राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, किसानों, विद्यार्थियों, विकास, गरीबी उन्मूलन, विदेश नीति और पर्यावरण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में हर नागरिक की भागीदारी बेहद जरूरी है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के फैसले को राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ इस समझौते को रोकना विशेष रूप से भारतीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और विकास के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के हितों का ध्यान रखना भी सभी की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को भारत का भविष्य बताते हुए परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार और समाज का मिलकर काम करना आवश्यक है, उसी तरह विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए भी सामूहिक प्रयास होने चाहिए।
संविधान और लोकतंत्र में जनभागीदारी सबसे अहम
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत देश की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की चर्चा से की। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल शासन व्यवस्था का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनभागीदारी की भावना पर आधारित व्यवस्था है। देश के नागरिक जिस तरह लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं, वह भारतीय लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि यह उन संघर्षों और बलिदानों को याद करने का अवसर भी है, जिनकी वजह से भारत आज एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में खड़ा है। उन्होंने देश और विदेश में रह रहे भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए तिरंगे को स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देशवासियों को अपने राष्ट्र के भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी मिली। आज किसान, मजदूर, वैज्ञानिक, इंजीनियर, शिक्षक, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और विद्यार्थी अपने-अपने क्षेत्र में योगदान देकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।
किसान और जवानों से लेकर विद्यार्थियों तक सबका योगदान
अपने भाषण में राष्ट्रपति ने देश के अलग-अलग वर्गों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति केवल सरकार की योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के हर वर्ग का योगदान जरूरी है।
उन्होंने किसानों को देश का अन्नदाता बताते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की आधारशिला है। वहीं वैज्ञानिक और इंजीनियर देश को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लोगों के जीवन की रक्षा कर रहे हैं, जबकि शिक्षक और विद्यार्थी देश के भविष्य को तैयार कर रहे हैं।
राष्ट्रपति के मुताबिक, भारत की वास्तविक ताकत उसके नागरिकों की मेहनत और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना में है। यही भावना देश को आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत बनाएगी।
सिंधु जल संधि पर राष्ट्रपति ने कही बड़ी बात
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में सिंधु जल संधि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ इस संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में उठाया गया निर्णायक कदम है। उन्होंने खास तौर पर इसे भारतीय किसानों के हित से जोड़ा।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि देश के प्राकृतिक संसाधनों और उनके इस्तेमाल को लेकर भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है। भारत को विकास की गति बनाए रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं है। आने वाली पीढ़ियों को भी इन संसाधनों का इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करना देश की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम से मिले आदर्शों को साथ लेकर आधुनिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वेद वाक्य ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का उल्लेख करते हुए नागरिकों से राष्ट्र के प्रति सदैव सजग और जिम्मेदार रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान देश ने तेज गति से विकास किया है। इस विकास में समावेशी प्रगति को महत्व दिया गया है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की गई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के सामने अब 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का बड़ा लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक विकास, तकनीकी क्षमता, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करना होगा।
25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए
राष्ट्रपति मुर्मू ने सरकार की सामाजिक और आर्थिक योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर लाने में सफलता मिली है। उन्होंने वित्तीय समावेशन की दिशा में प्रधानमंत्री जन धन योजना को भी महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति के अनुसार, जन धन योजना के माध्यम से करीब 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं। इनमें 32 करोड़ से ज्यादा महिला खाताधारक शामिल हैं। उन्होंने इसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लगभग 60 करोड़ लोगों को हर वर्ष 5 लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी योजनाओं का उद्देश्य समाज के उन वर्गों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाना है, जिन्हें लंबे समय तक संसाधनों और अवसरों की कमी का सामना करना पड़ा।
विद्यार्थियों और परीक्षा व्यवस्था पर भी जोर
राष्ट्रपति ने देश के विद्यार्थियों को भारत का भविष्य निर्माता बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों की शिक्षा और उनका भविष्य सुरक्षित करना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने संकेत दिया कि परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और विद्यार्थियों के हित में बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की तरह विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सरकार, शिक्षण संस्थानों, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज को मिलकर काम करना होगा।
राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय आया है जब देश में परीक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों के तनाव को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को देश के भविष्य से जोड़ते हुए उनके लिए बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विदेश नीति में राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता
राष्ट्रपति ने भारत की विदेश नीति का जिक्र करते हुए कहा कि देश के अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार राष्ट्रीय हित है। उन्होंने बताया कि आर्थिक सहयोग बढ़ाने और विभिन्न देशों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के बीच भारत ने अपनी भूमिका मजबूत की है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का सम्मान बढ़ा है और देश दुनिया के सामने अपनी बात मजबूती से रखने में सक्षम हुआ है।
राष्ट्रपति के मुताबिक, आने वाले समय में भारत को अपनी वैश्विक भूमिका और मजबूत करनी होगी। इसके लिए आर्थिक क्षमता, कूटनीतिक प्रभाव और आत्मनिर्भरता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी आगे बढ़ाना जरूरी है।
पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा पर संदेश
राष्ट्रपति मुर्मू ने पर्यावरण संरक्षण को भारतीय परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, वर्तमान पीढ़ी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके फैसलों का नुकसान आने वाली पीढ़ियों को न उठाना पड़े। देश के विकास के साथ जंगल, जल, जमीन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने नागरिकों से भी पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने और देश के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।
राष्ट्रपति भवन के एट होम रिसेप्शन में दिखेगी चार राज्यों की संस्कृति
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला एट होम रिसेप्शन भी इस बार खास आकर्षण का केंद्र रहेगा। अमृत उद्यान परिसर में होने वाले इस आयोजन में करीब 650 मेहमानों के शामिल होने की जानकारी है। इनमें लगभग 100 VVIP अतिथि होंगे।
इस बार समारोह की थीम में महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं विरासत को विशेष स्थान दिया गया है। आयोजन के जरिए इन राज्यों की पारंपरिक कला, संस्कृति और प्रकृति के साथ उनके संबंध को प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
मेहमानों के स्वागत के लिए मध्य प्रदेश के महेश्वर में तैयार किया गया हाथ से बुना महेश्वरी स्टोल इस्तेमाल किया जाएगा। इस स्टोल के डिजाइन में चारों राज्यों की पारंपरिक बुनाई और सांस्कृतिक मोटिफ को शामिल किया गया है।
क्षेत्रीय स्वाद और लोककलाओं से सजेगा समारोह
एट होम रिसेप्शन के भोजन में भी चारों राज्यों की क्षेत्रीय पहचान दिखाई देगी। कार्यक्रम के मेन्यू में कोंकण का पाटोलेओ, छत्तीसगढ़ का मिनी फरा, महाराष्ट्र का खामंग काकड़ी और मध्य प्रदेश के जबलपुर की गटपट जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल किए जाने की जानकारी है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अलग-अलग राज्यों की लोक परंपराओं को मंच दिया जाएगा। इनमें गेड़ी नृत्य, गौर माड़िया, लावणी, तुतारी, सोंगी मुखौटे, भगोरिया, बैगा करमा, समई और घोड़े मोड़नी जैसी प्रस्तुतियां शामिल होंगी।
इस तरह राष्ट्रपति का स्वतंत्रता दिवस संदेश जहां देश के विकास, सुरक्षा और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहा, वहीं राष्ट्रपति भवन का एट होम समारोह भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करेगा। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में जिस सामूहिक भागीदारी की भावना पर जोर दिया, वही भावना देश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता में भी दिखाई देती है।