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आज से चिन्मय अमृत महोत्सव का आगाज, 25 से अधिक देशों के लोग होंगे शामिल; गीता और वेदांत की शिक्षाओं पर रहेगा फोकस

राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 23 अक्टूबर से चिन्मय अमृत महोत्सव की शुरुआत हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 11 बजे भारत मंडपम में आयोजित इस तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे और कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करेंगे। 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में भारत समेत विदेशों से 9,000 से अधिक लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है। यह महोत्सव चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित सालभर के कार्यक्रमों का समापन समारोह है।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और भगवद्गीता के संदेश को याद करना तथा नई पीढ़ी तक उनके विचार पहुंचाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। आयोजन में साधक, आध्यात्मिक शिक्षक, मिशन से जुड़े सदस्य, युवा, पूर्व विद्यार्थी और विभिन्न देशों से आने वाले श्रद्धालु शामिल होंगे। कार्यक्रम के आयोजकों के मुताबिक, यह सम्मेलन मिशन की अब तक की यात्रा पर विचार करने और भविष्य में उसके कार्यों को आगे बढ़ाने का अवसर भी बनेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिभागी एक साथ जुटेंगे। वहीं, चिन्मय मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, इस आयोजन में 25 से अधिक देशों के लोगों के शामिल होने की योजना है। कार्यक्रम में आध्यात्मिक चर्चाओं के साथ वैदिक मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और मिशन की विरासत को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां भी रखी गई हैं।

1951 में हुई थी चिन्मय मिशन की स्थापना

चिन्मय मिशन की शुरुआत वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। इसका उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता में निहित ज्ञान को आम लोगों तक सरल और व्यावहारिक तरीके से पहुंचाना था। भारतीय दर्शन की इन शिक्षाओं में जीवन के उद्देश्य, आत्मज्ञान, कर्तव्य, मन के अनुशासन और आध्यात्मिक विकास जैसे विषयों पर जोर दिया जाता है।

मिशन का काम केवल धार्मिक प्रवचन आयोजित करने तक सीमित नहीं रहा है। समय के साथ इसके माध्यम से आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक गतिविधियों, युवाओं के व्यक्तित्व विकास और समाजसेवा से जुड़े कार्यक्रम भी चलाए गए हैं। मिशन की विभिन्न गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को भारतीय शास्त्रीय परंपराओं से परिचित कराना और उनके विचारों को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ना है।

स्वामी चिन्मयानंद ने भगवद्गीता और वेदांत के विचारों को आधुनिक जीवन की परिस्थितियों के संदर्भ में समझाने पर जोर दिया। उनके अनुयायियों के अनुसार, ज्ञान को केवल पुस्तकों या धार्मिक संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय उसे लोगों के जीवन में उपयोगी बनाना उनके प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए मिशन ने देश के अलग-अलग हिस्सों में केंद्र स्थापित किए और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के लिए कार्यक्रम आयोजित किए।

चिन्मय अमृत महोत्सव इसी लंबी यात्रा की 75वीं वर्षगांठ को समर्पित है। तीन दिनों तक चलने वाला यह सम्मेलन मिशन से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के साथ-साथ उसके संस्थापक की विरासत और शिक्षाओं पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगा।

पिछले साल तमिल भगवद्गीता के विमोचन से शुरू हुआ था उत्सव

चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सालभर के कार्यक्रमों की शुरुआत पिछले साल हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के गंगईकोंडा चोलपुरम में इलैयाराजा के संगीत से जुड़ी तमिल भगवद्गीता का विमोचन किया था। इसी कार्यक्रम को इस वर्षगांठ से जुड़े आयोजनों की शुरुआत के रूप में देखा गया।

इस पहल का उद्देश्य भगवद्गीता के संदेश को भाषा और संगीत के माध्यम से अधिक लोगों तक पहुंचाना था। भारत में अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच धार्मिक एवं दार्शनिक ग्रंथों की शिक्षाओं को प्रस्तुत करने के लिए कई तरह के माध्यमों का उपयोग किया जाता रहा है। तमिल भाषा में गीता की प्रस्तुति भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम थी।

इसके बाद पूरे वर्ष मिशन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें सामूहिक हवन, मंदिर की स्थापना, ऑनलाइन गीता पाठ और युवाओं की देशव्यापी यात्रा जैसी पहलें शामिल रहीं। इन गतिविधियों के जरिए मिशन ने अपने संस्थापक की शिक्षाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

अब दिल्ली में आयोजित होने वाला वैश्विक सम्मेलन इन कार्यक्रमों की अंतिम प्रमुख कड़ी है। इसमें बीते वर्षों के कार्यों और हाल के आयोजनों से मिली सीख को सामने रखने के साथ आगे की गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

तीन दिन के सम्मेलन में क्या-क्या होगा?

भारत मंडपम में आयोजित इस महोत्सव के दौरान आध्यात्मिक विचार-विमर्श, वैदिक मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा। चिन्मय मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सम्मेलन में स्वामी, ब्रह्मचारी, आध्यात्मिक जिज्ञासु, युवा और मिशन से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि प्रतिभागियों को मिशन के इतिहास और उसके आध्यात्मिक कार्यों को करीब से जानने का अवसर मिल सके।

आयोजन में चिन्मय अमृत गंगा नाम की प्रदर्शनी भी महत्वपूर्ण आकर्षण होगी। इसके माध्यम से मिशन की विरासत, स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ी स्मृतियों और उसके विभिन्न कार्यों को प्रदर्शित करने की योजना है। प्रदर्शनी में ऐतिहासिक वस्तुओं और डिजिटल माध्यमों के जरिए जानकारी प्रस्तुत की जाएगी, ताकि नई पीढ़ी भी इस आध्यात्मिक आंदोलन की यात्रा को समझ सके।

इसके अलावा सम्मेलन में वैदिक मंत्रों का सामूहिक उच्चारण, आध्यात्मिक शिक्षकों के संबोधन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। कार्यक्रम में अद्वैत वेदांत पर केंद्रित विशेष चर्चा भी रखी गई है। अद्वैत वेदांत भारतीय दर्शन की एक प्रमुख परंपरा है, जो आत्मा और परम सत्य के संबंध को समझने पर जोर देती है। इस विषय पर होने वाले विचार-विमर्श का उद्देश्य आध्यात्मिक चिंतन को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर देना है।

आयोजकों की ओर से चिन्मय अमृत म्यूजिकल नाम का विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है। इस तरह महोत्सव में धार्मिक और दार्शनिक विषयों के साथ संगीत तथा कला को भी स्थान दिया गया है। आयोजन की विस्तृत जानकारी चिन्मय मिशन के आधिकारिक महोत्सव पोर्टल पर उपलब्ध है।

गीता के 15वें अध्याय का ऑनलाइन सामूहिक पाठ

सालभर चले उत्सव के दौरान भगवद्गीता को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इनमें चिन्मय गीता समर्पण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस पहल के तहत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद एक लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया।

गीता का 15वां अध्याय ‘पुरुषोत्तम योग’ के नाम से जाना जाता है। इसमें संसार, जीव, परमात्मा और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़े विषयों की चर्चा की गई है। इस अध्याय में संसार की तुलना एक ऐसे वृक्ष से की गई है, जिसकी जड़ों और शाखाओं के प्रतीक के माध्यम से जीवन तथा अस्तित्व को समझाने का प्रयास किया गया है।

सामूहिक पाठ जैसी गतिविधियों का उद्देश्य अलग-अलग स्थानों पर रहने वाले लोगों को एक साझा आध्यात्मिक अभ्यास से जोड़ना है। ऑनलाइन माध्यम के इस्तेमाल से इसमें उन लोगों की भागीदारी भी संभव हुई, जो किसी एक स्थान पर पहुंचकर कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकते थे।

मिशन की ओर से गीता के अध्ययन को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित रखने के बजाय उसके विचारों को समझने और जीवन में उतारने पर भी जोर दिया जाता है। भगवद्गीता में कर्तव्य, कर्म, आत्मसंयम और ज्ञान जैसे विषयों पर चर्चा की गई है। यही वजह है कि इसके संदेश को विभिन्न भाषाओं और माध्यमों में प्रस्तुत करने की कोशिशें की जाती रही हैं।

‘गीता पंचामृत’ के जरिए पांच श्लोकों पर जोर

चिन्मय मिशन की वर्षगांठ के दौरान ‘गीता पंचामृत’ नाम की पहल भी चलाई गई। इसका केंद्र भगवद्गीता के पांच चुनिंदा श्लोकों को समझना, याद करना और उनके अर्थ पर विचार करना है। मिशन के कार्यक्रम विवरण के अनुसार, इन श्लोकों का चयन स्वामी तेजोमयानंद और स्वामी स्वरूपानंद ने किया।

भगवद्गीता में कुल 700 श्लोक हैं। ऐसे में पांच श्लोकों पर आधारित अभ्यास का उद्देश्य लोगों को ग्रंथ की शिक्षाओं से परिचित कराने के लिए एक सरल शुरुआत उपलब्ध कराना है। इस पहल में श्लोकों का पाठ करने के साथ उनके अर्थ पर विचार करने और व्यवहार में उनके महत्व को समझने पर ध्यान दिया जाता है।

इस तरह की गतिविधियां उन लोगों के लिए उपयोगी माध्यम बन सकती हैं, जो गीता का अध्ययन शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पूरे ग्रंथ को एक साथ पढ़ना उनके लिए कठिन होता है। चुनिंदा श्लोकों के माध्यम से नियमित अभ्यास और चिंतन को प्रोत्साहित करना इस पहल की प्रमुख विशेषता है।

मिशन की सालगिरह से जुड़े कार्यक्रमों में यह प्रयास गीता के संदेश को सरल और सुलभ बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा रहा। तमिल भाषा में भगवद्गीता की प्रस्तुति से लेकर ऑनलाइन सामूहिक पाठ और गीता पंचामृत तक, इन पहलों में अलग-अलग माध्यमों के जरिए लोगों को जोड़ने का प्रयास किया गया।

40 हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा पर निकले युवा

महोत्सव के दौरान युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए चिन्मय अमृत यात्रा भी आयोजित की गई। इस यात्रा में चिन्मय युवा केंद्र से जुड़े 15 युवाओं ने देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचकर स्वामी चिन्मयानंद के विचारों और भगवद्गीता की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में इस यात्रा के दौरान 40 हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तय किए जाने का उल्लेख है। वहीं, महोत्सव की आधिकारिक वेबसाइट इस यात्रा को 295 दिनों की तीर्थयात्रा के रूप में प्रस्तुत करती है, जो 31 दिसंबर 2025 को पुणे स्थित चिन्मय विभूति से शुरू हुई और 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में अपने समापन बिंदु तक पहुंच रही है। आधिकारिक आयोजन विवरण में भारत के साथ नेपाल और श्रीलंका से होकर गुजरने वाली यात्रा का भी उल्लेख है।

इस यात्रा का उद्देश्य केवल अलग-अलग शहरों तक पहुंचना नहीं था, बल्कि लोगों के साथ संवाद करना, आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग लेना और युवाओं को भारतीय दर्शन से परिचित कराना भी था। यात्रा से जुड़ी गतिविधियों में सार्वजनिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जीवन-मूल्यों पर आधारित संवादों को शामिल किया गया।

यात्रा के साथ ‘टेंपल ऑन व्हील्स’ की अवधारणा भी जुड़ी रही। इसके माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद से संबंधित स्मृतियों और विरासत को विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। मोबाइल प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को मिशन के इतिहास और उसके संस्थापक के योगदान के बारे में जानकारी देना है।

त्रिपुरा में मंदिर की स्थापना भी रही प्रमुख गतिविधि

वर्षगांठ समारोह के दौरान त्रिपुरा में मां सौंदर्या चिन्मयी मंदिर की स्थापना भी प्रमुख आयोजनों में शामिल रही। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर सामूहिक हवन आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों ने उत्सव को केवल दिल्ली में होने वाले सम्मेलन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में भी लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की।

मिशन की वर्षगांठ से जुड़ी गतिविधियों में धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समावेश किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़ने और स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

75 साल की यात्रा के बाद आगे की दिशा पर नजर

चिन्मय अमृत महोत्सव का आयोजन मिशन की 75 वर्षों की यात्रा को याद करने के साथ उसके भविष्य के कार्यों पर विचार करने का अवसर भी है। 1951 में शुरू हुआ यह आंदोलन आज आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण, युवा गतिविधियों और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है।

दिल्ली में होने वाले तीन दिवसीय सम्मेलन में देश और विदेश से आए प्रतिभागियों को एक-दूसरे से मिलने, अनुभव साझा करने और मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। वैदिक मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, अद्वैत वेदांत पर चर्चा और विरासत प्रदर्शनी इस आयोजन के प्रमुख हिस्से होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शुरू होने वाला यह सम्मेलन सालभर चले कार्यक्रमों का समापन करेगा। तमिल भगवद्गीता के विमोचन से शुरू हुई वर्षगांठ की गतिविधियों से लेकर गीता के सामूहिक पाठ, युवाओं की यात्रा और विभिन्न धार्मिक आयोजनों तक, मिशन ने अपनी 75वीं वर्षगांठ को कई माध्यमों से मनाया है।

अब भारत मंडपम में होने वाला महोत्सव इन सभी प्रयासों को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेगा। आयोजन का केंद्रीय विचार स्वामी चिन्मयानंद की विरासत को याद करना और वेदांत तथा भगवद्गीता की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को जारी रखना है।

स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक सूचना और चिन्मय मिशन की वेबसाइट।