रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। कंपनी ने बाजार नियामक सेबी के पास ड्राफ्ट दस्तावेज जमा कर दिए हैं, जिसके बाद इसके देश के सबसे बड़े आईपीओ बनने की चर्चा शुरू हो गई है।
कंपनी इस इश्यू के जरिए लगभग 37,700 करोड़ रुपये (करीब 4 अरब डॉलर) जुटाने की योजना बना रही है। अनुमान के मुताबिक, इस वैल्यूएशन के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स की कुल कीमत करीब 137 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
27 करोड़ नए शेयर होंगे जारी
ड्राफ्ट के अनुसार, कंपनी इस आईपीओ में करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर बाजार में उतारेगी। यह ऑफरिंग के बाद कुल हिस्सेदारी का लगभग 2.9 प्रतिशत हिस्सा होगा।
फंड का इस्तेमाल कहां होगा
जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के कर्ज चुकाने या उसे आंशिक रूप से घटाने में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, बाकी राशि सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए खर्च की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, कुल फंड में से लगभग 27,500 करोड़ रुपये विशेष रूप से कर्ज निपटान और अन्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए लगाए जा सकते हैं।
पहले भी बड़े निवेश मिल चुके हैं
जियो प्लेटफॉर्म्स पहले ही वैश्विक निवेशकों से भारी पूंजी जुटा चुकी है। साल 2020 में मेटा (फेसबुक की मूल कंपनी) ने लगभग 43,574 करोड़ रुपये में 9.99% हिस्सेदारी ली थी। वहीं गूगल ने 33,737 करोड़ रुपये का निवेश कर 7.73% हिस्सेदारी खरीदी थी।
इसके अलावा, सिल्वर लेक, केकेआर, जनरल अटलांटिक, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पीआईएफ, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स जैसे कई बड़े वैश्विक निवेशकों ने मिलकर करीब 15.2% हिस्सेदारी के बदले लगभग 74,745 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
रिलायंस समूह के लिए ऐतिहासिक कदम
यह आईपीओ रिलायंस समूह के लिए खास माना जा रहा है क्योंकि 2008 के बाद यह पहली बार होगा जब समूह कोई बड़ा सार्वजनिक इश्यू लाएगा। साथ ही, यह समूह की किसी उपभोक्ता-केंद्रित कंपनी का पहला आईपीओ भी होगा।
वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी (66.43%) बनी हुई है, जबकि मेटा के पास करीब 9.99% हिस्सेदारी मौजूद है।