प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के अपने दौरे के दौरान विकास, शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक विरासत को लेकर कई अहम संदेश दिए। चेन्नई में उन्होंने मेट्रो रेल के दूसरे चरण के एक महत्वपूर्ण हिस्से का उद्घाटन किया और इसके बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के साथ मेट्रो ट्रेन में सफर भी किया। दोनों नेताओं की इस यात्रा ने कार्यक्रम को खास बना दिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि तमिलनाडु की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और आधुनिक विकास के मेल से बनती है। मंदिरों से लेकर मेट्रो नेटवर्क तक राज्य में भारत की बदलती तस्वीर देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश अपनी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान, तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है।
2026 के विधानसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री का यह पहला चेन्नई दौरा था। इन चुनावों में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने जीत हासिल की थी और विजय मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस इस राजनीतिक व्यवस्था में उनकी सहयोगी पार्टी है। चुनाव के बाद प्रधानमंत्री की तमिलनाडु यात्रा को राज्य में विकास परियोजनाओं और केंद्र तथा राज्य के बीच सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने दौरे के दौरान मोदी ने परिवहन सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ विद्यार्थियों के भविष्य, खेलों में भारत की संभावनाओं और तमिल भाषा-साहित्य की महत्ता पर भी चर्चा की।
चेन्नई मेट्रो के नए रूट से यात्रियों को मिलेगी सुविधा
प्रधानमंत्री मोदी ने चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत पूनमल्ली से वडापालानी तक लगभग 14.6 किलोमीटर लंबे मार्ग का उद्घाटन किया। इस परियोजना को शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेजी से बढ़ते महानगरीय क्षेत्र में मेट्रो जैसी सुविधाएं यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ-साथ सड़क यातायात पर दबाव कम करने में भी मदद कर सकती हैं।
उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने मेट्रो ट्रेन में यात्रा की। इस दौरान मुख्यमंत्री विजय भी उनके साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं की एक साथ ट्रेन में यात्रा ने कार्यक्रम को राजनीतिक और सार्वजनिक, दोनों ही दृष्टियों से चर्चा में ला दिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आधुनिक परिवहन सुविधाओं को विकास की व्यापक तस्वीर से जोड़ते हुए कहा कि भारत की प्रगति केवल बड़े शहरों और नई तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें देश की सांस्कृतिक पहचान की भी अहम भूमिका है।
मोदी के मुताबिक, तमिलनाडु की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक बुनियादी ढांचे का साथ-साथ आगे बढ़ना नए भारत की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें परंपरा और प्रगति एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य में प्राचीन मंदिर, साहित्यिक धरोहर और आधुनिक परिवहन व्यवस्था इसी बदलाव की झलक पेश करते हैं।
स्कूल के कार्यक्रम में पहुंचे प्रधानमंत्री, विद्यार्थियों को बताया देश का भविष्य
मेट्रो कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री चेन्नई स्थित जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए। यहां उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद किया और उनके सामने भविष्य को लेकर अपना विश्वास व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि छात्रों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और योग्यता को देखकर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है कि भारत आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति करेगा।
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को देश की भावी सफलता का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत का भविष्य शानदार होगा और इस भविष्य को आकार देने में आज के युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशेष क्षमता होती है। जरूरत इस बात की है कि बच्चे अपनी रुचि को पहचानें, अपने लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
कार्यक्रम के दौरान मोदी ने विद्यार्थियों से एक सामूहिक संकल्प भी दोहरवाया। उन्होंने कहा कि वह जो वाक्य बोलेंगे, उसके बाद बच्चों को जवाब देना होगा, ‘वी विल डू इट’। इसके साथ उन्होंने ‘डेवलप तमिलनाडु, डेवलप इंडिया’ का संदेश दिया। इस नारे के जरिए प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास और देश की समग्र प्रगति को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश की।
उनका संदेश था कि विद्यार्थियों को केवल अपनी व्यक्तिगत सफलता के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि अपने ज्ञान और क्षमता का इस्तेमाल समाज तथा देश के विकास में भी करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
‘ड्रीम बिग, थिंक डिफरेंटली एंड बी फियरलेस’ का मंत्र
प्रधानमंत्री ने छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह देते हुए अंग्रेजी में कहा, ‘ड्रीम बिग, थिंक डिफरेंटली एंड बी फियरलेस।’ इसका अर्थ है कि बड़े सपने देखें, परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नए विचार अपनाएं और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने से न डरें।
मोदी ने विद्यार्थियों को समझाया कि बदलती दुनिया में सफलता के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। नई परिस्थितियों के अनुरूप सोचने, सवाल पूछने, नए समाधान तलाशने और अपने विचारों को व्यवहार में लाने की क्षमता भी जरूरी है। युवाओं को अपनी योग्यता पर भरोसा रखना चाहिए और असफलताओं को सीखने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा का स्वरूप बदल रहा है और विद्यार्थियों के सामने पहले की तुलना में अधिक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उच्च शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 1,300 से अधिक हो चुकी है, जबकि कॉलेजों की संख्या बढ़कर लगभग 52 हजार तक पहुंच गई है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT), भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIM) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (AIIMS) का भी विस्तार हुआ है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, शिक्षा संस्थानों की बढ़ती संख्या का सीधा संबंध युवाओं के लिए उपलब्ध होने वाले नए अवसरों से है। इससे अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, शोध और अलग-अलग व्यावसायिक क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका मिलता है। उन्होंने नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि देश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और भारतीय संस्थानों की वैश्विक पहचान मजबूत करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इन अवसरों का लाभ उठाने और अपनी क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया।
खेलों में भी दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो सकता है भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान खेलों को करियर के रूप में अपनाने की संभावनाओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा की अपनी रुचि, प्रतिभा और सपने होते हैं। कुछ विद्यार्थी पढ़ाई और शोध में आगे बढ़ना चाहते हैं, जबकि कई ऐसे भी होते हैं जिनकी दिलचस्पी खेलों में होती है। ऐसे युवाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और उचित मंच उपलब्ध कराना जरूरी है।
मोदी ने कहा कि भारत में खेलों को केवल मनोरंजन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें एक गंभीर करियर विकल्प के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने और उनकी प्रतिभा को निखारने के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारियों के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा देश की नजर वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी पर भी है। प्रधानमंत्री ने इन लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के युवाओं के पास अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पहले से अधिक अवसर मौजूद हैं। खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उन्हें संभावनाओं, मंच और समर्थन का लाभ उठाना चाहिए।
प्रधानमंत्री का मानना है कि नई पीढ़ी अपनी मेहनत और क्षमता के दम पर भारत को खेलों की दुनिया में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में पूरी लगन से काम करने और उपलब्ध अवसरों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
तमिल भाषा और संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने की अपील
स्कूल के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे भारत को जानने और समझने के लिए यात्राएं करें। देश के अलग-अलग हिस्सों की परंपराओं, भाषाओं और ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित होने पर उनकी सोच का दायरा बढ़ेगा।
मोदी ने विद्यार्थियों से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे जहां भी जाएं, वहां अपने दोस्तों और दूसरे लोगों के बीच तमिल संस्कृति तथा तमिल कविताओं का परिचय कराएं। उनके मुताबिक, किसी भाषा की पहचान केवल उसके बोलने वालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। साहित्य, कविता और सांस्कृतिक परंपराओं के जरिए एक क्षेत्र की विरासत दूसरे क्षेत्रों के लोगों तक भी पहुंच सकती है।
प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा के प्रति अपने लगाव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की विविध सांस्कृतिक परंपराएं भारत की ताकत हैं। अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद देश के लोगों को एक साझा राष्ट्रीय भावना जोड़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ अन्य भाषाओं और परंपराओं को समझने के लिए भी प्रेरित किया।
उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि यात्राओं ने उन्हें भारत को करीब से समझने का अवसर दिया। नब्बे के दशक की शुरुआत में वह कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई एकता यात्रा का हिस्सा बने थे। इस दौरान उनका परिचय गिरिजा अम्मा से हुआ था, जो वर्षों बाद भी बना हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जाने और वहां के लोगों से मिलने से उन्हें भारत की विविधता को समझने का मौका मिला। तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति उनके लगाव को भी उन्होंने अपने इन्हीं अनुभवों से जोड़ा।
तिरुवल्लुवर के विचारों का उल्लेख, सीख को जीवन में उतारने पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महान तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर को भी याद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि महान विचारकों की रचनाएं केवल पढ़ने के लिए नहीं होतीं, बल्कि उनसे मिलने वाली सीख को अपने जीवन में अपनाना भी महत्वपूर्ण है।
मोदी ने तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति को जीवनभर सीखने की इच्छा बनाए रखनी चाहिए। ज्ञान प्राप्त करना एक निरंतर प्रक्रिया है, लेकिन उसका वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब व्यक्ति उस ज्ञान को अपने व्यवहार और निर्णयों में शामिल करता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि हाल ही में उन्हें रूस के राष्ट्रपति को तमिल साहित्य की एक महान कृति का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट करने का अवसर मिला था। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने भारतीय साहित्य और क्षेत्रीय भाषाओं की रचनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के महत्व को रेखांकित किया।
उनके संदेश का मुख्य भाव यह था कि साहित्य और महान व्यक्तित्वों के विचार विद्यार्थियों को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दे सकते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना या डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। इसके साथ जीवन में अनुशासन, जिम्मेदारी, समझदारी और अच्छे मूल्यों को अपनाना भी जरूरी है।
विकास और सांस्कृतिक पहचान को साथ लेकर आगे बढ़ने का संदेश
चेन्नई दौरे में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों में आधुनिक बुनियादी ढांचे, शिक्षा, खेल और संस्कृति जैसे अलग-अलग विषय शामिल रहे। मेट्रो परियोजना के उद्घाटन ने शहरी परिवहन के विस्तार पर ध्यान आकर्षित किया, जबकि विद्यालय के समारोह में उन्होंने युवाओं को देश की विकास यात्रा का अहम भागीदार बताया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेशों के माध्यम से विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य तय करने, नई सोच अपनाने और निडर होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को देश की व्यापक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
विधानसभा चुनावों के बाद अपने पहले चेन्नई दौरे पर मोदी की मुख्यमंत्री विजय के साथ मेट्रो यात्रा भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। दूसरी ओर, विद्यार्थियों के बीच दिया गया उनका संबोधन शिक्षा और युवा क्षमता पर केंद्रित रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की भावी प्रगति में आज के विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
प्रधानमंत्री का संदेश था कि आधुनिक तकनीक, बेहतर शिक्षा, खेलों में उपलब्धियां और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। उनके मुताबिक, देश को विकसित बनाने के लिए युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचाननी होगी, लगातार सीखते रहना होगा और व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझनी होगी।