पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के नाम एक नई अपील जारी की है। मेदांता अस्पताल से लिखे गए अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका अनशन समाप्त करने का फैसला पूरी तरह सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। वांगचुक का कहना है कि यदि सरकार यह सार्वजनिक भरोसा देती है कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो वह अपना अनशन खत्म करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, यदि ऐसा आश्वासन नहीं मिलता है तो वह अपना आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रखेंगे।
करीब 25 दिनों से अधिक समय से जारी इस अनशन के बीच वांगचुक की तबीयत को लेकर भी लगातार चिंता जताई जा रही है। स्वास्थ्य संबंधी निगरानी के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां से उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए यह पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने सरकार से अपील की कि वह आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील फैसला ले।
अपने पत्र में वांगचुक ने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्र और युवा केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार की हिंसा या कानून व्यवस्था को चुनौती देना नहीं है। ऐसे में इन छात्रों के खिलाफ यदि किसी तरह की कानूनी कार्रवाई होती है तो इससे लोकतांत्रिक मूल्यों और युवाओं के विश्वास को गहरी चोट पहुंचेगी।
उन्होंने लिखा कि आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं का एकमात्र उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग करना है। यदि उन्हें इसी कारण कानूनी मामलों का सामना करना पड़े या प्रताड़ना झेलनी पड़े, तो यह उन लाखों छात्रों के लिए निराशाजनक संदेश होगा जो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह स्पष्ट रूप से घोषणा करे कि किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यदि सरकार इस संबंध में भरोसा देती है तो वह इसे केवल अपनी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि देश के युवाओं की आवाज को सम्मान मिलने के रूप में देखेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे आश्वासन के बाद वह इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे कि सरकार ने उनकी अपील के साथ-साथ देशभर के लाखों छात्रों की भावनाओं और अपेक्षाओं को भी गंभीरता से सुना है।
उन्होंने 20 जुलाई 2026 को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च का भी उल्लेख किया। वांगचुक ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हर परिस्थिति में शांतिपूर्ण रवैया बनाए रखा। उनके अनुसार, पुलिस की सख्ती और बल प्रयोग के आरोपों के बावजूद आंदोलनकारियों ने संयम नहीं छोड़ा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया। उनका कहना है कि देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ने भी देखा कि युवाओं ने धैर्य और अनुशासन के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
पत्र में उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि नागरिक बिना डर के अपनी बात रख सकें। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ बाद में कानूनी कार्रवाई की जाती है तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे युवाओं में भय या असुरक्षा की भावना पैदा हो।
वांगचुक ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और विश्वास सबसे प्रभावी माध्यम हैं। इसलिए उन्होंने सरकार से टकराव के बजाय सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने यह भी लिखा कि देश के युवा लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनकी आवाज को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए। यदि छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रख रहे हैं तो उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कदम उठाना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह ऐसा वातावरण बनाए जहां युवा बिना किसी डर के अपने विचार रख सकें।
मेदांता अस्पताल से जारी इस पत्र के बाद एक बार फिर उनके आंदोलन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। समर्थकों का मानना है कि सरकार यदि छात्रों को लेकर स्पष्ट आश्वासन देती है तो लंबे समय से जारी यह अनशन समाप्त हो सकता है। वहीं कई सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से अपील की है कि वह संवाद के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकाले और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय ले।
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार और आंदोलनकारी आपसी विश्वास के साथ आगे बढ़ें। उनका कहना है कि यदि छात्रों को यह भरोसा मिल जाता है कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाला कदम साबित होगा।
उन्होंने पत्र के अंत में दोहराया कि उनका अनशन व्यक्तिगत मांगों के लिए नहीं बल्कि उन युवाओं के हितों के लिए है जो शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का एक सकारात्मक आश्वासन न केवल उनके अनशन को समाप्त करेगा बल्कि लाखों छात्रों में यह संदेश भी देगा कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज को सम्मान दिया जाता है।
फिलहाल सबकी नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। यदि सरकार वांगचुक की इस अपील पर सकारात्मक रुख अपनाती है और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने का भरोसा देती है, तो कई सप्ताह से जारी उनका अनशन समाप्त हो सकता है। दूसरी ओर, यदि ऐसा आश्वासन नहीं मिलता है तो उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे और आंदोलन भी पहले की तरह चलता रहेगा। इस बीच उनके स्वास्थ्य पर भी लगातार नजर रखी जा रही है और समर्थक सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।