घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को भी सुस्ती का माहौल देखने को मिला। सप्ताह के लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार लाल निशान के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही बिकवाली का दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों शुरुआती मिनटों में फिसल गए।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 350 अंकों से अधिक नीचे चला गया। कुछ देर बाद सुबह करीब 9:28 बजे यह लगभग 296 अंकों की कमजोरी के साथ 76,458.40 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 भी करीब 69 अंकों की गिरावट के साथ 23,927.10 के स्तर पर पहुंच गया और 23,900 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता, कच्चे तेल में तेजी और विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण निवेशकों ने फिलहाल जोखिम लेने से परहेज किया है। इसका असर शुरुआती कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी दिखाई दी, लेकिन व्यापक बाजार का रुख कमजोर बना रहा।
शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद मुद्रा बाजार से थोड़ी राहत मिली। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया लगभग 0.1 प्रतिशत मजबूत होकर 96.49 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 96.5650 के स्तर पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा बाजार में सीमित सुधार के बावजूद इक्विटी बाजार पर वैश्विक परिस्थितियों का दबाव अधिक प्रभावी रहा।
अगर सेंसेक्स की बात करें तो इसके 30 शेयरों में से अधिकांश पर बिकवाली का असर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में लगभग 25 कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल कुछ चुनिंदा शेयर ही बढ़त बनाए रखने में सफल रहे। इससे साफ संकेत मिला कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी बनी हुई है।
एविएशन सेक्टर की प्रमुख कंपनी इंडिगो के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया। इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, पावर ग्रिड, इन्फोसिस, ट्रेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। आईटी और फार्मा सेक्टर के कई दिग्गज शेयरों में बिकवाली बढ़ने से बाजार की कमजोरी और गहरी होती दिखाई दी।
दूसरी ओर कुछ कंपनियों के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई। इटरनल, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और मारुति सुजुकी जैसे शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली। हालांकि इन शेयरों में आई तेजी इतनी मजबूत नहीं थी कि वह पूरे बाजार की गिरावट को संतुलित कर सके।
सुबह लगभग 9:30 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इटरनल के शेयर करीब 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। ट्रेंट में भी हल्की तेजी दर्ज की गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा और पावर ग्रिड जैसे शेयर मामूली बढ़त में दिखाई दिए, जबकि अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और आईटीसी जैसे शेयर हल्की गिरावट के साथ कारोबार करते रहे।
बाजार में बिकवाली का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता गया। बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाइटन, मारुति, इंडिगो, एशियन पेंट्स, अडानी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक, टीसीएस और टाटा स्टील के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस जैसे शेयरों में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट दर्ज की गई। इनमें इन्फोसिस शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक दबाव वाले शेयरों में शामिल रहा।
केवल प्रमुख सूचकांक ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार भी दबाव में रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का असर देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 0.75 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयर भी निवेशकों की बिकवाली से प्रभावित हुए।
सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो फार्मा, हेल्थकेयर और रियल्टी सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहे। निफ्टी फार्मा इंडेक्स में प्रमुख दवा कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हेल्थकेयर सेक्टर भी निवेशकों की बिकवाली से अछूता नहीं रहा। इसी तरह रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी बनी रही। इन तीनों सेक्टरों ने शुरुआती कारोबार में बाजार की गिरावट को और बढ़ाने का काम किया।
हालांकि कुछ सेक्टरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन भी किया। एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में सीमित खरीदारी देखने को मिली। इन सेक्टरों के कुछ शेयरों ने बाजार की कमजोरी के बीच मजबूती दिखाई, लेकिन उनका प्रभाव इतना नहीं था कि प्रमुख सूचकांकों को हरे निशान में पहुंचा सके।
निफ्टी-50 इंडेक्स में डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, नेस्ले इंडिया और इन्फोसिस शुरुआती कारोबार के दौरान सबसे अधिक दबाव वाले शेयरों में शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर पूरे इंडेक्स पर भी दिखाई दिया। आईटी और फार्मा सेक्टर की कमजोरी ने निफ्टी की चाल को प्रभावित किया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम फिलहाल निवेशकों की रणनीति तय कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे आयात पर निर्भर देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का असर बाजार की धारणा पर भी पड़ता है।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। यदि वैश्विक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहती है तो विदेशी निवेशकों की ओर से सतर्क रुख देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में घरेलू निवेशक भी बड़े निवेश निर्णय लेने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों के निवेश पैटर्न पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक हालात में सुधार आता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
शुरुआती कारोबार के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि बाजार अभी भी दबाव से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है। लगातार चौथे दिन आई कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक रणनीति अपनानी चाहिए और वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए। फिलहाल बाजार की चाल यह दर्शा रही है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह मजबूत होने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता और सकारात्मक संकेतों का इंतजार रहेगा।