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असम में बाढ़ का संकट गहराया: 97 लोगों की जा चुकी जान, 15 जिलों के 1.68 लाख से ज्यादा लोग अब भी प्रभावित

असम में लगातार बनी हुई बाढ़ की स्थिति लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई दिनों से जारी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने राज्य के अनेक इलाकों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान दो और लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसके साथ ही इस साल बाढ़ से मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 97 तक पहुंच गया है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन कई क्षेत्रों में हालात अभी भी सामान्य होने से काफी दूर हैं।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में जलभराव के कारण हजारों परिवार अपने घरों से दूर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। कई गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से टूट चुका है, जबकि खेती, पशुपालन और स्थानीय कारोबार पर भी बाढ़ का गहरा असर देखने को मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दिन में जिन दो लोगों की जान गई है, उनमें एक व्यक्ति गोलाघाट जिले का और दूसरा उदालगुड़ी जिले का निवासी था। इन दोनों मौतों के बाद इस वर्ष बाढ़ और उससे जुड़े हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या 97 हो गई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

राज्य के कुल 15 जिले फिलहाल बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित जिलों में गोलाघाट, शिवसागर, जोरहाट, उदालगुड़ी, कामरूप महानगर, कामरूप, नगांव, दरांग, सोनितपुर, होजाई, लखीमपुर, बिस्वनाथ, चराइदेव, कार्बी आंगलोंग और धेमाजी शामिल हैं। इन जिलों में रहने वाले लाखों लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर स्कूलों की पढ़ाई बाधित हुई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन नावों के सहारे किया जा रहा है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 1.68 लाख से अधिक हो गई है। एक दिन पहले यह संख्या लगभग 1.60 लाख थी और प्रभावित जिलों की संख्या 14 थी। अब एक अतिरिक्त जिला भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल हो गया है, जिससे साफ है कि स्थिति में अभी सुधार नहीं आया है। लगातार हो रही बारिश और नदियों में बढ़ते जलस्तर के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।

अगर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की बात करें तो गोलाघाट सबसे ऊपर है। यहां लगभग 54 हजार लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। बड़ी संख्या में घरों में पानी घुस चुका है और कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूट गया है। इसके बाद शिवसागर दूसरा सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 49 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। वहीं जोरहाट जिले में करीब 27 हजार लोग इस प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। इन तीन जिलों में राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

बाढ़ की वजह से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का साफ पानी और रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके। ASDMA के अनुसार, फिलहाल छह जिलों में कुल 133 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में लगभग 45 हजार विस्थापित लोगों को अस्थायी आश्रय दिया गया है। राहत केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान भी पहुंचाया जा रहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बचाव दल लगातार संवेदनशील इलाकों में निगरानी कर रहे हैं। जहां सड़क संपर्क टूट गया है, वहां नावों और अन्य वैकल्पिक साधनों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। चिकित्सा टीमों को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है ताकि किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर तत्काल इलाज उपलब्ध कराया जा सके। बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है।

ग्रामीण इलाकों में किसानों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में पानी भर जाने से फसलें प्रभावित हुई हैं और कई जगह पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक पानी भरा रहने से कृषि गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक कठिनाइयां बढ़ने की आशंका है। कई छोटे व्यापारी भी नुकसान झेल रहे हैं क्योंकि बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी कई स्थानों पर बाधित हुई है। प्रशासन इन सेवाओं को जल्द बहाल करने के प्रयास कर रहा है, लेकिन कई इलाकों में पानी का स्तर अधिक होने के कारण काम में दिक्कतें आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जलस्तर कम होगा, क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम भी तेज किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि असम में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने पर निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल जाता है। इस बार भी कई क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण हालात बिगड़े हैं। प्रशासन मौसम विभाग से मिल रही जानकारी के आधार पर संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि राहत एवं बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध नहीं हो जाती। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है। साथ ही नदियों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह भी दी गई है।

फिलहाल असम के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है। हजारों परिवार अब भी राहत शिविरों में रह रहे हैं और बारिश थमने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक लगातार राहत पहुंचाने और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने की है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और नदियों के जलस्तर पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इन्हीं पर यह निर्भर करेगा कि राज्य को इस बाढ़ संकट से राहत कब मिल पाएगी।