पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान उस समय माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक अश्वनी शर्मा के भाषण में इस्तेमाल किए गए एक शब्द और मुहावरे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। चर्चा के दौरान ‘बेटी’ शब्द के प्रयोग को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि सदन का माहौल शोर-शराबे और हंगामे में बदल गया।
मामले ने राजनीतिक रंग तब लिया जब आप के विधायकों और मंत्रियों ने आरोप लगाया कि भाजपा की सोच आज भी बेटा और बेटी के बीच भेदभाव करने वाली है। उनका कहना था कि विधानसभा जैसे गंभीर मंच पर इस तरह के शब्दों और मुहावरों का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता। सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए भाजपा पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसी मानसिकता समाज में गलत संदेश देती है।
विवाद बढ़ता देख भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने सदन में ही अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान का वास्तविक आशय कुछ और था, लेकिन उसे अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया। शर्मा ने कहा कि उन्होंने जिस शब्द और मुहावरे का उपयोग किया, वह पंजाब की आम बोलचाल की भाषा का हिस्सा है और उसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी सदस्य को वह शब्द अनुचित प्रतीत होता है तो उसे विधानसभा की कार्यवाही से हटाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
अश्वनी शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी व्यक्ति या वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह सार्वजनिक रूप से इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उनके मुताबिक किसी की भावनाओं का सम्मान करना उनकी प्राथमिकता है और इस मामले में उन्हें अफसोस जताने में कोई संकोच नहीं है।
सदन की कार्यवाही के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मुद्दे को वास्तविक संदर्भ से हटाकर राजनीतिक विवाद बना दिया। उनका आरोप था कि पंजाब सरकार अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक विफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के मुद्दों को अनावश्यक रूप से बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि उनके भाषण का मूल विषय राज्य और केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दे थे, लेकिन चर्चा का केंद्र केवल एक शब्द को बना दिया गया।
शर्मा ने यह भी कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की राजनीति लंबे समय से हर विषय के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने की रही है। उनका कहना था कि विधानसभा में भी जब उन्होंने कुछ सवाल उठाए तो जवाब देने के बजाय सत्ता पक्ष ने उनके शब्दों को लेकर विवाद खड़ा कर दिया। उनके अनुसार वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय बहस को दूसरी दिशा में मोड़ने का प्रयास किया गया।
भाजपा विधायक ने दोहराया कि महिलाओं के सम्मान को लेकर उनकी सोच पूरी तरह सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि वह केवल भाषणों में ही नहीं बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन में भी महिलाओं और बेटियों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में बेटियों को सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है और उनके परिवार में भी इसी भावना का पालन किया जाता है।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम अपने घर से बेटियों का आशीर्वाद लेकर निकलते हैं। यदि मेरे किसी शब्द से किसी भी व्यक्ति की भावना आहत हुई है तो मैं इसके लिए सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट करता हूं। मेरा उद्देश्य किसी का अपमान करना कभी नहीं रहा।”
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस देखने को मिली। आप के विधायकों ने भाजपा पर महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। विपक्ष का कहना था कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और उसे राजनीतिक हथियार बनाया गया।
विवाद के दौरान अश्वनी शर्मा ने यह भी कहा कि यदि किसी शब्द पर आपत्ति थी तो उसका समाधान सदन की कार्यवाही से उसे हटाकर किया जा सकता था। लेकिन इसके बावजूद पूरे मामले को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया। उनके अनुसार यह विवाद वास्तविक मुद्दों पर चर्चा से ध्यान हटाने की रणनीति का हिस्सा है।
भाजपा विधायक ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्मचारियों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब सरकार कई मामलों में कर्मचारियों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा रही है, जिससे सरकार का कर्मचारी विरोधी रवैया सामने आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने के बजाय सरकार कानूनी लड़ाई लड़ रही है और अब अपनी छवि सुधारने के लिए दूसरे विषयों को उछाल रही है।
वहीं, सत्ता पक्ष ने भाजपा के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आप के नेताओं का कहना था कि विधानसभा में बोले गए प्रत्येक शब्द की जिम्मेदारी संबंधित सदस्य की होती है। उनका मानना था कि सार्वजनिक जीवन में भाषा का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए ताकि किसी भी वर्ग, विशेषकर महिलाओं, को गलत संदेश न मिले।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के भीतर भाषा और शब्दों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब मामला महिलाओं से जुड़े किसी शब्द या टिप्पणी का हो तो उसकी संवेदनशीलता और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में अक्सर राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से मुद्दे को सामने रखते हैं और बहस सदन से निकलकर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन जाती है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने सार्वजनिक रूप से खेद जताते हुए यह साफ कर दिया है कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी इस मामले को महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक सोच से जोड़कर भाजपा पर लगातार निशाना साध रही है। ऐसे में विधानसभा में शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है, जहां दोनों दल अपने-अपने पक्ष को सही साबित करने में जुटे हुए हैं।