नई दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक पीजी हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर शिकंजा कसने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर इलाके में मौजूद दूसरी जर्जर और असुरक्षित इमारतों को लेकर भी बड़े स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। इसी सिलसिले में हादसे वाली इमारत के बिल्कुल पास स्थित एक बिल्डिंग को गिराने का काम शुरू कर दिया गया है। इस इमारत में लड़कियों के लिए पीजी संचालित किया जा रहा था।
मंगलवार को नई दिल्ली नगर निगम की टीम ने इस खतरनाक इमारत को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। शाम तक काम चलता रहा और अधिकारियों के मुताबिक बुधवार सुबह फिर से इसे जारी रखा जाएगा। हादसे के बाद एहतियात के तौर पर इस बिल्डिंग को खाली करा दिया गया था। अधिकारियों ने इसे रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित किया था।
मामले में लेबर कॉन्ट्रैक्टर भी गिरफ्तार
सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने के मामले में पुलिस ने एक और गिरफ्तारी की है। इस बार कार्रवाई उस लेबर कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ हुई है, जो इमारत में चल रहे निर्माण और मरम्मत से जुड़े काम में शामिल था। पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या चार हो गई है।
इससे पहले पुलिस ने पीजी के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और उनके बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। तीनों को सोमवार रात पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत में किस तरह का निर्माण कराया जा रहा था, इसकी अनुमति किस स्तर पर थी और मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
बेसमेंट में पानी और सीलन की समस्या बनी थी वजह?
पुलिस पूछताछ में महेश गुप्ता ने जांच अधिकारी को बताया कि पीजी का संचालन करने वाली कंपनी की शिकायत के बाद बेसमेंट में जमा पानी और सीलन की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान बेसमेंट से पानी बाहर निकाला गया और निर्माण से जुड़ी गतिविधियां शुरू की गईं।
बताया जा रहा है कि काम के दौरान पावर ट्रोवेल मशीन का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि मशीन के संचालन से पैदा हुई कंपन का असर पहले से कमजोर हो चुकी संरचना पर पड़ा हो सकता है। हालांकि, इमारत के गिरने की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पुरानी इमारत की नींव और ढांचे पर बाद में बनाई गई अतिरिक्त मंजिलों का कितना भार था। एफआईआर में भी इस बात का उल्लेख है कि पुरानी नींव अतिरिक्त भार उठाने की स्थिति में नहीं थी, इसके बावजूद इमारत में मंजिलें बढ़ाई गईं।
हादसे से पहले छात्रों ने बनाया था दरारों का वीडियो
सत्य निकेतन हादसे के बाद सामने आए एक वीडियो ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे वाली बिल्डिंग के पास मौजूद एक अन्य पीजी में रहने वाली दो छात्राओं ने अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था। दावा है कि यह वीडियो उस समय रिकॉर्ड किया गया, जब हादसा होने में कुछ ही मिनट बाकी थे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं अर्निका और मानसी उस पीजी में रह रही थीं। वीडियो में 20 वर्षीय अर्निका को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसे लग रहा है कि इमारत गिरने वाली है। वीडियो में कमरे की दीवारों और छत पर दिखाई दे रही दरारों ने इलाके की इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे के बाद इस पीजी को भी खाली करा दिया गया था। अब प्रशासन आसपास की दूसरी इमारतों की स्थिति की भी जांच कर रहा है, ताकि किसी और बड़े हादसे की आशंका को पहले ही टाला जा सके।
एक दिन में 1120 पीजी का सर्वे, 52 इमारतें खस्ताहाल
सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में पीजी और पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर व्यापक निरीक्षण शुरू किया है। MCD कमिश्नर संजीव खिरवार के निर्देश पर शुरू हुए सर्वे के पहले दिन ही 1120 पीजी की जांच की गई। इनमें से 52 इमारतें खस्ताहाल या खराब स्थिति में पाई गईं।
MCD ने अपने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने-अपने इलाकों में इमारतों का निरीक्षण करने और 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस सर्वे में यह देखा जा रहा है कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी है, उसमें कितनी मंजिलें हैं, निर्माण नियमों का पालन हुआ है या नहीं और पीजी के तौर पर इस्तेमाल के लिए सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया है या नहीं।
जांच से जुटाई गई जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में भी शामिल किया जाएगा। इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है।
MCD के पांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को निलंबित कर दिया है। उनके अलावा चार इंजीनियरिंग अधिकारियों के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई है। इन अधिकारियों पर विभागीय जांच पूरी होने तक कार्रवाई जारी रहेगी।
साउथ जोन की जिम्मेदारी अब IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को अतिरिक्त रूप से दी गई है। 2016 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी सौरभ फिलहाल साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
प्रशासन का फोकस अब केवल हादसे वाली इमारत तक सीमित नहीं है। पूरे इलाके में ऐसी इमारतों की पहचान की जा रही है, जिनमें अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिल या कमजोर ढांचे के कारण खतरा हो सकता है।
सत्य निकेतन में करीब 300 मकान, 170 में चल रहे पीजी
सत्य निकेतन की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए इलाके के इतिहास और बदलते स्वरूप को भी देखना जरूरी है। यह इलाका मूल रूप से 1965 से 1970 के बीच झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए विकसित किया गया था। बाद में 1970 के दशक में दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस विकसित होने लगा और आसपास के कॉलेजों में छात्रों की संख्या बढ़ी।
छात्रों की बढ़ती संख्या के साथ इलाके में किराये के मकान और पीजी तेजी से बढ़ने लगे। कई मूल आवंटियों ने समय के साथ अपने मकान बेच दिए। मौजूदा समय में सत्य निकेतन में करीब 300 मकान बताए जाते हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में पीजी संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
यही वजह है कि इलाके में पुरानी इमारतों पर बढ़ते व्यावसायिक दबाव और अतिरिक्त निर्माण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी करेगा देशभर की इमारतों की स्थिति की समीक्षा
सत्य निकेतन का हादसा अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। मंगलवार को मामले का उल्लेख अदालत में हुआ। सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि मामला केवल दिल्ली में मौजूद जर्जर इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा। अदालत देशभर में असुरक्षित और अवैध निर्माण की स्थिति की समीक्षा करने पर भी विचार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को एमिकस क्यूरी और सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा ने उठाया। वह अवैध और असुरक्षित इमारतों से संबंधित एक पुराने मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं। अदालत पहले भी देशभर में अवैध इमारतों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। अब यह देखने की कोशिश की जा रही है कि उन निर्देशों का जमीन पर कितना पालन हुआ है।
इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
पुराने मकानों पर बढ़ती मंजिलों का बोझ
अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन का कहना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में पुरानी इमारतें ऐसी हैं, जिन्हें आज के हिसाब से बढ़े हुए भार को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था। बाद में कई जगहों पर अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गईं, जिससे मूल ढांचे पर दबाव बढ़ गया।
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में लगभग 75 लाख घरों में से केवल करीब 1.75 लाख इमारतों के पास स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान होने की जानकारी है। ऐसे आंकड़े भवन निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर बड़ी चुनौती की ओर इशारा करते हैं।
हादसे में गई 7 लोगों की जान
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए हादसे ने राजधानी को झकझोर दिया था। एक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और उनके लिए सहायता का ऐलान किया।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि सत्य निकेतन जैसी घटना दोबारा न हो। इसके लिए एक ओर जहां हादसे की जांच और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी ओर दिल्लीभर में पीजी और पुरानी इमारतों का सर्वे शुरू किया गया है।
सत्य निकेतन की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुराने मकानों को पीजी और हॉस्टल में बदलते समय उनकी संरचनात्मक क्षमता की सही जांच होती है या नहीं। आने वाले दिनों में MCD के सर्वे, पुलिस जांच और अदालतों की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है और राजधानी की कमजोर इमारतों को लेकर आगे क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।