दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ नई तकनीक, साइबर हमलों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने देशों के सामने कई जटिल परिस्थितियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे माहौल में क्षेत्रीय सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इसी संदर्भ में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने बिम्सटेक (BIMSTEC) देशों से सुरक्षा, आर्थिक विकास और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सदस्य देश मिलकर साझा दृष्टिकोण अपनाते हैं तो क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाया जा सकता है।
गुरुवार को आयोजित बिम्सटेक राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की पांचवीं बैठक में उद्घाटन संबोधन देते हुए डोभाल ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि कोई भी देश अकेले सभी चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता। बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में सहयोग, विश्वास और समन्वय ही सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने सदस्य देशों से अपील की कि वे सुरक्षा से जुड़े हर क्षेत्र में अपने सहयोग को और मजबूत करें।
डोभाल ने कहा कि भारत बिम्सटेक को केवल एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे अपनी विदेश नीति के प्रमुख स्तंभों में शामिल करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति, ‘एक्ट ईस्ट’ रणनीति और ‘महासागर’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टिकोण में बिम्सटेक की अहम भूमिका है। उनका कहना था कि इस मंच के माध्यम से भारत अपने पड़ोसी और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में विश्व कई प्रकार के संघर्षों और अस्थिरताओं से प्रभावित है। अलग-अलग क्षेत्रों में जारी युद्ध, राजनीतिक तनाव, वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव और तकनीकी विकास ने सुरक्षा की परिभाषा को व्यापक बना दिया है। अब केवल सीमाओं की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल नेटवर्क, महत्वपूर्ण अवसंरचना, आर्थिक तंत्र और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी समान रूप से आवश्यक हो गई है।
एनएसए ने साइबर सुरक्षा को आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध, डेटा चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और महत्वपूर्ण संस्थानों पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बिम्सटेक देशों के बीच साइबर सुरक्षा से जुड़े अनुभवों, तकनीकी जानकारी और संसाधनों का आदान-प्रदान बेहद जरूरी है, ताकि इन खतरों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का उल्लेख करते हुए डोभाल ने कहा कि ये ऐसी समस्याएं हैं जिनकी कोई सीमा नहीं होती। आतंकवादी संगठन और आपराधिक नेटवर्क आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। इसलिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त रणनीति तैयार करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने से इन चुनौतियों का अधिक प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सकता है।
उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) में आई बाधाओं का भी जिक्र किया। डोभाल ने कहा कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था कई बार प्रभावित हुई है, जिसका असर सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाकर व्यापारिक संपर्क मजबूत किए जा सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिरता और विकास को गति मिलेगी।
अपने भाषण में उन्होंने बिम्सटेक की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से जुड़े उन देशों को एक मंच पर लाता है जो तेजी से विकास कर रहे हैं और जिनकी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस समूह की कुल आबादी लगभग 1.7 अरब है, जो दुनिया की लगभग 22 प्रतिशत आबादी के बराबर है। वहीं सदस्य देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था करीब पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती आर्थिक क्षमता को दर्शाती है।
डोभाल ने कहा कि बिम्सटेक केवल आर्थिक या रणनीतिक साझेदारी का मंच नहीं है, बल्कि इसके पीछे हजारों वर्षों का साझा इतिहास और सांस्कृतिक विरासत भी जुड़ी हुई है। बंगाल की खाड़ी ने सदियों से इन देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा दिया है। यही ऐतिहासिक और सभ्यतागत रिश्ते आज संगठन की मजबूती का आधार बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है। सड़क, रेल, समुद्री और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाकर व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाया जा सकता है। इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी बल्कि क्षेत्रीय एकीकरण भी मजबूत होगा।
समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए डोभाल ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन, समुद्री संसाधनों की रक्षा और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना सभी सदस्य देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।
एनएसए ने क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) को भी बिम्सटेक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके अनुसार सदस्य देशों के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीकी सहयोग, विशेषज्ञता साझा करने और संस्थागत विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे सुरक्षा एजेंसियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और उभरती चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिम्सटेक देशों ने आतंकवाद विरोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, संगठित अपराध की रोकथाम और समुद्री सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति की है। हालांकि बदलती परिस्थितियों को देखते हुए इन प्रयासों को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी सदस्य देश साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हैं तो क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को नई मजबूती मिलेगी।
डोभाल ने यह भी कहा कि किसी भी क्षेत्र की प्रगति तभी संभव है जब वहां शांति और स्थिरता का वातावरण हो। आर्थिक विकास, निवेश, व्यापार और सामाजिक प्रगति के लिए सुरक्षित माहौल सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। इसलिए सुरक्षा और विकास को एक-दूसरे का पूरक मानते हुए आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने सदस्य देशों से नियमित संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि समय-समय पर होने वाली बैठकों, संयुक्त अभ्यासों और नीति स्तर पर चर्चा से आपसी विश्वास बढ़ता है तथा संकट की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित होती है।
बैठक के दौरान एनएसए ने यह भरोसा भी जताया कि बिम्सटेक भविष्य में क्षेत्रीय सहयोग का और अधिक प्रभावशाली मंच बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि साझा प्रयासों, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और पारस्परिक विश्वास के आधार पर सदस्य देश न केवल मौजूदा चुनौतियों का समाधान निकाल सकते हैं, बल्कि भविष्य की संभावित समस्याओं के लिए भी बेहतर तैयारी कर सकते हैं।
अपने संबोधन के अंत में डोभाल ने कहा कि बिम्सटेक देशों के बीच एकजुटता, रणनीतिक सहयोग और निरंतर संवाद ही इस पूरे क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सभी सदस्य राष्ट्र साझा हितों को प्राथमिकता देते हुए मिलकर आगे बढ़ते हैं तो हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र शांति, सुरक्षा, आर्थिक प्रगति और समृद्धि का मजबूत केंद्र बन सकता है। इसी सामूहिक सोच और सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को नई मजबूती मिलेगी और सदस्य देशों के नागरिकों के लिए विकास के नए अवसर भी तैयार होंगे।