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The Scoopp

 

चीनी-गुड़ की कीमतों में तेज उछाल, रसोई से मिठाई की दुकानों तक बढ़ी चिंता; एथेनॉल भी बना वजह

त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। चीनी और गुड़ की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खुदरा बाजार में जहां करीब 15 दिन पहले चीनी लगभग 48 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी, वहीं अब कई जगह इसका भाव 62 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह गुड़ के दाम भी 60 रुपये से बढ़कर करीब 100 रुपये प्रति किलो बताए जा रहे हैं।

कीमतों में इस उछाल का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी रोजमर्रा की जरूरतों में चीनी और गुड़ शामिल हैं। चाय-कॉफी से लेकर घर में बनने वाली मिठाइयों, खीर और दूसरे पकवानों तक इन दोनों चीजों का इस्तेमाल होता है। वहीं, त्योहारों के नजदीक आने के साथ मिठाई और खाद्य पदार्थ बनाने वाले कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

त्योहारों से पहले बढ़ी कारोबारियों की चिंता

चीनी और गुड़ की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने खुदरा व्यापारियों और मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि अगर कच्चे माल की लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में इसका असर तैयार खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य मीठे पकवानों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी और गुड़ जैसे जरूरी कच्चे माल के महंगे होने से हलवाई, बेकरी, मिठाई की दुकानें और छोटे खाद्य कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। कारोबारियों को डर है कि मांग बढ़ने के समय अगर सप्लाई और कीमतों पर दबाव बना रहा तो बाजार में तैयार उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।

कुछ व्यापारियों ने सरकार से बाजार की स्थिति पर नजर रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहारों से पहले कीमतों में अनियंत्रित बढ़ोतरी हुई तो इसका बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ेगा।

15 दिन में चीनी के भाव में बड़ा उछाल

खुदरा कारोबारी प्रवीण गोयल के मुताबिक, करीब दो सप्ताह पहले चीनी 48 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास उपलब्ध थी। अब इसका खुदरा भाव 62 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी कुछ बाजारों में उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में करीब 14 से 17 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।

गुड़ की कीमत में इससे भी ज्यादा तेजी बताई जा रही है। कारोबारी के अनुसार, लगभग 15 दिन पहले गुड़ 60 रुपये किलो के आसपास बिक रहा था। अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इस हिसाब से गुड़ के दाम में करीब 40 रुपये प्रति किलो का अंतर आया है।

कीमतों में इस तरह के बदलाव का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहता। जिन दुकानदारों और कारोबारियों को बड़ी मात्रा में चीनी या गुड़ खरीदना पड़ता है, उनके लिए लागत में मामूली बढ़ोतरी भी कुल खर्च पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

बादाम भी हुआ महंगा, मिठाई कारोबार पर दोहरी मार

चीनी और गुड़ के अलावा ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी की बात सामने आई है। कारोबारियों के अनुसार, करीब एक महीने पहले बादाम लगभग 900 रुपये प्रति किलोग्राम में उपलब्ध था। अब इसका भाव बढ़कर करीब 1,100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

मिठाई बनाने वाले कारोबारियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि कई उत्पादों में चीनी के साथ ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल भी होता है। त्योहारों के दौरान काजू, बादाम और दूसरे मेवों की मांग बढ़ने पर इनकी कीमतों में होने वाला बदलाव भी मिठाइयों की कुल लागत को प्रभावित कर सकता है।

अगर चीनी, गुड़ और ड्राई फ्रूट्स जैसे प्रमुख कच्चे माल महंगे रहते हैं तो दुकानदारों के सामने दो विकल्प रह जाते हैं। वे या तो अपनी लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन करें या फिर उत्पादों के दाम बढ़ाकर उसका भार ग्राहकों पर डालें। छोटे कारोबारियों के लिए लगातार बढ़ती लागत को संभालना और भी मुश्किल हो सकता है।

उत्पादन में कमी को भी बताया जा रहा वजह

बाजार में चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे उत्पादन और उपलब्धता से जुड़े कई कारण बताए जा रहे हैं। एक थोक कारोबारी के मुताबिक, इस साल देश में करीब 3.20 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान था, लेकिन वास्तविक उत्पादन लगभग 2.80 लाख टन तक रहने की बात कही जा रही है।

उत्पादन में अनुमानित कमी के कारण बाजार में उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा चीनी के निर्यात का भी बाजार पर प्रभाव बताया जा रहा है। हालांकि बढ़ती घरेलू कीमतों को देखते हुए फिलहाल निर्यात रोकने की बात कही गई है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में खुदरा दाम कम होते नजर नहीं आ रहे हैं।

थोक कारोबारियों का दावा है कि पिछले दो महीनों के दौरान चीनी के भाव में लगभग 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है।

स्टॉक लिमिट से बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने 1 अगस्त से चीनी के स्टॉक को लेकर सीमा भी तय की है। कारोबारियों के मुताबिक, थोक व्यापारी अब निर्धारित सीमा के तहत ही स्टॉक रख और बेच सकता है। बताया गया है कि एक थोक कारोबारी 30 दिनों में 4 हजार क्विंटल तक चीनी बेच सकेगा।

स्टॉक लिमिट लागू करने का उद्देश्य बाजार में जरूरत से ज्यादा भंडारण और संभावित जमाखोरी पर नियंत्रण रखना बताया जा रहा है। हालांकि कारोबारी वर्ग का कहना है कि बाजार में कीमतों पर दबाव के पीछे केवल स्टॉक का मुद्दा नहीं है। उत्पादन, मांग, उपलब्धता और एथेनॉल से जुड़े कारकों को भी इसमें महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि स्टॉक सीमा और अन्य सरकारी उपायों का बाजार कीमतों पर कितना असर पड़ता है।

एथेनॉल का भी कनेक्शन बताया जा रहा

चीनी उद्योग में एथेनॉल का इस्तेमाल और उत्पादन लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। कारोबारियों का कहना है कि गन्ने और उससे बनने वाले उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर बदलती प्राथमिकताओं का असर चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।

चीनी मिलों के लिए गन्ने से केवल चीनी बनाना ही एकमात्र विकल्प नहीं रह गया है। एथेनॉल उत्पादन भी उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसी वजह से कुछ कारोबारी चीनी की मौजूदा कीमतों के पीछे एथेनॉल को भी एक कारण मान रहे हैं।

हालांकि चीनी के दाम बढ़ने की पूरी तस्वीर केवल एक वजह से नहीं समझी जा सकती। उत्पादन, घरेलू खपत, स्टॉक, बाजार की मांग, सरकारी नीतियां और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मिलकर कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए मौजूदा तेजी को लेकर अंतिम स्थिति आने वाले दिनों के बाजार रुझान से ज्यादा स्पष्ट होगी।

आम आदमी की जेब पर सीधा असर

चीनी के दाम में प्रति किलो 15 से 17 रुपये तक की बढ़ोतरी भले ही एक खरीद में छोटी लग सकती है, लेकिन नियमित इस्तेमाल करने वाले परिवारों के मासिक बजट पर इसका असर पड़ सकता है। खासकर त्योहारों के दौरान जब घरों में मिठाइयां और दूसरे मीठे पकवान ज्यादा बनाए जाते हैं, तब चीनी और गुड़ की खपत भी बढ़ जाती है।

दूसरी ओर, बाजार में चीनी और गुड़ महंगे होने पर केवल इन्हीं वस्तुओं की खरीदारी महंगी नहीं होती। इनका इस्तेमाल जिन खाद्य उत्पादों में होता है, उनकी उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है। मिठाई, बेकरी उत्पाद, पेय पदार्थ और अन्य तैयार खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ने की संभावना रहती है।

यही वजह है कि त्योहारों से पहले चीनी और गुड़ के भाव में आई तेजी को लेकर कारोबारी सतर्क हैं। अगर आने वाले दिनों में कीमतों में नरमी नहीं आती और मांग बढ़ने के साथ सप्लाई पर दबाव बना रहता है, तो त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि उत्पादन, स्टॉक लिमिट और सरकारी कदमों के बाद चीनी की उपलब्धता में कितना सुधार आता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गुड़ और दूसरे खाद्य कच्चे माल के दाम किस दिशा में जाते हैं। त्योहारों का सीजन करीब आने के साथ कीमतों की स्थिति आम परिवारों से लेकर मिठाई और खाद्य कारोबारियों तक, सभी के लिए अहम बनी हुई है।