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स्वीडन की धमाकेदार जीत, जापान ने आखिरी मिनट में बचाई बाजी; फुटबॉल वर्ल्ड कप के ग्रुप-एफ मुकाबलों में दिखा जबरदस्त रोमांच

फुटबॉल वर्ल्ड कप के ग्रुप-एफ में खेले गए मुकाबलों ने प्रशंसकों को भरपूर रोमांच दिया। एक ओर स्वीडन ने ट्यूनीशिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 5-1 की बड़ी जीत दर्ज की, वहीं दूसरी ओर जापान ने आखिरी क्षणों में गोल दागकर नीदरलैंड्स को जीत से वंचित कर दिया। दोनों मैचों के नतीजों ने ग्रुप की अंक तालिका और आगे की प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना दिया।

दिन के पहले मुकाबले में स्वीडन ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। टीम ने मैच के शुरुआती मिनटों में ही विपक्षी रक्षा पंक्ति पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और इसका फायदा भी जल्दी मिल गया। स्टार खिलाड़ी यासिर अय्यरी ने मुकाबले के केवल सातवें मिनट में गोल करके अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। यह गोल टूर्नामेंट के इतिहास के सबसे तेज गोलों में से एक माना जा रहा है और मैच की दिशा तय करने वाला साबित हुआ।

ट्यूनीशिया शुरुआती झटके के बाद वापसी की कोशिश करता नजर आया, लेकिन स्वीडिश खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले करते रहे। पहले हाफ के अंत तक स्वीडन 2-1 की बढ़त लेने में सफल रहा। दोनों टीमों ने इस दौरान तेज रफ्तार फुटबॉल खेली, लेकिन स्वीडन के बेहतर तालमेल और सटीक पासिंग ने उसे बढ़त दिलाई।

दूसरे हाफ में स्वीडिश टीम और भी ज्यादा आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरी। खिलाड़ियों ने आक्रामक रणनीति जारी रखी और एक के बाद एक तीन अतिरिक्त गोल करके मुकाबले को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया। ट्यूनीशिया की रक्षा पंक्ति इन हमलों के सामने बिखरती नजर आई और टीम कोई प्रभावी जवाब नहीं दे सकी।

यासिर अय्यरी ने इस मैच में दो गोल कर अपनी टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गति, पोजिशनिंग और फिनिशिंग ने दर्शकों का ध्यान खींचा। बाकी खिलाड़ियों ने भी बेहतरीन सामूहिक प्रदर्शन किया, जिसके चलते स्वीडन ने 5-1 के बड़े अंतर से मुकाबला अपने नाम किया। इस प्रभावशाली जीत के साथ स्वीडिश टीम ग्रुप-एफ में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई और अगले दौर की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।

उधर, ग्रुप का दूसरा मुकाबला जापान और नीदरलैंड्स के बीच खेला गया, जिसमें अंत तक जबरदस्त रोमांच बना रहा। मैच का पहला हाफ काफी संतुलित रहा और दोनों टीमें कई प्रयासों के बावजूद गोल करने में सफल नहीं हो सकीं। मजबूत डिफेंस और गोलकीपिंग के कारण पहले 45 मिनट बिना किसी गोल के समाप्त हुए।

दूसरे हाफ की शुरुआत के साथ ही मुकाबले की रफ्तार पूरी तरह बदल गई। नीदरलैंड्स ने 50वें मिनट में पहला गोल कर बढ़त हासिल की। कप्तान वर्जिल वान डाइक ने बॉक्स के अंदर शानदार हेडर लगाते हुए गेंद को जाल में पहुंचाया और अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। इस गोल के बाद डच टीम का आत्मविश्वास बढ़ा, लेकिन जापान ने जल्द ही जवाबी हमला बोला।

सिर्फ सात मिनट बाद जापान ने बराबरी का गोल दाग दिया। ताकेफुसा कुबो द्वारा दिए गए बेहतरीन पास को केइतो नाकामुरा ने शानदार शॉट में बदलते हुए स्कोर 1-1 कर दिया। इस गोल ने मुकाबले में नई जान डाल दी और दोनों टीमों ने जीत के लिए आक्रामक खेल अपनाया।

मैच के 64वें मिनट में नीदरलैंड्स ने एक बार फिर बढ़त हासिल कर ली। रयान ग्रावेनबर्ख के सटीक पास पर क्राइसेंसियो समरविल ने शानदार फिनिश करते हुए स्कोर 2-1 कर दिया। इसके बाद ऐसा लगने लगा कि डच टीम तीन अंक लेकर मैदान से बाहर जाएगी, क्योंकि जापान को बराबरी के लिए सीमित समय बचा था।

हालांकि जापानी खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी और अंतिम मिनटों तक लगातार अवसर तलाशते रहे। टीम के धैर्य और संघर्ष का परिणाम 88वें मिनट में देखने को मिला, जब डाइची कामादा ने बेहतरीन हेडर लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ स्कोर 2-2 हो गया और जापान ने मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए एक महत्वपूर्ण अंक हासिल कर लिया।

आर्लिंग्टन के एटीएंडटी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दर्शकों को दूसरे हाफ में लगातार रोमांच देखने को मिला। कुछ ही मिनटों के अंतराल में कई गोल होने से मैच बेहद प्रतिस्पर्धी बन गया। दोनों टीमों ने आक्रमण और बचाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन अंततः कोई भी पक्ष निर्णायक बढ़त कायम नहीं रख सका।

इस ड्रॉ का असर ग्रुप-एफ की अंक तालिका पर भी पड़ा। जहां स्वीडन ने अपनी बड़ी जीत के दम पर शीर्ष स्थान हासिल किया, वहीं जापान ने आखिरी समय में गोल कर हार से बचते हुए अपने अभियान को मजबूत बनाए रखा। दूसरी ओर, नीदरलैंड्स के लिए जीत हाथ से निकल जाना निराशाजनक रहा, क्योंकि अंतिम मिनटों तक वह मुकाबले में आगे चल रहा था।

फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि स्वीडन का संतुलित आक्रमण और सामूहिक खेल उसे आगे के मुकाबलों में भी मजबूत दावेदार बना सकता है। वहीं जापान ने एक बार फिर साबित किया कि वह अंतिम सीटी बजने तक संघर्ष करने वाली टीम है। नीदरलैंड्स को अपने डिफेंस में सुधार करने की जरूरत महसूस होगी, जबकि ट्यूनीशिया आगामी मैचों में बेहतर प्रदर्शन कर वापसी की उम्मीद करेगा।

ग्रुप-एफ के इन दोनों मुकाबलों ने टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा को और रोचक बना दिया है। एक तरफ स्वीडन की गोलों से भरी जीत ने उसका मनोबल बढ़ाया, तो दूसरी तरफ जापान की आखिरी मिनट की वापसी ने प्रशंसकों को यादगार मुकाबला देखने का मौका दिया। आने वाले मैचों में अब सभी टीमों की नजरें अगले दौर में जगह पक्की करने पर होंगी, जिससे ग्रुप के हर मुकाबले का महत्व और बढ़ गया है।