दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने राजधानी में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित छात्र बहुल इलाके में दोपहर करीब 1:30 बजे पांच मंजिला पुरानी इमारत अचानक भरभराकर नीचे आ गई। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक 6 शव बाहर निकाले जा चुके हैं, जबकि 12 लोगों को सुरक्षित मलबे से निकाल लिया गया। घायलों में 5 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें एम्स में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य लगातार चलता रहा। मलबे के बड़े हिस्से को हटाने में रेस्क्यू टीमों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आशंका है कि बेसमेंट के अंदर अभी भी कुछ मजदूर या छात्र फंसे हो सकते हैं। बचाव दल कैमरे की मदद से मलबे के भीतर स्थिति का जायजा लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुबह करीब 5:30 बजे तक टीमों को बेसमेंट तक पहुंचने में सफलता नहीं मिल सकी थी।
सात दिन से बेसमेंट में चल रहा था काम
स्थानीय लोगों और PG में रहने वाले छात्रों के मुताबिक हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में करीब एक सप्ताह से तोड़फोड़ और खुदाई का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि बेसमेंट पहले से ही कमजोर स्थिति में था और वहां पानी भी जमा था। रविवार को खुदाई के दौरान अचानक एक पिलर अपनी जगह से खिसक गया। इसके बाद देखते ही देखते पूरी पांच मंजिला इमारत का ढांचा ढह गया।
इमारत के अचानक गिरने से वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। निर्माण कार्य में लगे कुछ मजदूर भी मलबे की चपेट में आ गए। आसपास रहने वाले लोगों ने तेज आवाज सुनने के बाद मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस, दमकल विभाग और अन्य बचाव एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस हिस्से में काम चल रहा था, वहां पहले से ही पानी भरा हुआ था। ऐसे में कमजोर बेसमेंट में खुदाई किए जाने को हादसे की अहम वजह माना जा रहा है। हालांकि, हादसे की वास्तविक तकनीकी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
40 साल पुरानी थी इमारत
हादसे का शिकार बनी इमारत नई नहीं थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका निर्माण करीब 40 साल पहले, वर्ष 1990 में हुआ था। हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि MCD के रिकॉर्ड में इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था।
अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर इमारत को आधिकारिक तौर पर खतरनाक नहीं माना गया था तो उसके बेसमेंट में किस तरह का निर्माण या तोड़फोड़ कार्य किया जा रहा था और क्या उस काम के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे।
इमारत के स्वामित्व को लेकर भी जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि मुख्य मालिक हरि राम बंसल हैं और उनके भाई आनंद बंसल भी संपत्ति से जुड़े हैं। आनंद बंसल गुरुग्राम में रहते हैं। परिवार के बारे में मिली जानकारी के अनुसार हरि बंसल के दो बेटे हैं। इनमें से एक पायलट है, जबकि दूसरा गुरुग्राम के सेक्टर-23 में पेंट की दुकान चलाता है।
पड़ोसी इमारत में भी आई दरारें
मुख्य इमारत के गिरने के बाद खतरा सिर्फ घटनास्थल तक सीमित नहीं रहा। पास की एक अन्य बिल्डिंग में भी दरारें दिखाई देने के बाद उसे खाली करा लिया गया। रेस्क्यू टीमों को आशंका है कि मलबा हटाने के दौरान आसपास की कमजोर संरचनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसी वजह से बचाव कार्य को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। जिस पड़ोसी इमारत में दरारें मिली हैं, उसे सपोर्ट देने के लिए अतिरिक्त पिलर लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों और रेस्क्यू कर्मियों की प्राथमिकता यह है कि मलबा हटाते समय दूसरी इमारत को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
सत्य निकेतन में हादसे के बाद निकले मलबे को पास की कम्युनिटी बिल्डिंग के कैंपस में डंप किया जा रहा है। घटनास्थल पर पहुंचे घायलों के दोस्त और परिजन मलबे में पड़े सामान को देखकर उनकी पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। वहां कपड़े, बैग, बर्तन और अन्य घरेलू सामान बिखरा हुआ है। कुछ सामान पर खून के निशान भी देखे गए हैं, जिससे हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बेसमेंट तक पहुंचना बनी सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे कठिन काम बेसमेंट तक पहुंचना बताया जा रहा है। बचाव दल मलबे के भीतर कैमरा डालकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि नीचे कोई व्यक्ति फंसा है या नहीं। लेकिन ढही हुई संरचना और मलबे की भारी मात्रा के कारण अंदर जाना बेहद जोखिम भरा है।
रेस्क्यू टीमों के अनुसार अब तक छह शव बरामद किए जा चुके हैं। 12 लोगों को मलबे से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। पांच घायलों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है। बचाव दल इस संभावना को ध्यान में रखकर काम कर रहा है कि मलबे के अंदर अभी और लोग हो सकते हैं।
मौके पर मौजूद रिपोर्ट के मुताबिक बेसमेंट में मजदूरों और छात्रों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, लंबे समय तक मलबे में दबे लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद बेहद कम बताई जा रही है।
पुलिस ने दर्ज की FIR
हादसे के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। इमारत के मालिक आनंद बंसल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बेसमेंट में चल रहे निर्माण या तोड़फोड़ के लिए किस तरह की अनुमति थी और काम के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
इस हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। सवाल यह है कि अगर इमारत MCD रिकॉर्ड में खतरनाक नहीं थी तो बेसमेंट में चल रहे काम की निगरानी किस स्तर पर हुई और निर्माण गतिविधियों के दौरान संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन किया गया था या नहीं।
मेयर ने अवैध निर्माण पर सख्ती की बात कही
हादसे के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की बात भी तेज हो गई है। दिल्ली की मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि चार मंजिल से अधिक वाले अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में यदि अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्हें बर्खास्त तक किया जा सकता है।
वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। जांच में हादसे की परिस्थितियों, इमारत की स्थिति, बेसमेंट में चल रहे काम और संबंधित विभागों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
MCD कार्यालय के बाहर ABVP का प्रदर्शन
हादसे को लेकर राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है। दिल्ली पुलिस ने सिविक सेंटर स्थित MCD कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे ABVP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राजधानी में निर्माण और भवन सुरक्षा से जुड़े नियमों की निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है। उनका कहना है कि छात्र इलाकों में बड़ी संख्या में PG और किराये के आवास संचालित होते हैं, इसलिए यहां भवनों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है।
छात्रों से भरा रहता है सत्य निकेतन
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विद्यार्थी PG और हॉस्टल में रहते हैं। इलाके के आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थान मौजूद हैं।
छात्रों की बड़ी आबादी और शिक्षण संस्थानों की वजह से सत्य निकेतन में दिनभर काफी आवाजाही रहती है। हालांकि, इस इलाके में कुल कितने छात्र PG या हॉस्टल में रहते हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में पांच मंजिला इमारत का गिरना स्थानीय लोगों के साथ-साथ छात्र समुदाय के लिए भी बड़ी चिंता का विषय बन गया है। सवाल यह भी है कि छात्र क्षेत्रों में संचालित PG भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच किस तरह की जाती है।
तीन साल में दिल्ली में गिरीं 1133 इमारतें
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में भवन सुरक्षा की पुरानी समस्या को भी सामने ला दिया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 से 2025 के बीच राजधानी में इमारत गिरने की 1133 घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में कुल 98 लोगों की जान चली गई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में कमजोर और असुरक्षित इमारतों का मुद्दा कितना गंभीर है। पुरानी इमारतों में बिना पर्याप्त संरचनात्मक जांच के बेसमेंट में बदलाव, तोड़फोड़ या खुदाई किए जाने से खतरा और बढ़ सकता है।
सत्य निकेतन हादसे में भी शुरुआती तौर पर बेसमेंट में चल रहे काम और पिलर खिसकने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आखिर वह काम किसकी अनुमति से हो रहा था, क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया और क्या समय रहते संभावित खतरे को पहचाना जा सकता था।
फिलहाल मलबे में तलाशी अभियान जारी है। छह शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है, जबकि रेस्क्यू टीमें बेसमेंट तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। दूसरी ओर, पड़ोसी इमारत में दरारें आने के कारण पूरे इलाके में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। अब मजिस्ट्रेट जांच और पुलिस की कार्रवाई से यह साफ होने की उम्मीद है कि इस दर्दनाक हादसे के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था और राजधानी में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।