परीक्षण कर रहे हैं। यदि अंतरिक्ष में बड़ी मात्रा में गुणवत्तापूर्ण स्टेम सेल्स विकसित की जा सकीं, तो भविष्य में मरीजों को अधिक प्रभावी सेल-आधारित उपचार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

बुढ़ापे की प्रक्रिया को समझने में भी मदद

शोधकर्ताओं का मानना है कि अंतरिक्ष में उम्र बढ़ने से जुड़े कई बदलाव पृथ्वी की तुलना में अधिक तेजी से दिखाई देते हैं। हड्डियों की कमजोरी, मांसपेशियों का क्षय और प्रतिरक्षा प्रणाली में गिरावट जैसे प्रभाव कम समय में देखे जा सकते हैं। इस वजह से वैज्ञानिक इन प्रयोगों का उपयोग यह समझने के लिए भी कर रहे हैं कि बुढ़ापे की प्रक्रिया को कैसे धीमा किया जा सकता है और उम्र से जुड़ी बीमारियों का बेहतर इलाज कैसे विकसित किया जाए।

पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी बीमारियों पर भी नजर

अंतरिक्ष स्टेशन पर न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों से जुड़ी कोशिकाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि माइक्रोग्रेविटी में मस्तिष्क संबंधी कोशिकाएं पृथ्वी की तुलना में कहीं अधिक तेजी से विकसित और परिपक्व हो सकती हैं। इससे पार्किंसन, मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) और अल्जाइमर जैसी बीमारियों को समझने और उनके नए उपचार विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी अहम

यह रिसर्च सिर्फ पृथ्वी पर मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को होने वाले शारीरिक नुकसान को कम करने के उपाय भी तलाश रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेम सेल्स पर चल रहे ये प्रयोग आने वाले वर्षों में चिकित्सा विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान दोनों क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं।