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पंजाब विधानसभा में SIR के खिलाफ प्रस्ताव मंजूर, सदन में नशे और कानून-व्यवस्था पर भी तीखी बहस

पंजाब विधानसभा के सत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। सदन में इस प्रक्रिया के विरोध में लाया गया प्रस्ताव पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मताधिकार, चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना जरूरी है और मतदाता सूची में नाम शामिल रहने के अधिकार को लेकर किसी भी नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, पंजाब विधानसभा में SIR के विरोध में प्रस्ताव पारित होना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान केवल SIR ही नहीं, बल्कि नशे की समस्या, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, किसानों के लिए DAP खाद की उपलब्धता और अबोहर के अजय कुमार हत्याकांड में न्याय की मांग जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विधायकों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को सदन की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। वहीं, अजय कुमार के परिजनों ने विधानसभा परिसर के बाहर धरना देकर न्याय की मांग उठाई।

SIR पर मुख्यमंत्री मान ने उठाए सवाल

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि चुनाव में मतदान करने का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के वोट काटे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के चलते करीब 14 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़ा उन्होंने सदन में अपने संबोधन के दौरान रखा।

मान ने कहा कि किसी व्यक्ति का वोट केवल चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी लोकतांत्रिक भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हट जाता है, तो उसे अपने अधिकार के इस्तेमाल में परेशानी हो सकती है। उन्होंने मजदूरों और दूसरे वर्गों के लोगों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि नागरिकों को यह साबित करने के लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए कि उनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया जरूरी है।

चुनावों और केंद्रीय एजेंसियों को लेकर भी लगाए आरोप

बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के चुनावों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर उठने वाले विवादों का समाधान किस तरह किया जा रहा है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के विधानसभा क्षेत्र से संबंधित लगभग 40 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा करते हुए उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

मान ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय राजनीतिक गतिविधियों के बीच केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का संदर्भ देते हुए कहा कि अब पंजाब में भी ED की कार्रवाई शुरू हो गई है। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री ने सदन में अपनी राजनीतिक दलील रखते हुए कीं।

मुख्यमंत्री ने पठानकोट की एक भाजपा नेता से संबंधित कथित बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि 20 हजार वोट कटवाने की बात कही गई थी, जिससे विधायक बनने में मदद मिल सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग की बैठकों के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। मान के अनुसार, आयोग ने अब बैठकों के मिनट्स रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए इस तरह के प्रस्ताव जरूरी हैं और पंजाब ने इस दिशा में पहल की है।

नशे के मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने

विधानसभा के दूसरे दिन कार्यवाही शुरू होते ही नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस विधायकों ने सरकार को घेरने के लिए नारेबाजी की और सदन के बीच में पहुंच गए। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने भी विरोध जताया। दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ने के कारण सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

शून्यकाल के दौरान विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने पंजाब में नशे की समस्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी नशे पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक, भाजपा-अकाली दल के शासन के बाद कांग्रेस सरकार भी इस समस्या को समाप्त करने में सफल नहीं रही। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने के बाद नशे के खिलाफ अभियान चलाने का वादा किया था, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं।

अयाली ने सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से नशीले पदार्थों की आपूर्ति होने का आरोप लगाया। उन्होंने गुजरात से भी नशा आने की बात कही और दावा किया कि नशीली गोलियां खुलेआम बेची जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के कारण लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है और इस मुद्दे पर सदन में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने अयाली से कहा कि उनकी बात सदन के सामने आ चुकी है और अन्य विधायकों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद अयाली ने सदन के बीच में पहुंचकर इस विषय पर बोलने की अनुमति मांगी।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पलटवार करते हुए नशे की समस्या के लिए कांग्रेस और पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अब इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। प्रश्नकाल शुरू होने के बाद भी विरोध जारी रहा। कांग्रेस विधायक बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे, जिसके बाद स्पीकर ने निर्देश दिया कि प्रश्नकाल में निर्धारित विषयों के अलावा अन्य मुद्दे नहीं उठाए जाएं।

सुखपाल खैरा को सदन की शेष अवधि के लिए निलंबित किया गया

हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ कार्रवाई का मामला भी सामने आया। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने खैरा को विधानसभा सत्र की बाकी अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया। चीमा ने आरोप लगाया कि खैरा ने पीठासीन अधिकारी के खिलाफ अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया है।

स्पीकर ने प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा कि खैरा ने सदन की पीठ के निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन किया। इसके बाद उन्हें विधानसभा की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया गया। चीमा ने खैरा के बयानों को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने की बात भी कही। उन्होंने आरोप लगाया कि खैरा दलितों और महिलाओं के संबंध में अनुचित टिप्पणियां करते रहे हैं।

मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने भी कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक विरोध के बाद सदन से बाहर चले जाते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार सरकार की कार्यशैली और प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रही है। इस तरह विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बना रहा।

DAP खाद की उपलब्धता पर सरकार ने दिया जवाब

किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान DAP खाद की उपलब्धता का विषय भी उठा। विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह ने इस संबंध में सवाल किया। कृषि मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य की जरूरत के अनुसार DAP खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर खाद मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता है।

कृषि मंत्री के अनुसार, सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों को DAP के साथ दूसरी खाद जबरन खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से खाद की कमी नहीं होने देने का आश्वासन दिया गया है। खाद की कालाबाजारी और मिलावटी खाद की बिक्री से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की जा रही है।

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से खाद की आपूर्ति में देरी का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। राज्य सरकार केंद्र के समक्ष इस विषय को रख रही है और किसानों के लिए उपलब्धता बनाए रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में DAP खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी।

इस विषय पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के विरोध के जवाब में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। स्पीकर ने विधायकों को शांत रहने और अपनी सीटों पर बैठने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि DAP जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि किसानों से संबंधित सवालों का जवाब दिया जा सके।

अजय कुमार हत्याकांड में परिजनों का विधानसभा के बाहर धरना

विधानसभा के भीतर जारी राजनीतिक बहस के बीच अबोहर के अजय कुमार हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर परिवार का विरोध भी जारी रहा। शुक्रवार को मृतक की मां और अन्य परिजन विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठे। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ समेत पार्टी के कुछ अन्य नेता भी वहां पहुंचे और परिवार की मांगों को समर्थन दिया।

सुनील जाखड़ ने बताया कि अजय कुमार की मां और परिवार के सदस्य इससे पहले गुरुवार को भी न्याय की मांग लेकर विधानसभा के बाहर पहुंचे थे। उनके अनुसार, उस दिन पुलिस ने परिजनों को वहां से हटाया और हिरासत में ले लिया था। इसके बाद परिवार ने शुक्रवार को फिर से धरना दिया।

परिजनों के मुताबिक, अजय कुमार को 27 सितंबर को अबोहर के संत नगर इलाके में गोली मारी गई थी। हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें कई दिनों तक इलाज के लिए अस्पताल में रखा गया। 19 अक्टूबर को उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद से परिवार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा है।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे अबोहर में भी धरना दे रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मृतक का पोस्टमार्टम अब तक नहीं हुआ है। इस मामले को लेकर परिवार की नाराजगी बनी हुई है और वे प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पंजाब विधानसभा का यह सत्र कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा। एक ओर SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई, तो दूसरी ओर नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और किसानों को खाद उपलब्ध कराने जैसे सवाल सदन में उठे। इसी बीच अजय कुमार के परिजनों का धरना भी न्याय और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रही चिंताओं को सामने लाया।