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The Scoopp

 

ट्रंप-पुतिन की लंबी फोन वार्ता, यूक्रेन संकट पर फिर बनी बातचीत की जमीन; NATO समिट से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल

अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के 250वें वर्ष के अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब डेढ़ घंटे तक महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता हुई। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत में यूक्रेन युद्ध, रूस-अमेरिका संबंध, भविष्य के सहयोग और आगामी NATO शिखर सम्मेलन जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। रूस की ओर से राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बातचीत की पुष्टि करते हुए इसे बेहद सार्थक और परिणामोन्मुख बताया।

रूसी अधिकारियों के अनुसार, वार्ता की शुरुआत अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर बधाई संदेश से हुई। राष्ट्रपति पुतिन ने ट्रंप और अमेरिकी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। इसके बाद बातचीत तेजी से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, यूक्रेन संघर्ष और दोनों देशों के संबंधों की दिशा की ओर बढ़ गई। उशाकोव ने बताया कि यह केवल औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक हालात पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।

बताया गया कि बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में सहयोग देने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष तैयार हों तो अमेरिका समाधान खोजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। ट्रंप का मानना है कि लंबे समय से चल रहा यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता को भी प्रभावित कर रहा है, इसलिए इसके समाधान की दिशा में नए प्रयास जरूरी हैं।

रूस की ओर से कहा गया कि ट्रंप ने आगामी सप्ताह तुर्की में प्रस्तावित NATO शिखर सम्मेलन से पहले यह संदेश दिया कि संघर्ष को जल्द खत्म करने के लिए राजनीतिक प्रयासों को गति दी जानी चाहिए। उन्होंने युद्धविराम और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दोहराया कि यदि परिस्थितियां अनुकूल बनती हैं तो दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं खुल सकती हैं।

वार्ता के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि रूसी सेना विभिन्न मोर्चों पर आगे बढ़ रही है और कई क्षेत्रों में उसे रणनीतिक बढ़त हासिल हुई है। पुतिन ने कहा कि जमीनी हालात को लेकर पश्चिमी देशों की कई धारणाएं वास्तविकता से मेल नहीं खातीं और युद्धक्षेत्र की परिस्थितियों को सही तरीके से समझने की आवश्यकता है।

रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने कहा कि यूरोप के कई देशों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे आकलन वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाते। उनके अनुसार, युद्ध के मैदान की परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं और कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो जानकारी सामने आती है, वह अधूरी या एकतरफा होती है। इसलिए किसी भी राजनीतिक समाधान से पहले वास्तविक हालात का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है।

दोनों नेताओं के बीच रूस और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर भी चर्चा हुई। बातचीत में इस बात पर सहमति जताई गई कि सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर संवाद जारी रहना चाहिए। उशाकोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भविष्य में पारस्परिक हितों के आधार पर सहयोग बढ़ाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन संकट का समाधान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण शर्त माना जा रहा है।

रूस की ओर से यह संकेत भी दिया गया कि यदि संघर्ष कम होता है तो दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। ट्रंप ने भी बातचीत में कहा कि स्थायी शांति स्थापित होने के बाद द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध जितना लंबा चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर उसका असर उतना ही अधिक होगा।

वार्ता के दौरान यूक्रेन द्वारा रूस के भीतर किए गए हालिया लंबी दूरी के हमलों का भी जिक्र हुआ। पुतिन ने दावा किया कि हाल के हमलों में रूस के तेल उद्योग से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। रूसी पक्ष के अनुसार, इन हमलों का असर कुछ इलाकों में ईंधन आपूर्ति पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाले हैं तथा इनके कारण शांति प्रक्रिया कठिन हो सकती है।

रूसी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि यूक्रेन और उसके कुछ सहयोगी देशों की नीतियां संघर्ष को कम करने के बजाय उसे और लंबा खींचने की दिशा में काम कर रही हैं। उशाकोव ने कहा कि रूस की नजर में हालात को शांत करने के बजाय सैन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने से समाधान की संभावना कमजोर पड़ती है। उन्होंने आम नागरिकों को प्रभावित करने वाली घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की।

इसी बीच रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव का एक बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं तो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच प्रत्यक्ष मुलाकात संभव हो सकती है। पेसकोव ने कहा कि रूस पहले भी वार्ता के लिए तैयार रहने की बात कह चुका है और यदि आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं तो आगे बढ़ा जा सकता है।

रूसी सरकारी मीडिया के अनुसार, पेसकोव ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति पुतिन ने पहले मॉस्को में जेलेंस्की का स्वागत करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी उच्चस्तरीय मुलाकात का स्थान रूस की राजधानी मॉस्को ही होगा। हालांकि इस संभावित बैठक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है और न ही यूक्रेन की ओर से इस संबंध में अंतिम प्रतिक्रिया सामने आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और पुतिन के बीच हुई यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूक्रेन युद्ध को लेकर नई रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है। NATO शिखर सम्मेलन से पहले दोनों नेताओं का संवाद इस बात का संकेत माना जा रहा है कि प्रमुख शक्तियां कूटनीतिक विकल्पों को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहतीं। हालांकि युद्ध की वास्तविक परिस्थितियां अभी भी बेहद जटिल बनी हुई हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में ट्रंप और पुतिन के बीच यह चौथी आधिकारिक टेलीफोन वार्ता बताई जा रही है। दोनों नेताओं ने पिछले महीनों में भी कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि नियमित संवाद बनाए रखना दोनों देशों के हित में है क्योंकि इससे गलतफहमियां कम होती हैं और संकट के समय बातचीत के रास्ते खुले रहते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल किसी बड़े समझौते की संभावना का आकलन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन दोनों देशों के राष्ट्रपतियों का लगातार संपर्क बनाए रखना भविष्य की संभावित शांति वार्ताओं के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। यदि आने वाले समय में कूटनीतिक प्रयास तेज होते हैं तो यूक्रेन संघर्ष को लेकर नई पहल देखने को मिल सकती है।

फिलहाल दुनिया की नजरें आगामी NATO शिखर सम्मेलन और उसके बाद होने वाली अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप की ओर से दिए गए समाधान के प्रस्ताव और रूस के रुख के बीच आगे किस तरह की प्रगति होती है। फिलहाल दोनों देशों ने संवाद जारी रखने और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की है, जबकि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की संभावनाएं अभी भी चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।