भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए सोमवार से चार दिवसीय उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो गई है। इस बैठक में दोनों देश अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा करेंगे।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पन जैन संभाल रहे हैं। दोनों देशों के अधिकारी बाजार पहुंच, निवेश प्रोत्साहन, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में सुधार, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर (करीब 47 लाख करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीद सकता है। इसमें ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, प्रौद्योगिकी उपकरण, कीमती धातुएं तथा कोकिंग कोल जैसी वस्तुएं शामिल हैं।
इसके बदले भारत ने अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर आयात शुल्क में राहत देने की पेशकश की है। प्रस्तावित सूची में सोयाबीन तेल, रेड सोरघम, ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), फल, ट्री नट्स, वाइन और स्पिरिट्स जैसी वस्तुएं प्रमुख हैं।
दरअसल, दोनों देशों ने फरवरी में इस अंतरिम समझौते का प्रारंभिक ढांचा तैयार कर लिया था। उस समय अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए कुछ टैरिफ में कटौती करने पर सहमति जताई थी। हालांकि बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी देशों पर 10% समान टैरिफ लागू करने की घोषणा के बाद व्यापारिक समीकरण बदल गए।
बदले हुए हालात के चलते फरवरी में प्रस्तावित वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद अप्रैल में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वाशिंगटन का दौरा किया और अब अमेरिकी टीम भारत पहुंची है। नए टैरिफ ढांचे को देखते हुए दोनों देशों को समझौते की शर्तों का फिर से आकलन करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और भविष्य में व्यापक मुक्त व्यापार समझौते का रास्ता भी आसान हो सकता है।