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UGC-NET की तीन परीक्षाएं रद्द, सितंबर में फिर होगा एग्जाम; NTA ने पेपर की गड़बड़ियों पर लिया बड़ा फैसला

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने UGC-NET परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला किया है। एजेंसी ने इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इन विषयों के प्रश्नपत्रों में कई तरह की खामियां सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया। NTA की ओर से स्पष्ट किया गया कि प्रश्नपत्रों में केवल मामूली टाइपिंग की गलतियां नहीं थीं, बल्कि स्पेलिंग, प्रिंटिंग, अनुवाद, व्याकरण और तथ्य संबंधी कई समस्याएं पाई गईं। इसके अलावा कुछ ऐसे प्रश्न भी परीक्षा में दोबारा शामिल हो गए थे, जिन्हें पहले की परीक्षाओं में पूछा जा चुका था।

एजेंसी ने कहा कि छात्रों की ओर से आपत्तियां मिलने के बाद मामले की गंभीरता से जांच कराई गई। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। समिति ने प्रश्नपत्रों की समीक्षा करने के बाद माना कि इन तीनों विषयों की परीक्षा के परिणाम को मौजूदा प्रश्नपत्रों के आधार पर आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। इसी वजह से पूरी परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।

सितंबर में दोबारा होगी तीनों विषयों की परीक्षा

NTA ने री-एग्जाम का शेड्यूल भी जारी कर दिया है। अब UGC-NET के इंग्लिश और कॉमर्स विषय की परीक्षा 9 सितंबर को होगी, जबकि सोशियोलॉजी का पेपर 10 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए किसी तरह की अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी।

इंग्लिश विषय की परीक्षा 9 सितंबर को सुबह की शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। इसका समय सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रखा गया है। इसी दिन कॉमर्स विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा दूसरी पाली में होगी। कॉमर्स का पेपर दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा।

सोशियोलॉजी के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा 10 सितंबर को होगी। यह परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की जाएगी। यानी तीनों विषयों के विद्यार्थियों को अब पहले से अलग परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार दोबारा परीक्षा में शामिल होना होगा।

NTA ने साफ किया है कि री-एग्जाम के लिए छात्रों से नई आवेदन फीस नहीं ली जाएगी। जिन अभ्यर्थियों ने पहले इन विषयों की परीक्षा दी थी, उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

आंसर-की के बाद सामने आई थीं शिकायतें

UGC-NET की परीक्षा 22 जून से 30 जून के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा खत्म होने के बाद जब प्रश्नपत्रों और उत्तरों से जुड़े विवरण सामने आए, तो कई अभ्यर्थियों ने प्रश्नों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराईं। छात्रों ने खास तौर पर प्रश्नपत्र की भाषा, प्रिंटिंग और सवालों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

इसके बाद NTA ने आपत्तियों और शिकायतों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई। समिति ने प्रश्नपत्रों को दोबारा जांचा और पाया कि शिकायतों में काफी हद तक तथ्य मौजूद थे। जांच के दौरान प्रश्नपत्रों में कई अलग-अलग स्तर की गलतियां सामने आईं।

NTA के अनुसार, कुछ सवालों में शब्दों की स्पेलिंग गलत थी। कई जगह प्रश्नों की छपाई में गड़बड़ी पाई गई। इसके अलावा कुछ नामों को सही तरीके से नहीं लिखा गया था। पुस्तकों के शीर्षकों में भी त्रुटियां मिलीं, जिससे प्रश्नों का वास्तविक संदर्भ प्रभावित हो रहा था।

कुछ प्रश्नों की भाषा भी सही नहीं थी। कई जगह व्याकरण और विराम चिह्नों की गलतियां मिलीं। विशेषज्ञ समिति ने अनुवाद से जुड़ी कमियों को भी गंभीर माना। ऐसे मामलों में उम्मीदवार के लिए प्रश्न का सही अर्थ समझना मुश्किल हो सकता था और इससे उसके उत्तर पर असर पड़ने की संभावना थी।

पहले पूछे जा चुके सवाल भी दोहराए गए

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि समिति को कुछ प्रश्न ऐसे भी मिले, जो पहले UGC-NET की परीक्षाओं में पूछे जा चुके थे। यानी प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में पुराने प्रश्नों की पुनरावृत्ति देखी गई।

NTA ने माना कि केवल गलत या विवादित प्रश्नों को प्रश्नपत्र से हटाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता था। यदि सिर्फ कुछ सवालों को हटाया जाता, तो पूरे प्रश्नपत्र की विश्वसनीयता और परीक्षा के मूल्यांकन की निष्पक्षता पर सवाल बने रहते।

इसी वजह से एजेंसी ने तीनों विषयों की परीक्षा को पूरी तरह दोबारा कराने का फैसला किया। इससे उन सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सकेगा, जिन्होंने इन विषयों के लिए परीक्षा दी थी।

84 विषयों की आंसर-की जारी, तीन की रोकी गई

NTA ने रविवार सुबह UGC-NET के 87 विषयों में से 84 विषयों की प्रोविजनल आंसर-की जारी की। उम्मीदवार इन विषयों के प्रश्नों और उत्तरों की जांच कर सकते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति भी दर्ज करा सकते हैं।

हालांकि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की आंसर-की जारी नहीं की गई। इन तीन विषयों को लेकर सामने आई शिकायतों और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद एजेंसी ने इनके परिणाम की प्रक्रिया को रोक दिया।

NTA के इस फैसले से यह स्पष्ट है कि इन विषयों की परीक्षा के मौजूदा प्रश्नपत्र को मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। अब उम्मीदवारों को निर्धारित नई तारीख पर फिर से परीक्षा देनी होगी और उसी परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

छात्रों के लिए क्या है अहम जानकारी?

री-एग्जाम की घोषणा के बाद इन तीनों विषयों के अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी नए सिरे से व्यवस्थित करनी होगी। उन्हें नई परीक्षा तारीख और शिफ्ट का ध्यान रखना होगा। इंग्लिश के उम्मीदवारों की परीक्षा 9 सितंबर की सुबह होगी, जबकि कॉमर्स की परीक्षा उसी दिन दोपहर की पाली में होगी। सोशियोलॉजी के अभ्यर्थियों का पेपर 10 सितंबर की सुबह आयोजित किया जाएगा।

सबसे राहत की बात यह है कि दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों से नई फीस नहीं ली जाएगी। यानी पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थी बिना अतिरिक्त शुल्क के री-एग्जाम दे सकेंगे।

उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से संबंधित आगे की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और नए एडमिट कार्ड तथा परीक्षा केंद्र से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद उसे ध्यान से जांच लें।

NTA की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल

UGC-NET के प्रश्नपत्र में गड़बड़ियों का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पहले से ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सवालों के घेरे में रही है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परीक्षा प्रबंधन को लेकर पिछले कुछ समय में एजेंसी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।

NEET-UG को लेकर सामने आए विवादों ने भी NTA की कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छेड़ी थी। पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी दूसरी शिकायतों के बाद एजेंसी को कई स्तरों पर जवाब देना पड़ा था। इस पृष्ठभूमि में UGC-NET के तीन विषयों की परीक्षा रद्द होना भी एजेंसी के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि इस बार NTA ने छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ समिति से प्रश्नपत्रों की समीक्षा कराई। समिति की रिपोर्ट के आधार पर पूरी परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।

परीक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत

UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक छोटी सी भाषा संबंधी गलती भी किसी उम्मीदवार के उत्तर को प्रभावित कर सकती है। वहीं किसी प्रश्न का गलत अनुवाद, तथ्यात्मक त्रुटि या पहले पूछे गए प्रश्न की पुनरावृत्ति परीक्षा के समान अवसर के सिद्धांत पर असर डाल सकती है।

इसी कारण NTA ने तीनों विषयों के मामले में केवल कुछ प्रश्न हटाने के बजाय पूरी परीक्षा फिर से कराने का रास्ता चुना है। अब नई परीक्षा में यह सुनिश्चित करना एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि प्रश्नपत्र पूरी तरह जांचा हुआ हो और उसमें किसी तरह की भाषाई, तथ्यात्मक या प्रिंटिंग संबंधी समस्या न रहे।

फिलहाल इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के हजारों अभ्यर्थियों को सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी होगी। NTA के मुताबिक इंग्लिश और कॉमर्स का पेपर 9 सितंबर तथा सोशियोलॉजी की परीक्षा 10 सितंबर को आयोजित की जाएगी। इन परीक्षाओं के लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं बाकी 84 विषयों के लिए जारी की गई प्रोविजनल आंसर-की के आधार पर आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।