The Scoopp

 

IND A vs SL A: गायकवाड का शतक, अरशद का कमाल; भारत-ए ने आखिरी ओवर में छीनी श्रीलंका-ए से जीत

दांबुला में शुरू हुई त्रिकोणीय वनडे सीरीज का पहला मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी थ्रिलर से कम नहीं रहा। भारत-ए और श्रीलंका-ए के बीच खेले गए इस मुकाबले में जीत का फैसला अंतिम क्षणों में हुआ। एक समय मेजबान श्रीलंका-ए जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही थी, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए मैच को अपनी झोली में डाल लिया। अंततः भारत-ए ने 8 रन से मुकाबला जीतकर टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की।

मैच में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में भारत-ए के खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। खासतौर पर ऋतुराज गायकवाड के शतक और अरशद खान की दबाव भरी परिस्थितियों में की गई गेंदबाजी ने टीम की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई।

लक्ष्य के करीब पहुंचकर भी जीत नहीं सका श्रीलंका-ए

278 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका-ए की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक और सकारात्मक क्रिकेट खेला। शुरुआती बल्लेबाजों ने बिना घबराए रन बनाए और बड़े लक्ष्य को हासिल करने की मजबूत नींव रखी। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, मेजबान टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ता गया।

मध्यक्रम में कप्तान सहान अराचिगे ने जिम्मेदारी संभालते हुए शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने 74 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत के करीब पहुंचाया। उनके अलावा सदीरा समरविक्रमा ने भी 46 रन बनाकर उपयोगी योगदान दिया। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया और लंबे समय तक विकेट नहीं गिरने दिए।

एक समय ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका-ए आसानी से लक्ष्य हासिल कर लेगी। स्कोरबोर्ड तेजी से आगे बढ़ रहा था और भारतीय टीम बैकफुट पर नजर आ रही थी। लेकिन क्रिकेट में आखिरी गेंद तक कुछ भी तय नहीं होता और यही इस मुकाबले में भी देखने को मिला।

भारतीय गेंदबाजों ने दिखाया जज्बा

श्रीलंका-ए जब मजबूत स्थिति में थी, तब भारत-ए के गेंदबाजों ने मैच में वापसी का रास्ता तैयार किया। आयुष बदोनी, अनुकूल रॉय, अरशद खान और विप्रज निगम ने दो-दो विकेट हासिल किए और समय-समय पर महत्वपूर्ण झटके देकर विपक्षी टीम की गति को रोका।

अंशुल कंबोज ने भी एक विकेट लेकर टीम की मदद की। भारतीय गेंदबाजों की खास बात यह रही कि उन्होंने लगातार दबाव बनाए रखा और श्रीलंकाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इसी रणनीति का असर अंतिम ओवरों में साफ दिखाई दिया।

आखिरी ओवरों में पलट गया पूरा मुकाबला

मुकाबले का सबसे दिलचस्प दौर तब आया जब श्रीलंका-ए को जीत के लिए अंतिम दो ओवरों में केवल 10 रन चाहिए थे और उसके हाथ में तीन विकेट बाकी थे। दर्शकों को लग रहा था कि मैच अब मेजबान टीम की मुट्ठी में है।

लेकिन कप्तान तिलक वर्मा ने उस समय गेंद अरशद खान को थमाई और यहीं से कहानी बदल गई। अरशद ने 49वें ओवर में बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए लगातार दबाव बनाया। इस ओवर में उन्होंने दो विकेट झटके, जबकि एक बल्लेबाज रनआउट का शिकार हुआ।

कुछ ही गेंदों के भीतर श्रीलंका-ए की पारी बिखर गई और पूरी टीम 269 रन पर सिमट गई। इस तरह जीत के बेहद करीब पहुंचकर भी मेजबान टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी और भारत-ए ने 8 रन से यादगार जीत दर्ज कर ली।

पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत-ए ने बनाए 277 रन

इससे पहले मुकाबले में टॉस जीतकर भारत-ए ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। शुरुआत हालांकि बहुत मजबूत नहीं रही, लेकिन मध्यक्रम ने स्थिति संभाल ली।

भारतीय पारी के सबसे बड़े नायक ऋतुराज गायकवाड रहे। उन्होंने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए 101 रन बनाए। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। उन्होंने शुरुआत में विकेट बचाने पर ध्यान दिया और बाद में रन गति को तेज किया।

गायकवाड की पारी ने भारत-ए को मजबूत स्थिति में पहुंचाने का काम किया। दूसरी ओर कप्तान तिलक वर्मा ने भी जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हुए 60 रन जोड़े। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई अहम साझेदारी ने टीम को संकट से निकालकर बड़े स्कोर की दिशा में पहुंचाया।

तिलक और गायकवाड की साझेदारी बनी आधार

जब भारत-ए को स्थिरता की जरूरत थी, तब गायकवाड और तिलक वर्मा ने मोर्चा संभाला। दोनों ने समझदारी के साथ बल्लेबाजी की और श्रीलंका-ए के गेंदबाजों को लंबे समय तक सफलता से दूर रखा।

उनकी साझेदारी की बदौलत भारतीय टीम ने मध्य ओवरों में मैच पर पकड़ बनाई। तिलक ने कप्तानी पारी खेलते हुए न केवल रन बनाए बल्कि दूसरे छोर पर मौजूद बल्लेबाजों को भी आत्मविश्वास दिया।

इस साझेदारी ने भारत-ए के कुल स्कोर को मजबूत बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

वैभव सूर्यवंशी नहीं कर सके कमाल

हाल के समय में शानदार प्रदर्शन कर रहे युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इस मुकाबले में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे। उनसे टीम को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वह केवल 14 रन बनाकर आउट हो गए।

हालांकि उनके जल्दी आउट होने का असर टीम पर ज्यादा नहीं पड़ा क्योंकि अन्य बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी संभाल ली। गायकवाड और तिलक की शानदार पारियों के अलावा निचले क्रम से भी उपयोगी योगदान मिला, जिससे भारत-ए निर्धारित 50 ओवरों में 6 विकेट पर 277 रन तक पहुंच गया।

श्रीलंकाई गेंदबाजों ने भी किया संघर्ष

भारत-ए के बल्लेबाजों के सामने श्रीलंका-ए के गेंदबाजों ने भी पूरी मेहनत दिखाई। खासतौर पर मोहम्मद शिराज ने प्रभावशाली गेंदबाजी करते हुए दो अहम विकेट अपने नाम किए।

बीच के ओवरों में श्रीलंका-ए ने रन गति को नियंत्रित करने की कोशिश की और कुछ समय के लिए भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव भी बनाया। हालांकि गायकवाड और तिलक की संयमित बल्लेबाजी के कारण मेजबान टीम पूरी तरह हावी नहीं हो सकी।

अंतिम ओवरों में भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन जोड़कर स्कोर को 277 तक पहुंचाया, जो बाद में जीत और हार के बीच का अंतर साबित हुआ।

अरशद खान बने मैच के सबसे बड़े हीरो

हालांकि ऋतुराज गायकवाड का शतक भारत-ए की पारी की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा, लेकिन मैच का निर्णायक मोड़ अरशद खान ने पैदा किया।

जब मुकाबला पूरी तरह श्रीलंका-ए के पक्ष में जाता दिख रहा था, तब अरशद ने दबाव झेलते हुए बेहतरीन गेंदबाजी की। उन्होंने महत्वपूर्ण समय पर विकेट हासिल किए और विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

उनके शानदार ओवर ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। यही वजह रही कि अंत में भारत-ए जीत दर्ज करने में सफल रहा।

दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन

भारत-ए की ओर से वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह, प्रियांश आर्य, ऋतुराज गायकवाड, तिलक वर्मा (कप्तान), आयुष बदोनी, अनुकूल रॉय, सूर्यांश शेडगे, अंशुल कंबोज, अरशद खान और विप्रज निगम मैदान में उतरे।

वहीं श्रीलंका-ए की टीम में निरोशन डिकवेला, अविष्का फर्नांडो, नुवानिदु फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा, सहान अराचिगे (कप्तान), चमिका करुणारत्ने, रविन्दु फर्नांडो, वानुजा सहन, विजयकांत वियास्कंथ, मोहम्मद शिराज और गरुका संकेत शामिल थे।

जीत से बढ़ा भारत-ए का मनोबल

ट्राई सीरीज के पहले ही मुकाबले में मिली इस रोमांचक जीत ने भारत-ए का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। टीम को बल्लेबाजी में शतक, कप्तान की अर्धशतकीय पारी और गेंदबाजों का सामूहिक योगदान मिला, जो आगे के मुकाबलों के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

दूसरी ओर, श्रीलंका-ए को हार जरूर मिली, लेकिन टीम के लिए कई अच्छी बातें भी सामने आईं। सहान अराचिगे और सदीरा समरविक्रमा की पारियों ने दिखाया कि टीम बड़े लक्ष्यों का पीछा करने की क्षमता रखती है। हालांकि अंतिम क्षणों में विकेटों का लगातार गिरना उनकी हार की सबसे बड़ी वजह बना।

कुल मिलाकर दांबुला में खेला गया यह मुकाबला उतार-चढ़ाव, संघर्ष और रोमांच से भरपूर रहा। जीत और हार के बीच का अंतर बेहद कम था, लेकिन दबाव के क्षणों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारत-ए ने सीरीज की शानदार शुरुआत कर ली।