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2027 से पहले पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव, परगट सिंह को मिली प्रदेश की कमान; हॉकी के कप्तान से अब सियासत के ‘कप्तान’

पंजाब की राजनीति में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले के साथ ही अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया। वड़िंग ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपने पद से इस्तीफा सौंपा था और इसके कुछ ही समय बाद पार्टी हाईकमान ने परगट सिंह को नई जिम्मेदारी देने का ऐलान कर दिया। नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।

चुनाव से पहले संगठन की कमान बदली

कांग्रेस का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है और पार्टी को चुनावी तैयारियों के लिए संगठन को सक्रिय करने की जरूरत है। पिछले कुछ समय से पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद की चर्चाएं सामने आती रही थीं। इसी दौरान पार्टी के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने राज्य के वरिष्ठ नेताओं और संगठन से जुड़े लोगों के साथ बातचीत कर स्थिति का फीडबैक लिया था। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अंततः परगट सिंह के नाम पर मुहर लगी।

राजा वड़िंग अप्रैल 2022 से पंजाब कांग्रेस की कमान संभाल रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद पार्टी ने बिना लंबा अंतराल दिए नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी। कांग्रेस के आधिकारिक फैसले के मुताबिक पंजाब में चुनाव से जुड़ी विभिन्न कमेटियों के कार्यकारी अध्यक्ष और चेयरपर्सन तथा को-चेयरपर्सन फिलहाल अपने पदों पर बने रहेंगे। यानी नेतृत्व में मुख्य बदलाव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के स्तर पर हुआ है, जबकि चुनावी संगठन की अन्य व्यवस्थाएं जारी रहेंगी।

दोआबा के नेता को जिम्मेदारी

परगट सिंह जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और पंजाब के दोआबा क्षेत्र से आते हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर जिन नामों पर चर्चा हुई, उनमें अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं के नाम सामने आए थे। ऐसे में परगट सिंह की नियुक्ति से पार्टी संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का पहलू भी जुड़ गया है। हालांकि कांग्रेस के सामने केवल क्षेत्रीय संतुलन बनाने की चुनौती नहीं है, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों और पार्टी के विभिन्न नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होगा।

पंजाब कांग्रेस में मालवा, माझा और दोआबा तीनों क्षेत्रों का राजनीतिक महत्व है। पार्टी के लिए यह जरूरी होगा कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में इन सभी क्षेत्रों के नेताओं को संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका दी जाए। परगट सिंह स्वयं जालंधर कैंट से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में यह सीट अपने नाम की।

सबसे बड़ी परीक्षा गुटों को साथ लाने की

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में परगट सिंह के सामने पहली बड़ी जिम्मेदारी पार्टी के भीतर बेहतर समन्वय बनाने की होगी। पिछले महीनों में पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच मतभेद की खबरें आती रही हैं। अब नए अध्यक्ष को वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, सांसदों और संगठन के पदाधिकारियों के बीच तालमेल कायम करते हुए पार्टी की गतिविधियों को चुनावी दिशा देनी होगी।

राजा वड़िंग के इस्तीफे से पहले कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब संगठन की स्थिति को लेकर नेताओं से फीडबैक लिया था। इसी प्रक्रिया के बीच सचिन पायलट की भूमिका भी चर्चा में रही। वड़िंग ने अपने इस्तीफे के बाद पार्टी के अंदर चल रहे दबाव और मतभेदों का जिक्र किया था। हालांकि उनके इस्तीफे और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आई हैं।

अब परगट सिंह को संगठन के भीतर इन मतभेदों से आगे बढ़कर एक साझा राजनीतिक कार्यक्रम तैयार करना होगा। कांग्रेस के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव उसके सामने मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती लेकर आएगा।

हॉकी के मैदान में भी रहा लंबा सफर

परगट सिंह की पहचान केवल राजनेता के तौर पर नहीं है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय हॉकी में लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर बनाया। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे और तीन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 1988 के सियोल, 1992 के बार्सिलोना और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में हिस्सा लिया। बार्सिलोना और अटलांटा ओलंपिक में वह भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं। अटलांटा ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में उन्होंने भारत के ध्वजवाहक की भूमिका भी निभाई थी।

हॉकी में परगट सिंह मुख्य रूप से डिफेंडर और फुल-बैक के तौर पर खेले। पंजाब पुलिस और भारतीय रेलवे से भी उनका जुड़ाव रहा। खेल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 1998 में वह भारतीय हॉकी टीम के राष्ट्रीय कोच भी नियुक्त किए गए थे। बाद में पंजाब में खेल प्रशासन से जुड़े पदों पर रहते हुए उन्होंने खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों में भी भूमिका निभाई।

2012 में शुरू हुई राजनीतिक पारी

अंतरराष्ट्रीय खेल से राजनीति में आने के बाद परगट सिंह ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 2012 में लड़ा। उस समय उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट सीट से चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल की। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस का रुख किया। कांग्रेस में आने के बाद भी उन्होंने जालंधर कैंट सीट पर अपना प्रभाव बनाए रखा और 2017 में दोबारा विधायक चुने गए। 2022 के चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। इस तरह वह लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जालंधर कैंट से विजयी रहे हैं।

कांग्रेस संगठन में भी परगट सिंह को पहले जिम्मेदारियां मिल चुकी हैं। 2021 में नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी अवधि में पंजाब की तत्कालीन चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनके पास स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा मामले तथा एनआरआई मामलों से जुड़े विभाग रहे। उन्होंने मार्च 2022 तक मंत्री के रूप में काम किया।

अब खेल का अनुभव सियासत में कितना काम आएगा?

परगट सिंह की नई भूमिका में उनका खेल अनुभव भी चर्चा का विषय है। हॉकी के मैदान पर कप्तानी करने के बाद अब वह एक बड़े राजनीतिक संगठन की राज्य इकाई का नेतृत्व करेंगे। हालांकि खेल और राजनीति की परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन उनके राजनीतिक सफर में संगठन के भीतर काम करने और सरकार में मंत्री रहने का अनुभव पहले से मौजूद है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उन्हें केवल पार्टी की बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना होगा। जिला स्तर के संगठन को सक्रिय करना, नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाना, कार्यकर्ताओं को चुनावी गतिविधियों से जोड़ना और राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी को मजबूत करना भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होगा।

वड़िंग के बाद नई रणनीति पर नजर

राजा वड़िंग ने इस्तीफे के बाद परगट सिंह को नए पद के लिए शुभकामनाएं दी हैं। कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी उनकी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने भी नए प्रदेश अध्यक्ष को बधाई देते हुए संगठन को मजबूत करने और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

अब पंजाब कांग्रेस के सामने सवाल यह होगा कि नेतृत्व परिवर्तन को संगठनात्मक स्तर पर किस तरह आगे बढ़ाया जाता है। परगट सिंह के पास विधानसभा का अनुभव है, सरकार में मंत्री रह चुके हैं और पार्टी संगठन में भी काम कर चुके हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय हॉकी और कप्तानी का उनका पुराना अनुभव उनकी सार्वजनिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कांग्रेस के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह बदलाव केवल प्रदेश अध्यक्ष बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। नए अध्यक्ष को पार्टी की अंदरूनी चुनौतियों, क्षेत्रीय संतुलन, वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय और जमीनी संगठन को सक्रिय करने जैसे कई मोर्चों पर काम करना होगा। आने वाले महीनों में परगट सिंह की प्राथमिकताएं और उनके नेतृत्व में कांग्रेस का संगठन किस तरह आकार लेता है, इसी से इस बदलाव का राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट होगा।