रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और जीवनभर एक-दूसरे की रक्षा करने के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। आज श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के साथ रक्षाबंधन का पावन त्योहार मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी या रक्षासूत्र बांधकर उनके सुखी, स्वस्थ और सफल जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में उनका साथ देने का वचन देते हैं।
इस साल रक्षाबंधन को लेकर सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि राखी बांधने के समय भद्रा का कोई बड़ा व्यवधान नहीं है। यही वजह है कि बहनों के पास दिन के अलग-अलग समय में अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने का अवसर है। सुबह का एक शुभ समय बीतने के बाद अब दोपहर से शाम तक भी राखी बांधने के लिए अच्छा समय उपलब्ध है। हालांकि राहुकाल के समय को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन पूजा-पाठ, पूर्णिमा व्रत, भगवान शिव-पार्वती की आराधना और भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। आइए जानते हैं कि दोपहर बाद राखी बांधने का शुभ समय क्या है, पूजा की थाली में कौन-कौन सी चीजें रखनी चाहिए और इस दिन किन धार्मिक नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।
दोपहर बाद कब बांध सकते हैं राखी?
जो बहनें सुबह के समय किसी कारणवश अपने भाइयों को राखी नहीं बांध पाईं, उनके लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन पर दोपहर के बाद भी राखी बांधने का शुभ समय उपलब्ध है। आज दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शाम 7 बजे तक भाई की कलाई पर राखी बांधी जा सकती है।
इस अवधि में बहनें पूजा की थाली सजाकर विधि-विधान से अपने भाई का तिलक कर सकती हैं। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारने और मिठाई खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार दे सकता है और उसकी रक्षा का संकल्प लेता है।
राहुकाल के समय राखी बांधने से करें परहेज
रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त के साथ राहुकाल का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल को किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए यदि आप दोपहर के समय राखी बांधने की योजना बना रहे हैं तो राहुकाल की अवधि का ध्यान रखना जरूरी है।
आज राहुकाल दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। मान्यता है कि इस समय में शुभ कार्यों से बचना चाहिए। इसलिए बहनों को चाहिए कि राहुकाल समाप्त होने के बाद ही पूजा-अर्चना और राखी बांधने की प्रक्रिया शुरू करें। इसके बाद शाम तक का समय रक्षाबंधन की रस्म निभाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग या अपने क्षेत्र की मान्यताओं के अनुसार भी समय का ध्यान रखा जा सकता है।
सुबह भी था राखी बांधने का शुभ समय
रक्षाबंधन के दिन सुबह के समय भी राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त था। पंचांग के अनुसार सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का विशेष शुभ समय माना गया। जिन परिवारों में सुबह पूजा और रक्षाबंधन की परंपरा निभाई गई, वहां इस समय में भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा गया।
लेकिन अगर सुबह राखी नहीं बांधी जा सकी तो दोपहर और शाम के समय भी यह पर्व मनाया जा सकता है। इस साल भद्रा का साया न होने के कारण लोगों को राखी बांधने के लिए लंबा समय मिल रहा है। यही कारण है कि परिवार अपनी सुविधा और शुभ समय को ध्यान में रखकर रक्षाबंधन की रस्म पूरी कर सकते हैं।
राखी की पूजा थाली में रखें ये जरूरी चीजें
रक्षाबंधन की पूजा थाली का विशेष महत्व होता है। बहनें राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार करती हैं और उसमें आवश्यक पूजन सामग्री रखती हैं। थाली में सबसे पहले राखी या रक्षासूत्र रखा जाता है। इसके अलावा रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक और आरती की सामग्री भी रखी जाती है।
थाली में भाई को खिलाने के लिए मिठाई रखना भी शुभ माना जाता है। कई लोग फल और फूल भी पूजा की थाली में शामिल करते हैं। थाली को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए रंग-बिरंगे फूल, पत्तियां या छोटी सी रंगोली का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पूजा थाली में सामान्य रूप से ये चीजें रखी जा सकती हैं—
- राखी या रक्षासूत्र
- रोली या कुमकुम
- अक्षत यानी साबुत चावल
- घी या तेल का दीपक
- आरती की सामग्री
- मिठाई
- फल और फूल
- पूजा के लिए जल का पात्र
थाली तैयार होने के बाद सबसे पहले भगवान का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद भाई को उचित स्थान पर बैठाकर तिलक, अक्षत और राखी बांधने की परंपरा निभाई जाती है।
सबसे पहले इष्टदेव को अर्पित करें राखी
धार्मिक परंपराओं में रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले अपने इष्टदेव को राखी अर्पित करने का विधान बताया गया है। इसके बाद घर के अन्य सदस्यों को राखी बांधी जाती है। कई परिवारों में भगवान कृष्ण, गणेश, शिवजी या अन्य आराध्य देवी-देवताओं को भी रक्षासूत्र बांधा जाता है।
मान्यता है कि भगवान का आशीर्वाद लेकर शुरू किया गया कार्य शुभ फल प्रदान करता है। इसलिए बहनें पूजा की थाली तैयार करने के बाद सबसे पहले अपने आराध्य देव की पूजा कर सकती हैं। इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु की कामना की जाती है।
राखी बांधते समय किन नियमों का रखें ध्यान?
रक्षाबंधन की रस्म को लेकर कई पारंपरिक नियम बताए गए हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन परंपराओं में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के लिए दाएं हाथ में रक्षासूत्र बांधने की परंपरा बताई जाती है। वहीं विवाहित महिलाओं के लिए बाएं हाथ में राखी बांधने की मान्यता है।
राखी बंधवाने वाले व्यक्ति को अपना हाथ और मन स्थिर रखना चाहिए। परंपरा के अनुसार राखी बंधवाते समय हाथ की मुट्ठी बंद रखी जाती है और दूसरा हाथ सिर पर रखा जाता है। इसे सम्मान और शुभ संकल्प से जोड़कर देखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में काले रंग की राखी बांधने से बचने की बात भी कही गई है। रक्षाबंधन को शुभ और मंगलकारी पर्व माना जाता है, इसलिए सामान्य रूप से रंग-बिरंगी और पारंपरिक राखियों का उपयोग किया जाता है।
आज शिव-पार्वती की पूजा का भी है विशेष महत्व
रक्षाबंधन के साथ आज श्रावण पूर्णिमा भी है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और पूर्णिमा तिथि पर शिव परिवार की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा की जा सकती है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। कई लोग इस अवसर पर रुद्राभिषेक भी कराते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाने को भी विशेष महत्व दिया जाता है और इसे चंद्र दोष से मुक्ति से जोड़कर देखा जाता है।
सावन पूर्णिमा के दिन परिवार के साथ शिव-पार्वती की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।
सावन पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा का महत्व
पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन यदि संभव हो तो भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा का आयोजन भी किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा सुनने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है। जिन लोगों के जीवन में आर्थिक परेशानियां चल रही हों या व्यापार और कामकाज में लगातार बाधाएं आ रही हों, वे श्रद्धा के साथ सत्यनारायण भगवान की पूजा कर सकते हैं।
मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना से सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। हालांकि पूजा का मूल उद्देश्य केवल भौतिक लाभ नहीं, बल्कि परिवार में शांति, सद्भाव और धार्मिक आस्था को मजबूत करना भी माना जाता है।
रक्षाबंधन की रस्म ऐसे करें पूरी
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में पूजा करें और अपने इष्टदेव का आशीर्वाद लें। पूजा की थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रख लें।
भाई को उचित स्थान पर बैठाएं और उसके माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर उसकी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधते समय भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करें।
इसके बाद भाई की आरती उतारें और उसे मिठाई खिलाएं। भाई अपनी बहन को उपहार दे सकता है और उसकी रक्षा, सम्मान तथा हर परिस्थिति में साथ देने का वचन ले सकता है। यही संकल्प रक्षाबंधन के पर्व को केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते का भावनात्मक उत्सव बनाता है।
भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास का पर्व है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन केवल धागा बांधने की परंपरा नहीं है। यह भाई और बहन के बीच प्रेम, भरोसे और जिम्मेदारी का प्रतीक है। समय के साथ इस पर्व को मनाने के तरीके भले ही बदल गए हों, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना आज भी वही है।
बहन भाई की कलाई पर रक्षा का धागा बांधकर उसके सुखी जीवन की प्रार्थना करती है, जबकि भाई बहन की रक्षा और सम्मान का वचन देता है। आज के समय में यह पर्व केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक-दूसरे का साथ देने और हर मुश्किल में खड़े रहने का संदेश भी देता है।
इस रक्षाबंधन पर यदि सुबह राखी बांधने का समय निकल गया है तो दोपहर और शाम में उपलब्ध शुभ समय का ध्यान रखकर विधि-विधान से यह पर्व मनाया जा सकता है। पूजा की थाली सजाएं, भगवान का स्मरण करें और भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को प्रेम और विश्वास के साथ और मजबूत बनाएं।