ईरान की राजधानी तेहरान में सोमवार को दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहर की प्रमुख सड़कों, चौकों और धार्मिक स्थलों पर लाखों लोग एकत्र हुए। हालांकि भीड़ को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया, लेकिन स्थानीय मीडिया और विभिन्न अनुमानों के मुताबिक एक समय में करीब 50 लाख से अधिक लोग अंतिम यात्रा में शामिल थे। पूरे शहर में शोक, धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक संदेशों का मिला-जुला माहौल देखने को मिला।
दो दिनों तक तेहरान के ग्रैंड मोसाला धार्मिक परिसर में आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा गया था। इसके बाद सोमवार को अंतिम यात्रा शुरू हुई, जिसमें हजारों स्वयंसेवक सुरक्षा और व्यवस्था संभालते दिखाई दिए। जैसे ही ताबूत आगे बढ़ा, रास्ते भर लोगों ने फूलों की वर्षा कर अपने नेता को श्रद्धांजलि दी। सड़क के दोनों ओर खड़े लोग धार्मिक नारे लगाते रहे और कई स्थानों पर सामूहिक प्रार्थनाएं भी आयोजित की गईं।
अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग ईरानी राष्ट्रीय ध्वज, हिजबुल्ला के झंडे और बदले का प्रतीक माने जाने वाले लाल रंग के झंडे हाथों में लिए दिखाई दिए। कई लोगों ने खामेनेई के बड़े-बड़े पोस्टर और तस्वीरें भी उठा रखी थीं। भीड़ में शामिल लोगों का कहना था कि वे अपने नेता को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ देश की एकजुटता का संदेश भी देना चाहते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक और सामरिक ताकत का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। लंबे समय से पश्चिमी देशों और इजरायल के साथ तनाव के बीच आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर की नजरें तेहरान पर टिकी रहीं। भारी भीड़ को ईरानी नेतृत्व अपने जनसमर्थन के संकेत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
इस बीच, नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। उन्हें सर्वोच्च पद संभालने के बाद अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। अंतिम यात्रा और उससे पहले आयोजित शोक समारोहों में भी वे नजर नहीं आए। इससे उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इजरायल की ओर से दावा किया गया है कि हालिया संघर्ष के दौरान मोजतबा खामेनेई या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि ईरान ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखा गया है। उनका यह भी कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रविवार को आयोजित शुरुआती अंतिम संस्कार कार्यक्रम में अयातुल्ला अली खामेनेई के तीन बेटे सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए, लेकिन मोजतबा की अनुपस्थिति लगातार चर्चा का विषय बनी रही। सरकारी अधिकारियों ने इतना जरूर कहा कि हालिया हवाई हमलों में उन्हें चोटें आई थीं, लेकिन उनकी स्थिति को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।
तेहरान के प्रसिद्ध इमाम हुसैन स्क्वायर पर आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। सरकारी मीडिया के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप का पुतला लटकाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। वहां मौजूद कई लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए तथा बदला लेने की शपथ भी ली। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भी भीड़ के बीच मौजूद दिखाई दिए।
तेहरान में अंतिम यात्रा के दौरान भीषण गर्मी भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रही। तापमान अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जगह-जगह पानी का छिड़काव किया गया। कई स्थानों पर पानी के टैंकर और चिकित्सा शिविर भी लगाए गए ताकि श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। स्वयंसेवकों ने भीड़ को व्यवस्थित रखने और आपात स्थिति से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शोक यात्रा में शामिल लोगों के बीच अयातुल्ला अली खामेनेई और नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की तस्वीरें भी वितरित की गईं। कई लोगों ने इन्हें हाथों में लेकर जुलूस में हिस्सा लिया। धार्मिक गीतों, प्रार्थनाओं और नारों के बीच पूरा वातावरण भावुक बना रहा। जगह-जगह लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर और सामूहिक दुआएं पढ़कर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेंगे। सोमवार के जुलूस के बाद मंगलवार को धार्मिक नगरी कोम में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद बुधवार को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला में भी स्मृति सभाएं और धार्मिक आयोजन होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
पूरे कार्यक्रम का अंतिम चरण गुरुवार को उत्तर-पूर्वी ईरान के शहर मशहद में होगा, जहां अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मशहद उनका गृहनगर माना जाता है और वहां भी लाखों लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ यातायात एवं भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अंतिम संस्कार के सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाएंगे और सुरक्षा एजेंसियां हर स्तर पर सतर्क हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि ईरान के नए नेतृत्व, क्षेत्रीय तनाव और पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों के बीच यह अंतिम संस्कार केवल एक शोक समारोह नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।