थाईलैंड के उत्तर-पूर्वी प्रांत मुकदाहन में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। धार्मिक आस्था से जुड़ी एक शांतिपूर्ण पैदल यात्रा उस समय मातम में बदल गई, जब एक 11 वर्षीय लड़के द्वारा चलाया जा रहा पिकअप ट्रक अनियंत्रित होकर बौद्ध भिक्षुओं के जुलूस में जा घुसा। इस भीषण दुर्घटना में कम से कम 10 भिक्षुओं की जान चली गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव दल को मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, यह घटना स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 11 बजे हुई। उस समय भिक्षुओं का एक बड़ा समूह सड़क के किनारे अनुशासित ढंग से पैदल चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज रफ्तार पिकअप ट्रक अचानक उनकी ओर आया और किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में कई लोग सड़क पर गिर पड़े और आसपास मौजूद श्रद्धालुओं में चीख-पुकार मच गई।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि जिस वाहन से हादसा हुआ, उसे 11 साल का एक बच्चा चला रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने अपने माता-पिता की अनुमति के बिना घर से पिकअप ट्रक निकाल लिया था। बताया जा रहा है कि वह करीब 10 किलोमीटर तक वाहन चलाने के बाद नियंत्रण खो बैठा और सीधे धार्मिक जुलूस में जा टकराया।
इस दुर्घटना का वीडियो आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में साफ दिखाई देता है कि तेज गति से आता हुआ पिकअप ट्रक सड़क किनारे चल रहे भिक्षुओं के समूह को जोरदार टक्कर मार देता है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में इस हादसे को लेकर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की जा रही है।
मुकदाहन के गवर्नर वोरायन बुन्नारात ने बताया कि हादसे के समय कुल 35 बौद्ध भिक्षु और पांच श्रद्धालु एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक पैदल धार्मिक यात्रा पर निकले थे। यह यात्रा स्थानीय परंपरा का हिस्सा थी और इसमें शामिल सभी लोग शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे। यात्रा शुरू होने के कुछ समय बाद ही यह दर्दनाक घटना हो गई।
अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना इतनी भीषण थी कि पांच भिक्षुओं ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि अन्य घायल भिक्षुओं को अस्पताल ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान पांच और भिक्षुओं की मौत हो गई। कई अन्य घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
घटना के बाद मुकदाहन अस्पताल ने बड़ी संख्या में घायलों के उपचार के लिए तत्काल रक्तदान की अपील जारी की। स्थानीय नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया और पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए। प्रशासन ने राहत और उपचार के लिए अतिरिक्त चिकित्सा टीमों को भी तैनात किया है।
पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि हादसे के समय बच्चा घर पर अकेला था। वह उस दिन अस्वस्थ होने की वजह से स्कूल नहीं गया था। इसी दौरान उसने घर में खड़ी पिकअप ट्रक की चाबी ली और बिना किसी की जानकारी के वाहन लेकर निकल पड़ा।
जब कुछ समय बाद उसके माता-पिता ने घर के बाहर पिकअप ट्रक नहीं देखी तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने आसपास तलाश की, लेकिन वाहन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पुलिस को वाहन गायब होने की सूचना दी। इसी बीच पुलिस को सड़क दुर्घटना की सूचना मिली, जहां पहुंचने पर पता चला कि वही वाहन इस हादसे में शामिल था।
दुर्घटना के बाद पुलिस ने पिकअप ट्रक को अपने कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। विशेषज्ञ वाहन की तकनीकी स्थिति, ब्रेक सिस्टम और अन्य पहलुओं की जांच कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि दुर्घटना केवल चालक की गलती से हुई या वाहन में भी कोई तकनीकी खराबी थी।
प्रांतीय पुलिस प्रमुख मेजर जनरल पैरोज थाइफुत्सा ने बताया कि बच्चा फिलहाल गहरे मानसिक सदमे में है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उसकी मानसिक स्थिति अभी पूछताछ के लिए उपयुक्त नहीं मानी गई है। इसलिए पुलिस ने अभी तक उसका औपचारिक बयान दर्ज नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि लड़का नाबालिग है, इसलिए मामले में कानूनी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ अपनाई जाएगी। फिलहाल पुलिस दुर्घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है और यह भी देखा जा रहा है कि माता-पिता की किसी प्रकार की लापरवाही इस घटना के लिए जिम्मेदार थी या नहीं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि वाहन एक नाबालिग चला रहा था, इसलिए इस मामले में माता-पिता या वाहन के मालिक की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि अंतिम फैसला जांच पूरी होने और स्थानीय कानूनों के अनुसार ही लिया जाएगा।
थाईलैंड में बौद्ध धर्म का विशेष महत्व है। देश की 93 प्रतिशत से अधिक आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है। यहां मंदिरों के बीच पैदल यात्राएं, धार्मिक जुलूस और आध्यात्मिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। इन यात्राओं में बड़ी संख्या में भिक्षु और आम श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं, इसलिए इस हादसे ने पूरे देश को भावुक कर दिया है।
हादसे के बाद कई धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। स्थानीय लोगों ने दुर्घटनास्थल पर मोमबत्तियां जलाकर मृत भिक्षुओं को श्रद्धांजलि भी दी। सोशल मीडिया पर भी हजारों लोगों ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करते हुए सड़क सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि थाईलैंड पहले से ही सड़क दुर्घटनाओं की समस्या से जूझ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, देश में हर वर्ष लगभग 18 हजार लोगों की मौत सड़क हादसों में होती है। तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और अनुभवहीन ड्राइविंग को इन दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह माना जाता है।
हालांकि इस ताजा हादसे में पुलिस अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। जांच अधिकारी सीसीटीवी फुटेज, वाहन की फोरेंसिक रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरी घटना की कड़ियां जोड़ रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दुर्घटना के पीछे केवल चालक का नियंत्रण खोना जिम्मेदार था या अन्य कोई कारण भी सामने आता है।
फिलहाल पूरे मुकदाहन प्रांत में शोक का माहौल है। मृत भिक्षुओं के अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं, जबकि घायल भिक्षुओं के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की जा रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।