तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल कर बनाए गए कथित डीपफेक वीडियो के जरिए लोगों को आर्थिक मदद के नाम पर ठगने की कोशिश का मामला सामने आया है। तमिलनाडु क्राइम ब्रांच-सीआईडी ने इस मामले में राजस्थान से एक युवक को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद अन्य लोगों और संभावित विदेशी कनेक्शन का पता लगाने में जुटी हैं।
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर मुख्यमंत्री विजय से जुड़ा हुआ दिखने वाला एक एआई-निर्मित वीडियो प्रसारित किया जा रहा था। वीडियो में मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ हिंदी में आवाज का इस्तेमाल किया गया था। इसमें लोगों को एक मोबाइल नंबर पर व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क करने के लिए कहा जा रहा था। दावा किया जा रहा था कि ऐसा करने पर जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि इस तरीके का इस्तेमाल आम लोगों को भ्रमित कर उनसे पैसे ऐंठने के लिए किया जा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबी-सीआईडी ने डिजिटल माध्यमों से वीडियो के प्रसार की निगरानी शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर राजस्थान के अलवर जिले तक पहुंची, जहां से 28 वर्षीय शायबू खान को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी अलवर के लक्ष्मणनगर का रहने वाला है। उसे 12 सितंबर को स्थानीय पुलिस की मदद से तमिलनाडु सीबी-सीआईडी की विशेष टीम ने पकड़ा।
फेसबुक पर सामने आए थे फर्जी वीडियो
जांच एजेंसी को नियमित सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान फेसबुक पर ऐसे वीडियो दिखाई दिए, जिनमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की एआई से तैयार की गई छवि का इस्तेमाल किया गया था। वीडियो को इस तरह तैयार किया गया था कि देखने वाले को पहली नजर में यह वास्तविक संदेश जैसा लग सकता था। इसके साथ हिंदी में वॉयसओवर भी जोड़ा गया था।
पुलिस के मुताबिक, वीडियो में लोगों से एक खास व्हाट्सऐप नंबर पर संपर्क करने की अपील की जा रही थी। संदेश का मकसद लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि उन्हें आर्थिक मदद दी जा सकती है। जांच एजेंसी को आशंका है कि इस बहाने लोगों से उनकी निजी जानकारी या पैसे हासिल करने की कोशिश की जा रही थी।
डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या वीडियो को बदलकर उसे ऐसे प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे वह व्यक्ति वास्तव में वही बात कह रहा हो। इसी तकनीक का इस्तेमाल इस मामले में मुख्यमंत्री की पहचान का फायदा उठाने के लिए किए जाने का आरोप है।
राजस्थान पहुंची तमिलनाडु पुलिस की टीम
फर्जी वीडियो की जानकारी मिलने के बाद सीबी-सीआईडी ने उसके डिजिटल स्रोत और उसे आगे प्रसारित करने वाले अकाउंट्स की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए सुरागों के आधार पर पुलिस की विशेष टीमें राजस्थान और मध्य प्रदेश भेजी गईं।
राजस्थान में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने शायबू खान को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट पीटी वारंट के जरिए तमिलनाडु लाया गया। यहां अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से कई इलेक्ट्रॉनिक सामान भी बरामद किए हैं। इनमें एक मोबाइल फोन, सिम कार्ड और एक सीपीयू शामिल है। इन उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित डीपफेक वीडियो को किस डिवाइस से तैयार किया गया, इसे किन सोशल मीडिया अकाउंट्स से अपलोड किया गया और इसके पीछे कितने लोग काम कर रहे थे।
वीडियो हटाने की प्रक्रिया शुरू
पुलिस की निगरानी में जब फर्जी वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की जानकारी मिली तो संबंधित सामग्री को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच एजेंसियां उन फेसबुक अकाउंट्स की भी पड़ताल कर रही हैं, जिनसे इस तरह के वीडियो शेयर किए गए थे।
अधिकारियों के मुताबिक, सिर्फ एक अकाउंट या एक व्यक्ति तक जांच सीमित नहीं है। एक जैसे वीडियो अलग-अलग फेसबुक खातों से साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन अकाउंट्स के बीच आपसी संबंध क्या है और क्या इनके पीछे कोई संगठित समूह सक्रिय है।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वीडियो की डिजिटल उत्पत्ति का पता लगाना भी है। इसके लिए सोशल मीडिया गतिविधियों, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ऑनलाइन अकाउंट्स से जुड़े डिजिटल सुरागों की जांच की जा रही है।
पाकिस्तान से संभावित कनेक्शन की जांच
पुलिस को कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं, जिनके आधार पर इन फर्जी वीडियो की संभावित उत्पत्ति पाकिस्तान से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि विदेशी कनेक्शन से जुड़े पहलू की जांच अभी जारी है और एजेंसियां डिजिटल ट्रेल के जरिए वास्तविक स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री के आधार पर किसी नेटवर्क की पूरी तस्वीर तुरंत स्पष्ट नहीं होती। इसलिए अलग-अलग डिजिटल सुरागों को जोड़कर यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो कहां से तैयार हुआ और उसे भारत में किन माध्यमों से प्रसारित किया गया।
विदेश से जुड़े संभावित डिजिटल अपराधियों की पहचान के लिए भी ट्रैकिंग की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि राजस्थान में गिरफ्तार आरोपी की भूमिका क्या थी और क्या वह किसी बड़े ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
लोगों को आर्थिक सहायता के नाम पर किया जा रहा था संपर्क
जांच में सामने आए वीडियो का सबसे अहम पहलू लोगों को आर्थिक मदद का लालच देना था। वीडियो में मुख्यमंत्री की छवि का इस्तेमाल करते हुए लोगों से संपर्क करने की अपील की गई थी। इसके लिए एक व्हाट्सऐप नंबर उपलब्ध कराया गया था।
इस तरह के संदेशों के जरिए आम लोगों के बीच भरोसा पैदा करने की कोशिश की जा सकती है, क्योंकि वीडियो में एक चर्चित सार्वजनिक व्यक्ति की तस्वीर और आवाज जैसी सामग्री दिखाई देती है। पुलिस का मानना है कि इसी पहचान का फायदा उठाकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया।
साइबर अपराधों में फर्जी सरकारी योजनाओं, आर्थिक सहायता और राहत राशि के नाम पर लोगों को मैसेज भेजकर उनसे संपर्क करने के मामले सामने आते रहे हैं। इस मामले में भी जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि वीडियो देखने के बाद व्हाट्सऐप नंबर पर संपर्क करने वाले लोगों से किस तरह की जानकारी मांगी गई और क्या किसी व्यक्ति से पैसे भी लिए गए।
आरोपी की भूमिका खंगाल रही जांच एजेंसी
शायबू खान की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब उसकी कथित भूमिका को विस्तार से खंगाल रही है। उसके पास से मिले मोबाइल फोन और सिम कार्ड की डिजिटल जांच अहम मानी जा रही है। पुलिस इन उपकरणों के जरिए सोशल मीडिया अकाउंट्स, मैसेजिंग गतिविधियों और वीडियो से जुड़े डिजिटल डेटा की जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी।
सीपीयू की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित वीडियो तैयार करने या एडिट करने के लिए किन फाइलों और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा पुलिस यह भी देख सकती है कि वीडियो बनाने के बाद उसे किन-किन प्लेटफॉर्म पर भेजा गया।
जांच एजेंसी इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि आरोपी ने अकेले यह काम किया या उसे किसी दूसरे व्यक्ति अथवा समूह से निर्देश या सामग्री मिल रही थी। यदि डिजिटल जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
दो राज्यों में भेजी गईं विशेष टीमें
मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए तमिलनाडु सीबी-सीआईडी ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में विशेष पुलिस टीमें भेजीं। इससे संकेत मिलता है कि एजेंसी सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार से जुड़े अलग-अलग डिजिटल और भौतिक ठिकानों की जांच कर रही है।
राजस्थान में गिरफ्तारी के बाद जांच अब तमिलनाडु में आगे बढ़ रही है। वहीं मध्य प्रदेश में भी टीम संभावित लिंक और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान यदि नए नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट या संदिग्ध व्यक्ति सामने आते हैं तो पुलिस की कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
डीपफेक के जरिए पहचान का दुरुपयोग
इस मामले ने एक बार फिर डीपफेक तकनीक के गलत इस्तेमाल से जुड़ी चुनौती को सामने ला दिया है। किसी सार्वजनिक व्यक्ति की तस्वीर और आवाज को डिजिटल तरीके से बदलकर तैयार किया गया वीडियो लोगों को वास्तविक लग सकता है। ऐसे में यदि उसमें आर्थिक लाभ या किसी योजना का दावा किया जाए तो लोग आसानी से उसके झांसे में आ सकते हैं।
पुलिस की जांच का उद्देश्य केवल वीडियो बनाने वाले व्यक्ति तक पहुंचना नहीं है, बल्कि उसके पूरे डिजिटल नेटवर्क का पता लगाना भी है। इसके तहत वीडियो बनाने, एडिट करने, अपलोड करने और अलग-अलग अकाउंट्स के जरिए उसे फैलाने वाले लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
फिलहाल शायबू खान न्यायिक हिरासत में है और मामले की डिजिटल जांच जारी है। पुलिस राजस्थान में बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और सीपीयू से मिलने वाले डेटा के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ रही है। साथ ही संभावित पाकिस्तान कनेक्शन और विदेश में मौजूद संदिग्ध डिजिटल अपराधियों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।