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पंजाब में कर्मचारियों का आंदोलन जारी, 11 सितंबर तक नहीं करेंगे काम; सरकार बोली- बातचीत से सुलझाएंगे मसले

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच मांगों को लेकर चल रहा टकराव फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। पंजाब साझा मुलाजिम मंच के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन को अब 11 सितंबर तक जारी रखने का ऐलान किया गया है। इस दौरान निदेशालय और सचिवालय स्तर पर कर्मचारी कामकाज का बहिष्कार करेंगे।

इससे पहले कर्मचारियों ने पेन डाउन स्ट्राइक के तहत सरकारी दफ्तरों में पहुंचकर काम करने से इनकार किया। कर्मचारी कार्यालयों में मौजूद तो रहे, लेकिन कंप्यूटर बंद रखे और सरकारी कामकाज से दूरी बनाए रखी। इसके चलते कई विभागों में रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए और अपने जरूरी काम करवाने के लिए सरकारी कार्यालयों में पहुंचे लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी कई मांगें सरकार के सामने लंबित हैं। इनमें सबसे अहम मुद्दा महंगाई भत्ते यानी डीए का है। कर्मचारी 18 प्रतिशत लंबित डीए और उसके बकाये का भुगतान करने की मांग पर लगातार जोर दे रहे हैं। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह लागू करने, कर्मचारियों के वेतन और दूसरे वित्तीय लाभों के बकाये का भुगतान करने तथा कच्चे और अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा है।

सचिवालय और निदेशालयों में जारी रहेगा विरोध

कर्मचारी संगठनों के साझा मोर्चे ने फिलहाल आंदोलन को जिला स्तर से आगे बढ़ाते हुए इसका केंद्र सचिवालय और निदेशालयों को बनाने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में पंजाब सरकार के प्रमुख प्रशासनिक कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो सकता है।

मंगलवार को भी कर्मचारियों ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया। चंडीगढ़ में स्थित विभिन्न निदेशालयों और सचिवालय के साथ-साथ जिला स्तर के कार्यालयों में भी कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए। कर्मचारियों ने दफ्तरों में पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन सरकारी कार्यों को आगे नहीं बढ़ाया।

पेन डाउन स्ट्राइक का सीधा असर सरकारी सेवाओं पर पड़ा। कई लोग अपने दस्तावेजों, विभागीय कामकाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों के काम से दूर रहने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ा या बिना काम करवाए लौटना पड़ा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन अपनी लंबित मांगों को सरकार से स्वीकार करवाने के लिए है।

किन मांगों को लेकर कर्मचारी हैं नाराज?

पंजाब के सरकारी कर्मचारी लंबे समय से अलग-अलग सेवा संबंधी मुद्दों को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखते रहे हैं। मौजूदा आंदोलन में भी कई मुद्दे एक साथ उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में 18 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान और उसका एरियर जारी करना शामिल है। कर्मचारियों का तर्क है कि डीए की राशि लंबे समय से लंबित है और इसका भुगतान किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस को पूरी तरह लागू करने की मांग कर रहे हैं। पेंशन से जुड़ा यह मुद्दा पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है।

कर्मचारी अपने वेतन और अन्य भत्तों के लंबित बकाये का भुगतान भी चाहते हैं। उनका कहना है कि वित्तीय लाभों से जुड़े कई मामले अभी तक पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। इसके अलावा कच्चे और अनुबंध आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी आंदोलन में प्रमुखता से उठाई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभागों में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट फैसला लेना चाहिए।

साथ ही कर्मचारी एसीपी समेत अन्य सेवा लाभों को बहाल करने की मांग भी कर रहे हैं। इन सभी मुद्दों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

सरकार ने बातचीत का रास्ता खुला रखा

कर्मचारियों के आंदोलन के बीच पंजाब सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव दिया गया है। उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारी संगठनों से बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की बात कही है।

अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल न हों। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के साथ खड़ी है और उनकी जायज मांगों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री के मुताबिक कर्मचारी किसी भी सरकार के लिए प्रशासन की रीढ़ की तरह होते हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि उनके मुद्दों पर बातचीत हो और जो समस्याएं अभी बाकी हैं, उनका समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पहले ही कर्मचारियों से जुड़े कई मामलों में कदम उठा चुकी है और बाकी मुद्दों पर भी चर्चा के लिए तैयार है।

हालांकि सरकार के बातचीत के प्रस्ताव के बावजूद कर्मचारी संगठन फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। कर्मचारी नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है और स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी कुछ अहम शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक सचिवालय और निदेशालय स्तर पर कामकाज का बहिष्कार जारी रहेगा। 27 अगस्त के आदेश को लेकर भी विवाद

कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद का एक अहम कारण आंदोलन के दौरान जारी किया गया कार्रवाई संबंधी आदेश भी है। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि 27 अगस्त को सरकार की ओर से आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया गया था।

पंजाब साझा मुलाजिम मंच के नेताओं सुखचैन सिंह खेहरा, मंजीत सिंह रंधावा और कुलवंत सिंह ने कहा है कि सरकार को पहले इस आदेश को वापस लेना होगा। कर्मचारी नेताओं ने साफ किया है कि जब तक यह आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक बातचीत आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा।

यही वजह है कि कर्मचारी संगठनों ने अपने विरोध को फिलहाल समाप्त करने के बजाय 11 सितंबर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से कार्रवाई का आदेश वापस लेने के बाद ही बातचीत के माहौल को बेहतर बनाया जा सकता है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

कर्मचारियों के आंदोलन ने पंजाब सरकार के सामने एक साथ दो चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। एक तरफ सरकार कर्मचारियों की मांगों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों में काम प्रभावित होने से आम लोगों को परेशानी होने की संभावना बढ़ रही है।

सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी रोजाना प्रशासनिक कामकाज संभालते हैं। ऐसे में पेन डाउन स्ट्राइक या काम के बहिष्कार का असर सीधे आम जनता पर पड़ता है। प्रमाणपत्र, विभागीय मंजूरी, दस्तावेजों से जुड़े कार्य और दूसरी सरकारी सेवाओं के लिए कार्यालय आने वाले लोगों को कर्मचारियों के आंदोलन के कारण इंतजार करना पड़ सकता है।

अमन अरोड़ा ने इसी स्थिति को लेकर कर्मचारियों को चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को होने वाली किसी भी परेशानी को नजरअंदाज नहीं कर सकती। यदि आंदोलन के कारण आम लोगों को लगातार असुविधा होती है तो सरकार कानून के मुताबिक उचित कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकती है।

कर्मचारी भी अपने रुख पर कायम

दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों ने संकेत दे दिया है कि वे फिलहाल अपने आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को पहले उन मुद्दों पर स्पष्ट कदम उठाना चाहिए जिनको लेकर कर्मचारी लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।

कर्मचारी नेताओं के अनुसार केवल बातचीत की पेशकश पर्याप्त नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि सरकार पहले 27 अगस्त को जारी कार्रवाई संबंधी आदेश को वापस ले और इसके बाद मांगों पर गंभीर बातचीत की जाए।

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खुला हुआ है, लेकिन कर्मचारी आंदोलन को 11 सितंबर तक बढ़ाने के फैसले ने स्थिति को और महत्वपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत से यह तय होगा कि हड़ताल खत्म होती है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।

फिलहाल पंजाब के सरकारी कर्मचारियों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। वे लंबित डीए, ओपीएस, बकाया भुगतान, नियमितीकरण और अन्य सेवा लाभों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से ठोस निर्णय चाहते हैं। वहीं सरकार बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की बात कह रही है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि दोनों पक्षों के बीच अगली बातचीत में क्या रास्ता निकलता है और क्या 11 सितंबर से पहले कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हो पाती है।