पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के बाद न्याय की मांग लगातार तेज हो रही है। इस मामले ने एक बार फिर राज्य में नशे के कारोबार, युवाओं पर इसके असर और कानून व्यवस्था से जुड़े सवालों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। परविंदर के परिवार का कहना है कि उनके बेटे ने नशे के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को इस समस्या के प्रति जागरूक करने की कोशिश की। अब परिवार चाहता है कि हत्या के मामले में जल्द सुनवाई हो और दोषियों को उनके किए की सजा मिले।
परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह अपने बेटे को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनका एक बेटा दुनिया से चला गया, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उसके संघर्ष से कई दूसरे परिवारों के बेटे नशे की चपेट में आने से बच सकते हैं। पिता के मुताबिक, अगर उनके बेटे की मौत के बाद समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ती है और युवाओं का भविष्य सुरक्षित होता है, तो यह उसके प्रयासों का बड़ा परिणाम होगा।
भीम सिंह ने मांग की कि मामले की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के बजाय फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए, ताकि परिवार को जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई। परिवार के लिए यह मामला केवल एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि घटना के पीछे की परिस्थितियों और उससे जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो।
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले झोटा की मौत से बढ़ा आक्रोश
मानसा में परविंदर झोटा को नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति के तौर पर याद किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह कथित तौर पर उन मेडिकल स्टोरों पर नजर रखता था, जहां नशीली दवाएं बेचे जाने का संदेह होता था। लोगों का दावा है कि ऐसे मामलों में वह सबूत जुटाने की कोशिश करता और पुलिस को मौके पर बुलाता था।
स्थानीय निवासियों ने कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और जांच के जरिए तथ्यों को सामने लाना जरूरी है। किसी भी दुकानदार या संबंधित व्यक्ति की संलिप्तता केवल स्थानीय दावों के आधार पर साबित नहीं मानी जा सकती।
झोटा की हत्या के बाद शहर में नशे की समस्या को लेकर लोगों की नाराजगी सामने आई है। परिवार और समर्थकों की मांग है कि पुलिस न केवल हत्या के मामले में कार्रवाई करे, बल्कि नशीली दवाओं की कथित बिक्री से जुड़े आरोपों की भी गंभीरता से जांच करे। उनका मानना है कि नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना जरूरी है।
मेडिकल स्टोर से शुरू हुआ कारोबार, फिर मुख्य बाजार तक पहुंची दुकान
स्थानीय लोगों के अनुसार, हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे अश्वनी ने अपने शुरुआती दिनों में पिता के साथ किराना दुकान पर काम किया था। बताया जाता है कि इस कारोबार से अपेक्षा के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। इसके बाद उसने वर्ष 2008 में अपने नाम पर फार्मेसी लाइसेंस लेकर घर के नजदीक मेडिकल स्टोर शुरू किया।
बाद में दुकान को शहर के मुख्य बाजार में स्थानांतरित कर दिया गया। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए गए कि इस दुकान से बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की बिक्री होती थी। इन दावों को लेकर इलाके में चर्चा रही है, लेकिन आरोपों की वास्तविकता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन की ओर से यह पुष्टि की गई है कि संबंधित मेडिकल स्टोर का लाइसेंस अश्वनी के नाम पर था। हालांकि, लाइसेंस का किसी व्यक्ति के नाम पर होना अपने आप में अवैध गतिविधि में उसकी संलिप्तता साबित नहीं करता। कथित नशीली दवाओं की बिक्री और उससे जुड़े अन्य आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड, जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए।
इस मामले में स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि मेडिकल स्टोर से प्रतिबंधित या नशीली दवाओं की बिक्री हो रही थी, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
2023 की घटना के बाद दोनों पक्षों में बढ़ने लगी थी तनातनी
स्थानीय लोगों के दावों के मुताबिक, परविंदर झोटा और अश्वनी के बीच विवाद की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। बताया जाता है कि उस दौरान झोटा और उसके कुछ साथियों ने अश्वनी को कथित तौर पर नशीले पदार्थ बेचते हुए पकड़ने का दावा किया था। इसके बाद उसे जूतों की माला पहनाकर शहर में घुमाए जाने की बात भी सामने आई।
इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की चर्चा रही। हालांकि, उस समय क्या-क्या हुआ था और विवाद की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी पुष्टि संबंधित तथ्यों और जांच से की जानी जरूरी है। स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
पुलिस पूछताछ के दौरान अश्वनी के हवाले से जो जानकारी सामने आने की बात कही गई, उसके मुताबिक उसने झोटा पर गोली चलाने की वजह अपनी आशंका को बताया। बताया गया कि उसे डर था कि झोटा और उसके साथी उसकी पिटाई कर सकते हैं। यह आरोपी की ओर से बताई गई कथित वजह है; इसे घटना का अंतिम और प्रमाणित कारण नहीं माना जाना चाहिए।
अब इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की जांच अहम है। जांच एजेंसियों को विवाद की पृष्ठभूमि, घटना के समय की परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिका समेत सभी पहलुओं को साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट करना होगा। अदालत में पेश होने वाले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मामले की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
धरने के बीच नशीले कैप्सूल और चिट्टे को लेकर नया विवाद
परविंदर झोटा के समर्थन में चल रहे धरने के दौरान भी नशे की समस्या को लेकर लोगों की चिंता सामने आई। दावा किया गया कि धरने के बीच एक युवक नशीले कैप्सूल और चिट्टा लेकर पहुंचा था। इस घटना की चर्चा के बाद वहां मौजूद लोगों में नाराजगी बढ़ने की बात कही गई।
धरने में शामिल वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए केवल बयान देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सक्रियता जरूरी है। उनका कहना था कि यदि नशे की समस्या पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है।
कुछ वक्ताओं ने यह चेतावनी भी दी कि यदि नशे की बिक्री नहीं रुकी, तो युवा खुद संगठित होकर कथित तस्करों को पकड़ने के लिए टीमें बनाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई में कानून अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस और संबंधित विभागों को सूचना देना जरूरी है। किसी संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए।
धरने के दौरान उठे मुद्दों से स्पष्ट है कि स्थानीय लोगों के बीच नशे के कारोबार को लेकर असंतोष बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन शिकायतों की जांच किस तरह करता है और नशे की आपूर्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
आरोपी की पत्नी को छह दिन का पुलिस रिमांड
मामले की जांच के बीच आरोपी अश्वनी की पत्नी नीलम को भी पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी के मुताबिक, अदालत ने नीलम को छह दिन के पुलिस रिमांड की अनुमति दी है। पुलिस इस अवधि में उनसे पूछताछ कर मामले से संबंधित जानकारी जुटा सकती है।
रिमांड का उद्देश्य जांच के दौरान जरूरी तथ्यों और संभावित साक्ष्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करना होता है। हालांकि, किसी व्यक्ति को रिमांड पर भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो चुके हैं। उसकी भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा।
इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच भी जारी है। अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि हत्या की जांच के साथ-साथ सामने आ रहे अन्य आरोपों की भी निष्पक्ष पड़ताल की जाए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान न किया जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो सके।
पंजाब बंद के दौरान हुई घटनाओं पर तीन केस दर्ज
एसएसपी वैभव चौधरी ने जानकारी दी कि पंजाब बंद के दौरान मानसा में हुई घटनाओं को लेकर पुलिस ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों की जांच संबंधित घटनाओं और उनमें शामिल लोगों की भूमिका के आधार पर की जाएगी।
परविंदर झोटा की हत्या के बाद परिवार और समर्थकों के बीच न्याय की मांग प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। ऐसे माहौल में पुलिस के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखना और शिकायतों पर उचित कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है। साथ ही, विरोध प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं में भी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जरूरत है।
प्रशासन का कहना है कि सामने आने वाली शिकायतों और आरोपों की जांच कानून के अनुसार की जाएगी। इससे यह स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है कि हत्या का मामला, नशे की कथित बिक्री और बंद के दौरान हुई घटनाएं जांच के अलग-अलग पहलू हो सकते हैं। प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका भी जांच के दायरे में
मानसा की डिप्टी कमिश्नर नवजोत कौर ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर नरेश की भूमिका की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल स्टोर के लाइसेंस और वहां कथित तौर पर बेची जाने वाली दवाओं को लेकर उठे सवालों के बीच संबंधित विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह पता लगाना जरूरी होगा कि दुकान के संचालन और दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदारी निर्धारित करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
फिलहाल, ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर जांच जारी होने की जानकारी सामने आई है। किसी अधिकारी की मिलीभगत को तब तक स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक जांच में उसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य न मिलें।
परिवार के पीछे छूट गए पत्नी, दो छोटे बेटे और माता-पिता
परविंदर झोटा की मौत ने उसके परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है। वह अपने पीछे पत्नी, दो छोटे बेटों और माता-पिता को छोड़ गया है। पिता भीम सिंह की मांग है कि परिवार को जल्द न्याय मिले और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। उनके बयान से बेटे को खोने का दर्द और उसके संघर्ष को लेकर उनकी उम्मीद दोनों झलकती हैं।
आरोपी की दुकान वाली जगह पर लगाए गए पोस्टर पर लिखा संदेश भी लोगों का ध्यान खींच रहा है—’मेरी मौत पर नहीं रोना, मेरी सोच को आगे बढ़ाना।’ इस संदेश को झोटा के समर्थक नशे के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की अपील के रूप में देख रहे हैं।
अब मामले में पुलिस की जांच, आरोपों की पुष्टि और अदालत की कार्यवाही पर सभी की नजरें रहेंगी। परिवार चाहता है कि दोषियों को सजा मिले, जबकि नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे स्थानीय लोगों की मांग है कि कथित अवैध कारोबार पर भी प्रभावी कार्रवाई हो। इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई ही परिवार को न्याय दिलाने तथा लोगों का भरोसा कायम रखने का महत्वपूर्ण रास्ता है।