कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में कई अहम राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। तीन दिनों तक चली इस बैठक में संगठन की आगामी योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सामाजिक अभियानों और देश से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की गई। हालांकि बैठक के दौरान सबसे अधिक चर्चा अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े विवाद को लेकर हुई। संघ ने इस मामले पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं प्रभावित होती हैं, इसलिए भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
बैठक के बाद जारी आधिकारिक जानकारी में स्पष्ट किया गया कि राम मंदिर से जुड़े इस मामले की जांच फिलहाल संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है और संघ को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी। संगठन ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच के परिणाम सामने आने के बाद पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी। संघ ने इस विषय पर किसी तरह की अटकलों से बचने की भी सलाह दी और कहा कि जांच प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
संघ की ओर से यह भी कहा गया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं इस मामले में कार्रवाई की पहल की है और उसके अनुरोध पर विशेष जांच दल (SIT) तथा पुलिस अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। संगठन का मानना है कि जांच अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है और जल्द ही इस प्रकरण में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही यह अपेक्षा भी जताई गई कि ट्रस्ट भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करे, जिससे चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी तथा सुरक्षित तरीके से हो सके।
बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है। ऐसे में मंदिर से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता या विवाद समाज में अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकता है। इसलिए मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी है कि व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत बनाया जाए और श्रद्धालुओं का विश्वास हर परिस्थिति में कायम रखा जाए।
संघ ने यह भी दोहराया कि किसी भी धार्मिक संस्थान की विश्वसनीयता उसके प्रशासनिक ढांचे की पारदर्शिता पर निर्भर करती है। यदि व्यवस्था मजबूत होगी तो भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना भी कम होगी। इसी कारण संगठन ने तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से आग्रह किया कि वह आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए ताकि आगे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक सुदृढ़ बने।
बेलगावी में हुई इस वार्षिक बैठक के दौरान केवल राम मंदिर का मुद्दा ही चर्चा का केंद्र नहीं रहा। संगठन ने देश के सामने मौजूद कई सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि जनसांख्यिकीय असंतुलन, नशे और ड्रग्स की बढ़ती समस्या, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, ग्राम विकास तथा विभिन्न सेवा गतिविधियों जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। संघ का मानना है कि इन क्षेत्रों में समाज की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
बैठक में शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी विचार किया गया। सामाजिक समरसता और संत परंपरा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा पर चर्चा हुई। संगठन ने कहा कि समाज में समानता, सद्भाव और एकता को मजबूत करने के लिए ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है।
इस दौरान संघ के सेवा कार्यों और प्रशिक्षण गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। जानकारी के अनुसार मार्च 2026 के बाद देशभर में आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण वर्गों का मूल्यांकन किया गया। इन प्रशिक्षण शिविरों में स्वयंसेवकों को संगठनात्मक कार्यों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया। शाखा संचालन, सेवा कार्य, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और समाज जीवन से जुड़े अन्य विषय प्रशिक्षण का हिस्सा रहे।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष देशभर में 83 संघ शिक्षा वर्ग तथा 12 कार्यकर्ता विकास वर्ग आयोजित किए गए। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कुल 18,842 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से स्वयंसेवकों को समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार किया गया। संगठन ने इन कार्यक्रमों को समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
बेलगावी में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित कुल 226 प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे और आगामी कार्ययोजना को लेकर सुझाव दिए। बैठक में संगठन के विस्तार, सेवा कार्यों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
संघ ने कहा कि सामाजिक चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। इसलिए संगठन आने वाले समय में समाज के बीच जागरूकता अभियान, सेवा गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर संचालित करेगा। पर्यावरण संरक्षण, परिवार संस्था को मजबूत करने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने तथा नशा मुक्ति जैसे विषयों पर विशेष अभियान चलाने की योजना पर भी विचार किया गया।
राम मंदिर से जुड़े विवाद के संदर्भ में संघ का स्पष्ट मत रहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर उचित जांच और कानूनी प्रक्रिया ही सबसे सही रास्ता है। संगठन ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कही। साथ ही यह भी दोहराया कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, इसलिए उसके संचालन और व्यवस्थाओं में सर्वोच्च स्तर की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक के समापन पर संगठन ने भरोसा जताया कि संबंधित जांच एजेंसियां तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करेंगी और जो भी आवश्यक होगा, वह कानून के अनुसार किया जाएगा। संघ ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो तथा राम मंदिर की गरिमा और प्रतिष्ठा अक्षुण्ण बनी रहे। इसी संदेश के साथ बेलगावी में आयोजित तीन दिवसीय बैठक का समापन हुआ, जिसमें संगठन ने राष्ट्रीय, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर अपनी आगामी दिशा भी स्पष्ट की।