पश्चिम बंगाल की अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा एक छात्र आंदोलन में शामिल होने के बाद नए विवाद के केंद्र में आ गई हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर तेजी से वायरल होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। तस्वीर में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक व्यंग्यात्मक पोस्टर हाथ में लिए दिखाई दे रही हैं, जिसे लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मामले में उनके खिलाफ कई जगह शिकायतें दर्ज कराई गई हैं और कानूनी कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है।
पूरा मामला उस समय सामने आया जब कोलकाता में छात्रों द्वारा आयोजित विरोध मार्च के दौरान श्रीलेखा मित्रा भी प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद थीं। प्रदर्शन खत्म होने के कुछ समय बाद उनकी एक तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई। तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक बहस छिड़ गई और बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि अभिनेत्री ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री का अपमान करने वाला पोस्टर प्रदर्शित किया। इसके बाद कई जिलों में शिकायतें दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
बताया जा रहा है कि बीजेपी नेता केया घोष ने सबसे पहले आनंदपुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके अलावा बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन सहित अन्य स्थानों पर भी अलग-अलग शिकायतें दी गईं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री से जुड़ा आपत्तिजनक चित्र दिखाकर सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक मर्यादा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन का अधिकार जरूर है, लेकिन किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
शिकायत में संविधान के अनुच्छेद 19 का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने की स्वतंत्रता प्राप्त है, लेकिन इस अधिकार के साथ कुछ संवैधानिक सीमाएं भी जुड़ी हुई हैं। यदि विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसी सामग्री का उपयोग किया जाता है जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो या किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचे, तो उस पर कानूनी जांच की जा सकती है।
हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिकायतें प्राप्त होने के बावजूद प्रारंभिक स्तर पर मामले की जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उस समय तक औपचारिक एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस संबंधित तस्वीर, घटनाक्रम और शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
विवाद बढ़ने के बाद श्रीलेखा मित्रा ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह से प्रधानमंत्री का अपमान करना नहीं था। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि जिस समय यह तस्वीर ली गई, उस दौरान वहां काफी अफरा-तफरी का माहौल था और प्रदर्शनकारी लगातार आगे बढ़ रहे थे। उसी दौरान किसी व्यक्ति ने उनके हाथ में पोस्टर थमा दिया और उन्होंने बिना उस पर ध्यान दिए उसे पकड़ लिया।
श्रीलेखा मित्रा ने यह भी कहा कि उस समय उन्होंने पढ़ने वाला चश्मा नहीं पहना हुआ था। उनके अनुसार, उनके पास केवल सनग्लास था, जिसकी वजह से पोस्टर पर छपी तस्वीर या उसके विवरण को वह ठीक से नहीं देख सकीं। उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें पहले से पता होता कि पोस्टर पर क्या बना हुआ है, तो वह उसे हाथ में नहीं लेतीं। उन्होंने कहा कि पूरी घटना कुछ ही सेकंड में हुई और तस्वीर भी उसी दौरान खींच ली गई।
अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर को लेकर नाराजगी भी जताई। उनका कहना था कि केवल एक तस्वीर के आधार पर उनकी मंशा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वह सरकार की नीतियों की आलोचक हो सकती हैं और कई मुद्दों पर अपनी राजनीतिक राय खुलकर रखती रही हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह देश या उसके संवैधानिक संस्थानों का अपमान करना चाहती हैं।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें देशद्रोही कहना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में किसी भी सरकार की आलोचना करना और अलग राजनीतिक विचार रखना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और वायरल तस्वीर के आधार पर उनके खिलाफ गलत धारणा बनाई जा रही है।
दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने अभिनेत्री की सफाई को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। शिकायत दर्ज कराने वाली केया घोष ने कहा कि मामला केवल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री के सम्मान का है। उनका कहना था कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह का पोस्टर दिखाना गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
केया घोष ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन यह स्वतंत्रता किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाने का माध्यम नहीं बन सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपने व्यवहार और सार्वजनिक संदेशों के प्रति अधिक जिम्मेदार होना चाहिए। इसी कारण उन्होंने पुलिस से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने अभिनेत्री की सफाई का समर्थन करते हुए कहा कि किसी तस्वीर के आधार पर तुरंत निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की। देखते ही देखते यह मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।
श्रीलेखा मित्रा लंबे समय से बंगाली फिल्म उद्योग का चर्चित चेहरा रही हैं। फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स के अलावा वह सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए भी जानी जाती हैं। टॉलीवुड में भाई-भतीजावाद, उद्योग के भीतर कथित पक्षपात और विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों पर उन्होंने कई बार खुलकर बयान दिए हैं। यही वजह है कि वह अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं।
राजनीतिक गतिविधियों और सामाजिक आंदोलनों में उनकी मौजूदगी नई बात नहीं मानी जाती। इससे पहले भी वह कई जनसरोकार के मुद्दों पर आयोजित कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों में भाग ले चुकी हैं। हालांकि इस बार वायरल हुई तस्वीर ने विवाद को कहीं अधिक बड़ा बना दिया है और मामला अब कानूनी जांच तक पहुंच गया है।
फिलहाल पुलिस शिकायतों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। यह देखा जाएगा कि वायरल तस्वीर, मौके की परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्य क्या संकेत देते हैं। दूसरी ओर श्रीलेखा मित्रा लगातार यही कह रही हैं कि उन्होंने जानबूझकर कोई आपत्तिजनक पोस्टर नहीं उठाया था और यह पूरी घटना अनजाने में हुई। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद पुलिस क्या निष्कर्ष निकालती है और मामले में आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई होती है।