Skip to main content

The Scoopp

 

ईरान पर बढ़ सकता है अमेरिकी दबाव! तेहरान खाली कराने लगा ब्रिटेन, मध्य पूर्व में बढ़ी जंग की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। बीते कुछ दिनों में दोनों देशों की ओर से दिए गए बयान और सैन्य गतिविधियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। इसी बीच ब्रिटेन ने तेहरान में मौजूद अपने दूतावास से कर्मचारियों और नागरिकों को बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेचैनी बढ़ गई है।

मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस सप्ताह अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति को और आक्रामक बना सकता है। हालांकि अब तक किसी आधिकारिक अभियान की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही रिपोर्टों ने क्षेत्र में युद्ध की आशंका को और मजबूत कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने अपने सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। वाशिंगटन का कहना है कि यदि ईरान की ओर से समुद्री मार्गों या क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली कोई बड़ी कार्रवाई होती है तो उसका जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वहां किसी भी तरह की सैन्य चुनौती का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए अपने बयान में कहा था कि यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को निशाना बनाता है या अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो अमेरिका ईरान के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण ढांचों पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। दूसरी ओर ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत होती है तो उसका जवाब केवल एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सहयोगियों को भी इसका असर झेलना पड़ सकता है।

इन घटनाओं के बीच ब्रिटेन द्वारा तेहरान में अपने दूतावास से कर्मचारियों और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का फैसला भी काफी अहम माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि आने वाले दिनों में राजधानी तेहरान सहित कई इलाकों में हालात तेजी से बदल सकते हैं। इसी वजह से एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है।

इजरायली मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार इस सप्ताह क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए तैयारियां लगातार जारी हैं। हालांकि वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव में इजरायल प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है, लेकिन यदि संघर्ष व्यापक रूप लेता है तो इजरायल भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा सकता है।

इजरायल की सेना ने अपने रक्षा तंत्र को पहले से अधिक मजबूत करने पर जोर देना शुरू कर दिया है। मिसाइल रक्षा प्रणाली, हवाई सुरक्षा और रणनीतिक ठिकानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। सेना लगातार विभिन्न संभावित परिस्थितियों का आकलन कर रही है ताकि किसी भी आकस्मिक हमले की स्थिति में तुरंत जवाब दिया जा सके।

जानकारी के मुताबिक अमेरिका और इजरायल के बीच लगातार उच्चस्तरीय बातचीत जारी है। दोनों देशों के रक्षा और सुरक्षा अधिकारी हालात की समीक्षा कर रहे हैं। इजरायल का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले अगले फैसले पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए यरूशलेम की नजरें पूरी तरह वाशिंगटन पर टिकी हुई हैं।

इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया कि आने वाले दिनों की स्थिति काफी हद तक अमेरिकी नेतृत्व के फैसलों पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिका अपने सैन्य अभियान को और तेज करता है तो इजरायल भी संभावित जवाबी कार्रवाई को देखते हुए अपनी तैयारियां बढ़ाएगा। वहीं यदि बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है या युद्धविराम जैसा कोई रास्ता निकलता है तो क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को यह जानकारी दी है कि भविष्य में ईरान के भीतर कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए जा सकते हैं। इसके लिए रणनीतिक बमवर्षक विमानों के इस्तेमाल की भी योजना बताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह अब तक की सैन्य कार्रवाई की तुलना में कहीं अधिक बड़ा कदम माना जाएगा।

बताया जा रहा है कि अमेरिका पहली बार ईरान के अंदर ऐसे भारी बमवर्षक विमानों का उपयोग करने पर विचार कर रहा है जो अत्यधिक शक्तिशाली बम ले जाने में सक्षम हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के रणनीतिक सैन्य और ऊर्जा ढांचे को कमजोर करना हो सकता है।

इससे पहले भी अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के सैन्य अड्डों से उड़ान भरने वाले विमानों के जरिए क्षेत्र में अभियान चलाया था। अब चर्चा इस बात की है कि भविष्य की कार्रवाई पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और प्रभावशाली हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अमेरिकी सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

इजरायली मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका कुछ ऐसे पहाड़ी और सुरक्षित सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है जिन्हें ईरान की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इन ठिकानों तक पहुंचने के लिए विशेष प्रकार के भारी बमों की जरूरत होती है, जिन्हें केवल कुछ चुनिंदा बमवर्षक विमान ही ले जा सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के अपने बयानों में संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना अमेरिका की प्राथमिकता है। इसी वजह से सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।

दूसरी ओर ईरान लगातार यह दोहरा रहा है कि यदि उसके खिलाफ बड़े स्तर पर हमला किया गया तो वह भी जवाब देने में कोई नरमी नहीं बरतेगा। ईरानी नेतृत्व पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उसके पास क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता है। ऐसे में यदि सैन्य कार्रवाई बढ़ती है तो उसका प्रभाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और तेज होता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान और इजरायल की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं। आने वाले कुछ दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि सैन्य विकल्पों को प्राथमिकता दी गई तो मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है, ताकि किसी बड़े युद्ध की स्थिति से बचा जा सके।