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सेशेल्स ने PM मोदी को दिया अपना सबसे बड़ा सम्मान, संसद में बोले- भारत और सेशेल्स का रिश्ता सदियों पुराना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स यात्रा के दौरान देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा गया। रविवार को आयोजित विशेष समारोह में उन्हें ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ सम्मान प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन्हें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने और प्रकृति को सुरक्षित रखने के लिए किए गए प्रयासों के सम्मान में दिया गया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का धन्यवाद किया। इस उपलब्धि के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्हें कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है। अब तक उन्हें 34 देशों के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार मिल चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच संबंध केवल आधुनिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें बहुत पुरानी हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों का जुड़ाव करीब 256 साल पुराना है और इसकी शुरुआत 18वीं सदी में हुई थी।

मोदी ने कहा कि जब दुनिया के लोग नक्शे पर सेशेल्स को देखते हैं तो उन्हें हिंद महासागर में मौजूद कुछ छोटे-छोटे द्वीप दिखाई देते हैं, लेकिन भारत के लिए सेशेल्स सिर्फ एक द्वीपीय देश नहीं है। यह दोस्ती, विश्वास और साझा विरासत का प्रतीक है।

सेशेल्स की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित किया। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। अपने संबोधन में उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, समुद्री सहयोग और भविष्य की साझेदारी पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स के रिश्ते केवल पिछले कुछ दशकों की कहानी नहीं हैं। अगस्त 1770 में ‘थेलेमाक’ नामक जहाज के जरिए पांच भारतीय यहां पहुंचे थे और यहीं से दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संपर्क की शुरुआत हुई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच दोस्ती समय के साथ और मजबूत हुई है। दोनों देश लोकतंत्र, विकास, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे के सहयोगी हैं।उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और सेशेल्स मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग आने वाले समय में और आगे बढ़ेगा।

पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को मिल चुके हैं कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान

सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण के क्षेत्र में उनके प्रयासों के लिए दिया गया। प्रधानमंत्री लंबे समय से जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों को बढ़ावा देते रहे हैं।

पर्यावरण के क्षेत्र में यह मोदी को मिला तीसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान बताया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उनके नेतृत्व और प्रयासों के लिए दिया गया था।

इसके अलावा मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने भी प्रधानमंत्री मोदी को ‘एग्रीकोला मेडल’ से सम्मानित किया था। यह सम्मान कृषि और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े योगदान के लिए दिया गया।

सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होंगे PM मोदी

प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा कई मायनों में खास रही। वह सेशेल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित गोल्डन जुबली राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस समारोह में भारत की ओर से विशेष भागीदारी देखने को मिली। भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ी ने हिस्सा लिया। इसके अलावा भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी कार्यक्रम का हिस्सा बने। यह भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग की मजबूती को दिखाता है। दोनों देशों के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी लगातार बढ़ रही है।

भारत ने सेशेल्स के लिए घोषित किया 175 मिलियन डॉलर का पैकेज

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़ा आर्थिक पैकेज घोषित किया। भारत की ओर से करीब 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 1651 करोड़ रुपये के सहयोग की घोषणा की गई। इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य सेशेल्स में विकास परियोजनाओं, आधारभूत सुविधाओं और अन्य जरूरी क्षेत्रों को मजबूत करना है।

इसके अलावा भारत ने सेशेल्स को स्वदेश में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘पीएस लेस्पवार’ भी उपहार के रूप में दिया। यह जहाज समुद्री निगरानी और सुरक्षा में सेशेल्स की क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा।

भारत और सेशेल्स के बीच हुए कई महत्वपूर्ण समझौते

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 19 अहम समझौतों और घोषणाओं का ऐलान किया। इन समझौतों में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, यूपीआई आधारित पेमेंट सिस्टम और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

भारत और सेशेल्स डिजिटल कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी काम करेंगे। इससे दोनों देशों के नागरिकों और व्यापारिक संबंधों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

PM मोदी ने लगाया दुर्लभ ‘कोको डी मेर’ पौधा

सेशेल्स यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के प्रसिद्ध और दुर्लभ पौधे ‘कोको डी मेर’ का पौधा भी लगाया। यह पौधा पूरी दुनिया में खास पहचान रखता है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से केवल सेशेल्स में पाया जाता है। कोको डी मेर का फल दुनिया के सबसे बड़े और भारी बीजों के लिए जाना जाता है। इसके एक बीज का वजन करीब 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है।

इस पौधे की खासियत यह है कि इसके नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। इसके फल की बनावट काफी अनोखी होती है, जिसके कारण पुराने समय से ही इससे जुड़ी कई कहानियां और मान्यताएं प्रचलित रही हैं।

कोको डी मेर को ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। इसका नाम फ्रांसीसी भाषा से आया है, जिसका अर्थ होता है ‘समुद्र का नारियल’। पुराने समय में जब यह फल समुद्र के रास्ते दूसरे देशों के तटों तक पहुंचता था, तो लोग इसे समुद्र के अंदर उगने वाले किसी रहस्यमयी पेड़ का फल मानते थे। यह पेड़ बहुत धीमी गति से बढ़ता है। इसे पूरी तरह विकसित होने और फल देने में करीब 20 से 40 साल तक का समय लग सकता है। वहीं इसके फल को पकने में लगभग 6 से 7 साल लग जाते हैं।

माना जाता है कि कोको डी मेर का पेड़ कई सौ वर्षों तक जीवित रह सकता है। इसकी उम्र करीब 200 से 350 साल तक हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा को भारत की समुद्री कूटनीति, पर्यावरण सहयोग और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।