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इंस्टाग्राम पर एक्टिव हुए मोदी सरकार के मंत्री, 29 में से 28 की बढ़ी मौजूदगी; अमित शाह के फॉलोअर्स में सबसे बड़ा इजाफा

केंद्र सरकार ने युवाओं, खासकर जेन-Z तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया को अहम माध्यम बनाना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मंत्रियों को इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहने की सलाह दिए जाने के करीब एक महीने बाद इसका असर उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों में दिखाई देने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मोदी कैबिनेट के लगभग सभी मंत्री अब पहले के मुकाबले इंस्टाग्राम पर ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं।

24 जुलाई 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों से सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने को कहा था। उन्होंने खास तौर पर इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने, युवाओं से संवाद कायम करने और सरकार की नीतियों तथा कामकाज को आसान भाषा और नए डिजिटल फॉर्मेट में लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया था। इसके बाद 24 अगस्त तक 29 कैबिनेट मंत्रियों में से 28 की इंस्टाग्राम गतिविधि में बढ़ोतरी दर्ज की गई। यानी करीब 97 प्रतिशत मंत्री इस अवधि में पहले की तुलना में ज्यादा सक्रिय रहे।

इन आंकड़ों में एकमात्र अपवाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह बताए गए हैं। बाकी मंत्रियों ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट, वीडियो और अन्य तरह की गतिविधियां बढ़ाईं। इससे संकेत मिलता है कि सरकार सोशल मीडिया को केवल प्रचार के माध्यम के तौर पर नहीं, बल्कि जनता और विशेष रूप से युवा वर्ग से सीधे संपर्क स्थापित करने के प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

अमित शाह के फॉलोअर्स में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

मंत्रियों की सोशल मीडिया लोकप्रियता की बात करें तो गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में सबसे आगे रहे। पिछले एक महीने में उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या में करीब 8.53 लाख की वृद्धि हुई। यह कैबिनेट के मंत्रियों के बीच सबसे बड़ा इजाफा बताया गया है।

फॉलोअर्स की संख्या में यह तेजी इस बात की ओर भी इशारा करती है कि बड़े राजनीतिक नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट अब केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। मंत्री अपने कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं, नीतिगत फैसलों और सार्वजनिक गतिविधियों को वीडियो तथा दूसरे विजुअल फॉर्मेट के जरिए लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की सलाह के बाद मंत्रियों की गतिविधियों में सिर्फ पोस्ट की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि सोशल मीडिया कंटेंट के तरीके में भी बदलाव दिखाई दिया। लंबे लिखित संदेशों के बजाय छोटी वीडियो क्लिप और रील्स को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। इसका एक कारण यह भी है कि युवा वर्ग सोशल मीडिया पर कम समय में ज्यादा जानकारी देने वाले वीडियो फॉर्मेट को तेजी से अपनाता है।

एक महीने में 1,179 पोस्ट, गतिविधि में 48% उछाल

मंत्रियों के इंस्टाग्राम इस्तेमाल से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने के दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने कुल 1,179 पोस्ट किए। यह संख्या इससे पहले की अवधि के मुकाबले लगभग 48 प्रतिशत अधिक है।

यानी प्रधानमंत्री की सलाह के बाद मंत्रियों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय किया। इसमें तस्वीरों के साथ-साथ वीडियो और रील्स का इस्तेमाल भी बढ़ा। सरकार की कोशिश अब ऐसी भाषा और प्रस्तुति अपनाने की दिखाई देती है जिसे युवा सोशल मीडिया यूजर आसानी से समझ सके और ज्यादा देर तक देखे।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी नीतिगत मुद्दों और सरकार के कामकाज को रील्स के माध्यम से समझाने की दिशा में जोर दिया है। जटिल सरकारी फैसलों को छोटे वीडियो में सरल तरीके से प्रस्तुत करना सोशल मीडिया रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है।

इस बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह इंस्टाग्राम का बढ़ता प्रभाव भी है। पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या लंबे भाषणों के मुकाबले रील्स कुछ ही सेकंड में किसी मुद्दे का मुख्य संदेश लोगों तक पहुंचा सकती हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार के कई मंत्री अब अपने काम और नीतियों को डिजिटल वीडियो के जरिए प्रस्तुत कर रहे हैं।

पीएम मोदी पहले से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संवाद करते रहे हैं

प्रधानमंत्री मोदी खुद लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते रहे हैं। युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर भी वह वीडियो के माध्यम से अपनी बात रख चुके हैं। इसी रणनीति का एक उदाहरण NEET पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान देखने को मिला था।

जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो जारी किए थे। इन संदेशों के जरिए उन्होंने जेन-Z और छात्रों को सीधे संबोधित करने की कोशिश की। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने उन छात्रों को माफ करने की बात भी कही थी, जिन्होंने विरोध के दौरान उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया था।

इस तरह सोशल मीडिया सरकार और युवा वर्ग के बीच संवाद का एक सीधा माध्यम बनता जा रहा है। अब मंत्रियों को भी इसी दिशा में अधिक सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है ताकि केंद्र सरकार के संदेश केवल पारंपरिक माध्यमों से नहीं, बल्कि उन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी पहुंचें जहां बड़ी संख्या में युवा मौजूद हैं।

अब विश्वविद्यालयों तक पहुंचने की भी तैयारी

सरकार की डिजिटल रणनीति केवल इंस्टाग्राम तक सीमित नहीं रहने वाली है। युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री को किसी विश्वविद्यालय का दौरा करने और वहां छात्रों से बातचीत करने की योजना है।

19 अगस्त को हुई मोदी कैबिनेट की बैठक में युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने से जुड़े इस कार्यक्रम पर चर्चा हुई। प्रस्ताव के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री निर्धारित विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से विभिन्न विषयों पर बातचीत करेंगे। इस दौरान छात्रों की समस्याएं, उनके विचार और देश से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी राय जानने की कोशिश की जाएगी।

कार्यक्रम का एक अहम उद्देश्य युवाओं को सरकार की योजनाओं और नीतियों के बारे में जानकारी देना भी है। खासकर छात्रों और युवा वर्ग के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं को सीधे उनके बीच जाकर समझाने की तैयारी है।

जेन-Z से सीधे कनेक्शन की रणनीति

सरकार के इस अभियान के पीछे सबसे बड़ा लक्ष्य जेन-Z के साथ सीधा संपर्क स्थापित करना माना जा रहा है। यह वह पीढ़ी है जो जानकारी हासिल करने के लिए तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और वीडियो कंटेंट पर निर्भर हो रही है।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की योजना के जरिए जेन-Z तक सीधे पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है। विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से बातचीत करने से मंत्रियों को युवा वर्ग की चिंताओं और प्राथमिकताओं को समझने का मौका मिलेगा। वहीं दूसरी तरफ छात्रों को सरकार की नीतियों और योजनाओं की जानकारी सीधे मंत्रियों से मिल सकेगी।

इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को दी गई है। दोनों मंत्री विश्वविद्यालयों और वहां जाने वाले केंद्रीय मंत्रियों के बीच समन्वय का काम देखेंगे।

हालांकि, अभी इस कार्यक्रम के तहत किन-किन विश्वविद्यालयों में कौन मंत्री जाएगा और इसकी पूरी समय-सारिणी क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। आने वाले समय में इसका पूरा कार्यक्रम सामने आने की उम्मीद है।

सोशल मीडिया की पहुंच पर भी नजर

कैबिनेट बैठक में मंत्रियों की सोशल मीडिया पोस्ट की पहुंच को लेकर भी चर्चा हुई। केवल पोस्ट की संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि सरकार के संदेश कितने लोगों तक पहुंच रहे हैं और उनमें युवा दर्शकों की हिस्सेदारी कितनी है।

इसलिए मंत्रियों को सोशल मीडिया पर अधिक प्रभावी तरीके से काम करने की सलाह दी जा रही है। रील्स, छोटे वीडियो और सरल भाषा वाले कंटेंट को बढ़ावा देने का मकसद यही है कि सरकारी योजनाओं और नीतिगत फैसलों को युवा वर्ग तक उनकी पसंद के डिजिटल फॉर्मेट में पहुंचाया जा सके।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की 24 जुलाई की सलाह के बाद एक महीने के भीतर कैबिनेट मंत्रियों की इंस्टाग्राम गतिविधि में आया बदलाव केंद्र सरकार की बदलती डिजिटल संचार रणनीति को दिखाता है। 29 में से 28 मंत्रियों की सक्रियता बढ़ना, कुल पोस्ट में 48 प्रतिशत की वृद्धि और अमित शाह के फॉलोअर्स में 8.53 लाख का इजाफा इस बदलाव के प्रमुख संकेत हैं।

अब सरकार सोशल मीडिया की सक्रियता को विश्वविद्यालयों में सीधे संवाद के साथ जोड़ने की तैयारी में है। ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ पहल के जरिए मंत्री छात्रों के बीच पहुंचेंगे, उनकी राय सुनेंगे और सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के मंत्रियों की भूमिका केवल नीतियां बनाने तक सीमित रहने के बजाय उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म और शैक्षणिक संस्थानों के जरिए युवा वर्ग तक पहुंचाने पर भी अधिक केंद्रित दिखाई दे सकती है।