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The Scoopp

 

यूपी में बाढ़ का कहर: चित्रकूट में मंदाकिनी ने पार किया खतरे का निशान, 475 घर क्षतिग्रस्त; कई जिलों में नदियां उफान पर

उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है। प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने हालात सबसे ज्यादा बिगाड़ दिए हैं। यहां मंगलवार को नदी का पानी तेजी से बढ़ा और शहर के कई निचले इलाकों, घाटों, सड़कों और बस्तियों में घुस गया। बाढ़ के कारण करीब 475 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, जबकि 50 से ज्यादा घर पूरी तरह या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होकर गिर गए हैं।

चित्रकूट में 29 अगस्त को आई बाढ़ से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि लगातार बारिश ने मंगलवार को दोबारा मुश्किलें बढ़ा दीं। मंदाकिनी के साथ क्षेत्र की दूसरी नदियों का जलस्तर बढ़ने और आसपास के जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण धर्मनगरी के बड़े हिस्से में जलभराव हो गया। बरुआ, ओहन, गुंता और रसिन बांधों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने के बाद इनके गेट खोलने पड़े। इसका सीधा असर आसपास के निचले इलाकों और गांवों पर पड़ा।

कुछ ही घंटों में तीन मीटर से ज्यादा बढ़ा मंदाकिनी का पानी

मंदाकिनी नदी के जलस्तर में मंगलवार तड़के से ही तेजी देखी गई। सुबह करीब चार बजे से नदी का पानी लगातार चढ़ता रहा। महज साढ़े तीन घंटे के भीतर जलस्तर में 3.10 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई। दोपहर 12 बजे तक नदी 131.050 मीटर के स्तर पर पहुंच गई। यह खतरे के निशान 126.500 मीटर से 4.550 मीटर अधिक था।

पानी बढ़ने के साथ रामघाट का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया। यहां स्थित दुकानों के अलावा टेंपो स्टैंड, पुरानी लंका, कामदगिरि जाने वाला मार्ग और नदी के आसपास बसी आबादी में भी पानी पहुंच गया। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने के लिए अभियान चलाना पड़ा। रामघाट और तरौंहा क्षेत्र से 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर भी बनाए हैं। रैन बसेरा और टाउन हाल में बनाए गए शिविरों में फिलहाल 63 लोग रह रहे हैं। रामघाट और निर्मोही अखाड़ा इलाके में हालात पर नजर रखने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पानी की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को दूसरे इलाकों से भी बाहर निकाला जाएगा।

24 गांवों के निचले हिस्सों में भरा पानी

चित्रकूट के आसपास स्थित चार बांध लगातार बारिश के चलते अपनी क्षमता के करीब पहुंच गए थे। जलस्तर नियंत्रित करने के लिए बांधों के गेट खोलकर पानी बाहर निकाला गया। इसके बाद करीब 24 गांवों के निचले हिस्सों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। कई जगह खेत और संपर्क मार्ग भी पानी में डूब गए।

बाढ़ के कारण कई रपटों पर आवागमन बंद हो गया है। मानिकपुर-सतना मार्ग पर स्थित कारी बराह रपटा एक बार फिर पानी के तेज बहाव में बह गया। इससे इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है। ग्रामीण इलाकों में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के मुताबिक राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की कुल 10 टीमें तैनात की गई हैं। जिला प्रशासन का कंट्रोल रूम सक्रिय है और प्रभावित क्षेत्रों से आने वाली सूचनाओं के आधार पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

बाढ़ के बीच एक हादसे ने चिंता और बढ़ा दी है। बूढ़ा सेमरवार गांव में 14 वर्षीय मीनू यादव नाले के पास हाथ-पैर धो रही थी। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह तेज बहाव में बह गई। उसके बाद से उसकी तलाश की जा रही है। बचाव दल आसपास के हिस्सों में खोज अभियान चला रहे हैं।

प्रयागराज में गंगा-यमुना का पानी घटा, लेकिन संकट बरकरार

चित्रकूट के अलावा प्रयागराज और पूर्वांचल के कई जिलों में भी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्रयागराज में मंगलवार को गंगा के जलस्तर में चार सेंटीमीटर और यमुना में 11 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। हालांकि पानी घटने के बावजूद शहर और आसपास के गांवों के कई हिस्से अब भी जलमग्न हैं। प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही के लिए 11 स्थानों पर नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है। मंगलवार को नदी 70.29 मीटर के स्तर पर थी और करीब-करीब स्थिर बनी हुई थी। घाटों से आगे बढ़ चुका पानी अब कई गलियों और सड़कों तक पहुंच गया है। वरुणा नदी में पलट प्रवाह के कारण आसपास के कई घरों में पानी घुस गया। कई गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में नावों का संचालन रोक दिया गया है। जल पुलिस के साथ प्रशासन ड्रोन के माध्यम से भी स्थिति पर नजर रख रहा है।

बलिया और गाजीपुर में भी खतरे के ऊपर बह रही गंगा

पूर्वांचल में गंगा का जलस्तर कई जगह खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। बलिया में नदी 58.80 मीटर के स्तर पर बह रही है, जो खतरे के निशान से 1.185 मीटर अधिक है। वहीं गाजीपुर में गंगा 63.260 मीटर पर दर्ज की गई, जो खतरे के निशान से 15 सेंटीमीटर ऊपर है।

मीरजापुर में बाढ़ का पानी 13 गांवों तक पहुंच गया है। चंदौली में भी बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। आजमगढ़ में पिछले 24 घंटे के दौरान गंगा के पानी में 11 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर नीचे आया और यह 136.65 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि रामगंगा नदी में इसके विपरीत 10 सेंटीमीटर का इजाफा दर्ज किया गया है। ऐसे में प्रशासन और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता अभी कम नहीं हुई है।

फसलों पर भी पड़ा बाढ़ का असर

नदियों के बढ़े जलस्तर ने केवल आबादी को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि बड़ी मात्रा में कृषि भूमि भी पानी में डूब गई है। उन्नाव में हजारों बीघा फसल जलमग्न होने से किसानों को नुकसान की आशंका है। लगातार बारिश और बाढ़ के पानी के कारण खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं।

कानपुर देहात में बाढ़ और बारिश के बीच एक कच्चा मकान ढह गया। इस हादसे में सात महीने की बच्ची की मौत हो गई। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।

सोनभद्र में रिहंद बांध का जलस्तर अधिकतम सीमा से ऊपर पहुंच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बांध के फाटक खोले गए और करीब 10,400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में नदी और जलधाराओं के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।

गाजीपुर में दो बहनों के डूबने की घटना सामने आई है। वहीं मीरजापुर में भी दो लोगों के लापता होने की सूचना से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। राहत और बचाव दल संभावित प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रहे हैं।

अवध में घाघरा-सरयू भी खतरे के निशान से ऊपर

अवध क्षेत्र में भी बारिश ने बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। बहराइच में घाघरा नदी खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर 106.08 मीटर पर बह रही है। यहां छह गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। बाराबंकी में भी घाघरा खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है।

गोंडा के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की आवाजाही और राहत कार्य के लिए 62 नावें लगाई गई हैं। लखीमपुर खीरी के तिकुनिया इलाके में मोहाना नदी के कटान ने एक घर को अपने साथ बहा दिया। सीतापुर में घाघरा और शारदा नदियां खतरे के करीब पहुंच चुकी हैं।

अयोध्या और अंबेडकरनगर में सरयू का पानी लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी के आसपास रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के मुताबिक राहत इंतजाम किए जा रहे हैं।

अमेठी में कच्ची दीवार गिरने से सात वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। हरदोई में भी दीवार गिरने की घटना में एक बुजुर्ग की जान चली गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं।

कई जिलों में स्थिति पर प्रशासन की नजर

प्रदेश के कुछ इलाकों में नदियों का पानी घटने के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन कई स्थानों पर लगातार बारिश, बांधों से पानी छोड़े जाने और निचले इलाकों में जलभराव के कारण खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। प्रशासन ने लोगों से नदी और नालों के किनारे जाने से बचने तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचने के बाद राहत और बचाव दलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है। ड्रोन निगरानी, नावों और सुरक्षा बलों की तैनाती के जरिए प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में बारिश की स्थिति और बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर बाढ़ की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।