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दिल्ली में NSUI का प्रदर्शन, अध्यक्ष विनोद जाखड़ समेत कई कार्यकर्ता हिरासत में; महिला कार्यकर्ताओं से कथित मारपीट पर FIR की मांग

राजधानी दिल्ली में छात्र संगठन NSUI के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और कई अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। NSUI के सदस्य पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर एकत्रित होकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के मामले में संबंधित महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी यानी FIR दर्ज की जाए।

NSUI का कहना है कि इस मामले में शिकायत देने और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने इसी मुद्दे को लेकर पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बन गई, जिसके बाद विनोद जाखड़ सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

यह मामला अब छात्र संगठन और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाए जाने के बाद घटनाक्रम ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस ने महिला कार्यकर्ताओं के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

10 अक्टूबर की घटना को लेकर NSUI ने उठाई कार्रवाई की मांग

NSUI के मुताबिक, 10 अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठन की महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट की गई थी। संगठन का आरोप है कि इस घटना में पुलिस की एक महिला अधिकारी की भूमिका भी रही। इसी आधार पर NSUI संबंधित अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कर रहा है।

संगठन के सदस्यों का कहना है कि किसी भी मामले में शिकायत मिलने के बाद उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। NSUI ने इसी मांग को लेकर पुलिस प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे अपनी शिकायत पर कार्रवाई कराने के उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों से बातचीत करना चाहते थे, लेकिन उनकी मांग पर अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। संगठन का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए बार-बार प्रयास करने के बाद भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

हालांकि, महिला कार्यकर्ताओं के साथ हुई कथित घटना और पुलिस अधिकारियों की भूमिका से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले में आरोपों और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अलग-अलग रूप से सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के बाद भी नहीं बनी बात

NSUI ने दावा किया कि बुधवार को संगठन के प्रतिनिधियों ने एडिशनल DCP समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस बातचीत का उद्देश्य महिला कार्यकर्ताओं की शिकायत पर FIR दर्ज कराने और मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करना था।

संगठन के अनुसार, अधिकारियों से मुलाकात के बावजूद शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने का निर्णय लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई की दिशा में कदम नहीं उठाया जाता, तब तक वे अपनी मांग उठाते रहेंगे।

NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मीडिया से बातचीत के दौरान पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संगठन अपनी महिला कार्यकर्ताओं के लिए न्याय की मांग कर रहा है और इस मांग को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचा है। जाखड़ ने आरोप लगाया कि अधिकारी न तो उनकी बात सुन रहे हैं और न ही उनसे उचित तरीके से बातचीत कर रहे हैं।

जाखड़ के मुताबिक, संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि कथित मारपीट की शिकायत पर कानूनी प्रक्रिया शुरू कराना है। उन्होंने सवाल किया कि महिला कार्यकर्ताओं के साथ हुई घटना को लेकर न्याय की मांग करना आखिर अपराध कैसे हो सकता है।

विनोद जाखड़ ने लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान NSUI अध्यक्ष ने कथित मारपीट को लेकर कुछ गंभीर आरोप भी लगाए। जाखड़ का दावा है कि संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं को एक अंधेरे कमरे में ले जाया गया था, जहां उनके साथ जूते और बूट से मारपीट की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि महिला कार्यकर्ताओं के साथ हुई घटना को गंभीरता से लेने के बजाय शिकायत पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जाखड़ ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि यदि किसी प्रदर्शनकारी के साथ गलत व्यवहार हुआ है, तो उसकी जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।

उनके बयानों के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। NSUI इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच होनी चाहिए, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि अंधेरे कमरे में ले जाने और जूते-बूट से मारपीट किए जाने संबंधी बातें फिलहाल जाखड़ के आरोप हैं। इन दावों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित पक्षों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया था मामला

NSUI के प्रदर्शन से पहले बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस विवाद को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई का सामना करने वाले NSUI कार्यकर्ताओं को अपने साथ प्रस्तुत किया। कार्यकर्ताओं ने अपने साथ हुई घटनाओं के बारे में जानकारी दी और पुलिस के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए।

राहुल गांधी ने इस मामले को सार्वजनिक मंच पर उठाते हुए प्रभावित छात्रों और प्रदर्शनकारियों की बात सामने रखी। कांग्रेस की ओर से इसे छात्रों के अधिकारों और प्रदर्शन के दौरान पुलिस के व्यवहार से जुड़ा मुद्दा बताया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ। इन आरोपों के बाद महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट और पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे घटना से जुड़े वीडियो, तस्वीरों और अन्य उपलब्ध सबूतों को सुरक्षित रखें। उनका कहना था कि किसी भी आरोप की जांच में साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें व्यवस्थित तरीके से सामने लाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। इस सिलसिले में पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक के खिलाफ जवाबदेही तय करने की बात कही गई। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी का निर्धारण उचित जांच तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

छात्रा ने सुनने की क्षमता प्रभावित होने का किया दावा

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुईं छात्राओं ने भी कथित पुलिस कार्रवाई के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी गई थी। इस आरोप ने मामले की गंभीरता को लेकर नई बहस छेड़ दी।

दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की कथित पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद उन्हें सुनने में परेशानी हुई।

इन बयानों के बाद NSUI ने महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और पुलिस के कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि मामले में शामिल सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की चिकित्सकीय या स्वतंत्र जांच से पुष्टि होने की जानकारी यहां उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष और जांच के नतीजे सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी।

यह आरोप राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण यहां उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे संबंधित प्रदर्शनकारी के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

NSUI और कांग्रेस के नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है। संगठन का जोर इस बात पर है कि 10 अक्टूबर की कथित घटना की जांच की जाए और शिकायत पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाए जाएं।

वहीं, किसी भी राजनीतिक संगठन या प्रदर्शनकारी की ओर से लगाए गए आरोपों की सत्यता निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया आवश्यक है। ऐसे मामलों में जांच की निष्पक्षता और प्रक्रिया की पारदर्शिता विशेष महत्व रखती है।

सात दिनों में विपक्ष के पांच बड़े प्रदर्शन

इस घटनाक्रम के बीच विपक्ष की ओर से हाल के दिनों में किए गए प्रदर्शनों का मुद्दा भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विपक्ष ने सात दिनों के भीतर पांच बड़े प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के पीछे अलग-अलग राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दे रहे हैं।

NSUI का मौजूदा प्रदर्शन भी इसी व्यापक राजनीतिक माहौल के बीच हुआ है। छात्र संगठन महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के मामले में FIR दर्ज कराने की मांग कर रहा है, जबकि कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाकर पुलिस की जवाबदेही पर सवाल किए हैं।

विनोद जाखड़ और अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और संगठन की मांगों पर प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

फिलहाल, इस मामले के तीन प्रमुख पहलू हैं—10 अक्टूबर को महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के आरोप, शिकायत पर FIR दर्ज कराने की NSUI की मांग और प्रदर्शन के दौरान संगठन के अध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जाना। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह विवाद और अधिक चर्चा में आ गया है।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित शिकायत पर जांच और कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है। साथ ही, पुलिस का आधिकारिक पक्ष, उपलब्ध साक्ष्य और कथित घटना की स्वतंत्र पुष्टि सामने आना भी जरूरी होगा, ताकि पूरे मामले का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।