देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं पर सख्ती लाने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा और पूरे देश में लागू किया जाएगा।
संसद के उच्च सदन में इस विधेयक पर लंबी चर्चा हुई। करीब आठ घंटे तक चली बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। चर्चा पूरी होने के बाद सरकार की ओर से जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह खड़े हुए, लेकिन उसी समय विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। सरकार ने विपक्ष के इस कदम को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया करार दिया।
सरकार का कहना है कि नया कानून केवल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) तक सीमित नहीं रहेगा। इसका दायरा काफी व्यापक होगा और इसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं तथा अन्य सभी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाएं शामिल होंगी। सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सकेगा तथा पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से कई सवाल भी उठाए गए। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए एजेंसी को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं के कारण इस संस्था पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। उनके इस बयान पर सदन में काफी हंगामा भी हुआ और सत्ता पक्ष ने इसका विरोध किया।
विधेयक पर मतदान के समय विपक्षी सांसद सदन में मौजूद नहीं थे क्योंकि वे पहले ही वॉकआउट कर चुके थे। इसके चलते बिल ध्वनिमत से पारित हो गया। विपक्ष के कुछ सांसदों ने अलग-अलग धाराओं में संशोधन प्रस्ताव भी दिए थे, लेकिन सदन ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। जिन सांसदों ने संशोधन पेश किए, उनमें जॉन ब्रिटास, ए.ए. रहीम, हरीश बीरान, संतोष कुमार, पी. विल्सन और तिरुचि शिवा शामिल थे। हालांकि किसी भी संशोधन को सदन की मंजूरी नहीं मिल सकी।
विपक्ष के वॉकआउट को लेकर सदन में सत्ता पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार जवाब देने के लिए तैयार थी, उसी समय विपक्ष सदन छोड़कर चला गया। उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप आचरण नहीं है और इससे स्पष्ट होता है कि विपक्ष चर्चा की बजाय राजनीतिक संदेश देना चाहता था।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने वॉकआउट से पहले कहा कि बहस के दौरान उठाए गए मुद्दों का जवाब देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह को सदन में उपस्थित होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दलों ने यही अपेक्षा जताई थी। गृह मंत्री के सदन में मौजूद न होने पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और उसके बाद सामूहिक रूप से सदन से बाहर चले गए।
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया। भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा है। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन के भीतर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए असंसदीय और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया तथा गंभीर और निराधार आरोप लगाए।
अनुराग ठाकुर ने अपने तीन पन्नों के नोटिस में कहा है कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए ताकि विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी कि राहुल गांधी सदन और अमित शाह दोनों से बिना किसी शर्त के सार्वजनिक माफी मांगें।
नोटिस में 29 जुलाई को लोकसभा में हुई कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है। उस दिन एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा चल रही थी। अनुराग ठाकुर का कहना है कि छात्रों से हुई बातचीत का जिक्र करते समय राहुल गांधी ने सदन के नियम 352 का उल्लंघन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया, जिसे विशेषाधिकार का मामला माना जाना चाहिए।
उधर सरकार का कहना है कि नया कानून देश की परीक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम कदम साबित होगा। हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित किया है। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून के जरिए दोषियों के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई संभव होगी और परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत किया जाएगा।
संसदीय प्रक्रिया के अनुसार अब दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026’ के रूप में लागू होगा। इसके बाद इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। सरकार अधिसूचना जारी कर यह भी तय करेगी कि कानून तत्काल प्रभाव से लागू होगा या किसी निर्धारित तारीख से इसकी शुरुआत की जाएगी।
राज्यसभा की कार्यवाही रात लगभग 8 बजकर 15 मिनट तक चली। विधेयक पारित होने के बाद सभापति ने सदन की बैठक 31 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। पूरे दिन चली बहस में परीक्षा प्रणाली, युवाओं का भविष्य, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि अंतिम चरण में विपक्ष की अनुपस्थिति के कारण मतदान बिना किसी बड़े विरोध के संपन्न हो गया।
इस तरह संसद के दोनों सदनों से संशोधन विधेयक पारित होने के साथ ही सरकार ने परीक्षा सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस ने संसद के भीतर राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। अब एक ओर राष्ट्रपति की मंजूरी पर सभी की नजरें हैं, तो दूसरी ओर यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि लोकसभा अध्यक्ष विशेषाधिकार नोटिस पर आगे क्या फैसला लेते हैं।
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