सोमालिया के पुंटलैंड इलाके में समुद्री लुटेरों ने एक कार्गो जहाज़ को अपने कब्जे में ले लिया है। कैमरून के झंडे के साथ चल रहे इस जहाज़ पर तुर्की के लिए भेजे जा रहे हथियारों के अलावा संचार और सैटेलाइट से जुड़े उपकरण भी मौजूद थे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहाज़ पर मौजूद 10 सदस्यीय क्रू में कम से कम छह भारतीय नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। जहाज़ के अपहरण के बाद इसे सोमालिया के नुगाल तट की तरफ ले जाया गया।
घटना ने सोमालिया के समुद्री क्षेत्र में सक्रिय समुद्री डकैती को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, जहाज़ को पुंटलैंड के इयल जिले के समुद्री इलाके में कब्जे में लिया गया। इसके बाद हथियारबंद लोगों ने जहाज़ की दिशा बदलकर उसे तट की ओर ले जाना शुरू कर दिया। फिलहाल जहाज़, उसके क्रू और उसमें मौजूद सामान की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
समुद्र में चल रहे जहाज़ को बनाया निशाना
जानकारी के मुताबिक, अगवा किया गया जहाज़ M/V LUTUF नाम का कार्गो पोत है। इसे सोमवार को पुंटलैंड के इयल जिले में मर्राया से करीब साढ़े तीन नॉटिकल मील की दूरी पर कब्जे में लिया गया। घटना की जानकारी एक सोमाली अधिकारी ने दी। हालांकि, अधिकारी को इस संवेदनशील मामले पर सार्वजनिक रूप से बात करने की अनुमति नहीं थी।
बताया गया है कि जहाज़ पर कुल 10 लोग सवार थे। इनमें कम से कम छह भारतीय क्रू सदस्य होने की जानकारी सामने आई है। जहाज़ को कब्जे में लेने वाले लोगों ने उसे नुगाल तट की तरफ मोड़ दिया। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और अन्य पक्षों की गतिविधियां भी इलाके में बढ़ गईं।
इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जहाज़ में मौजूद कार्गो है। अधिकारी के मुताबिक, पोत में तुर्की के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार भेजे जा रहे थे। इसके साथ ही जहाज़ में कम्युनिकेशन सिस्टम और सैटेलाइट उपकरण भी लदे हुए थे। इस वजह से सामान्य कारोबारी जहाज़ की तुलना में इस पोत की संवेदनशीलता काफी अधिक मानी जा रही है।
पहले भी जहाज़ हाईजैक करने वाले समूह से कनेक्शन
सोमाली अधिकारी के मुताबिक, इस अपहरण में शामिल समुद्री लुटेरों का संबंध उस समूह से हो सकता है जिसने इससे पहले 26 अप्रैल को M/V Sward नाम के एक अन्य व्यापारी जहाज़ को अगवा किया था। मौजूदा मामले में करीब आठ समुद्री लुटेरों के शामिल होने की बात कही जा रही है।
अधिकारियों का अनुमान है कि यही समूह या उससे जुड़े लोग LUTUF को कब्जे में लेने के पीछे हो सकते हैं। हाईजैकिंग के बाद जहाज़ को पुंटलैंड के डंगोरोयो जिले में गरमाल के नजदीक तट की दिशा में ले जाया गया। समुद्री लुटेरों के इस कदम से यह आशंका पैदा हुई कि वे जहाज़ और उसके क्रू को लंबे समय तक अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश कर सकते हैं।
सोमालिया के समुद्री क्षेत्र में पहले भी समुद्री डकैती की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में जहाज़ों को कब्जे में लेने के बाद उन्हें तट के नजदीक ले जाना लुटेरों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। तट के पास पहुंचने के बाद वे समुद्री निगरानी से बचने या जहाज़ को अपने नियंत्रण में बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं।
तुर्की से जुड़े जहाज़ भी इलाके में पहुंचे
घटना के बाद स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब तुर्की के मालिकाना हक वाले दो जहाज़ हाईजैक किए गए पोत के पास पहुंचे। बताया गया है कि इस दौरान तुर्की के हेलिकॉप्टर और ड्रोन भी इलाके की निगरानी कर रहे थे।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन निगरानी गतिविधियों का संचालन किस उद्देश्य से और किस स्तर पर किया गया। जहाज़ पर मौजूद हथियारों और सैन्य उपकरणों की वजह से मामले को सामान्य समुद्री डकैती की घटना से अधिक गंभीरता से देखा जा रहा है।
समुद्री निगरानी के दौरान इलाके में मौजूद अलग-अलग पक्षों की गतिविधियों पर भी नजर रखी गई। लेकिन अभी तक ऐसी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है जिससे यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि जहाज़ को किस तरह वापस नियंत्रण में लेने की कोशिश की गई या क्रू सदस्यों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए।
जहाज़ के पास पहुंची छोटी नाव, फिर हुआ हमला
मामले में मंगलवार को एक और घटनाक्रम सामने आया। जानकारी के अनुसार, दो लोगों को लेकर एक छोटी नाव हाईजैक किए गए जहाज़ के पास पहुंची थी। इस नाव के जरिए ‘खत’ जहाज़ तक पहुंचाया गया। खत सोमालिया में आम तौर पर चबाया जाने वाला एक नशीला पदार्थ है।
अधिकारी के अनुसार, छोटी नाव के वापस लौटने के बाद इलाके में हवाई हमला किया गया। इस हमले में चार लोगों के मारे जाने और दो अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, हमले के संबंध में कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।
यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि हवाई हमला किस पक्ष ने किया था। इसी तरह, मारे गए चार लोग समुद्री डकैती में शामिल थे या किसी अन्य गतिविधि का हिस्सा थे, इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। घायलों की पहचान और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
क्रू और कार्गो को लेकर स्थिति साफ नहीं
हाईजैकिंग के बाद सबसे बड़ी चिंता जहाज़ पर मौजूद क्रू सदस्यों को लेकर है। इनमें कम से कम छह भारतीय नागरिकों के होने की जानकारी है। लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में अभी कोई विस्तृत और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सामने नहीं आई है।
इसी तरह, जहाज़ पर लदे हथियार, कम्युनिकेशन सिस्टम और सैटेलाइट उपकरणों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। यह पता नहीं चल पाया है कि हाईजैकिंग के दौरान कार्गो को किसी तरह नुकसान पहुंचा या समुद्री लुटेरों ने उस पर नियंत्रण स्थापित किया।
जहाज़ की मौजूदा लोकेशन को लेकर भी पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है। शुरुआती जानकारी में इसे नुगाल तट की तरफ ले जाने की बात कही गई थी। इसके बाद इलाके में तुर्की से जुड़े जहाज़ों, हेलिकॉप्टरों और ड्रोन की मौजूदगी की जानकारी सामने आई। ऐसे में पूरे घटनाक्रम पर कई स्तरों पर निगरानी की जा रही है।
भारतीय क्रू की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
जहाज़ पर छह भारतीय नागरिकों की मौजूदगी इस मामले को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है। समुद्री जहाज़ों पर काम करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या काफी बड़ी है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर होने वाली घटनाओं में भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा एक अहम मुद्दा रहती है।
इस मामले में भी सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि जहाज़ पर मौजूद सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं या नहीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभी तक भारतीय नागरिकों की व्यक्तिगत पहचान या उनकी स्थिति के बारे में कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
हाईजैकिंग के पीछे समुद्री लुटेरों का मकसद भी फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। क्या उनका उद्देश्य फिरौती हासिल करना था, जहाज़ को कब्जे में रखना था या उसमें मौजूद संवेदनशील सामान तक पहुंचना था, इस बारे में कोई पुख्ता निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
स्वतंत्र पुष्टि का अभाव
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मुख्य रूप से सोमाली अधिकारी के हवाले से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अधिकारी को मामले की संवेदनशीलता के कारण सार्वजनिक रूप से पहचान के साथ बयान देने की अनुमति नहीं थी। इसलिए सामने आई जानकारियों को लेकर अभी और पुष्टि की जरूरत है।
द एसोसिएटेड प्रेस ने भी कहा है कि वह घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। खास तौर पर हवाई हमले, उसमें मारे गए लोगों और जहाज़ पर मौजूद क्रू तथा कार्गो की मौजूदा स्थिति को लेकर तस्वीर अभी अधूरी है।
ऐसे में फिलहाल यह निश्चित तौर पर कहना मुश्किल है कि हाईजैकिंग के बाद घटनाक्रम किस दिशा में बढ़ा है। जहाज़ पर मौजूद भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा, हथियारों से जुड़े कार्गो की स्थिति और समुद्री लुटेरों की गतिविधियों पर आगे आने वाली जानकारी से ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल M/V LUTUF का हाईजैक होना सोमालिया के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हथियारों से भरे जहाज़ को निशाना बनाया जाना, उसमें भारतीय क्रू की मौजूदगी और इसके बाद हुए हवाई हमले ने घटना को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले समय में जहाज़ और उसके क्रू की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण होगी।