पंजाब के मानसा में परविंदर झोटा को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज होने के संकेत दे रहा है। करीब 15 दिनों से जारी धरने के बीच पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वारिस पंजाब दे से जुड़े नेता लक्खा सिधाना और कई अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों और समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली। इस दौरान लक्खा सिधाना और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प होने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक इस्तीफा नहीं देते, तब तक परविंदर झोटा का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने मानसा में चल रहे धरने को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांगें, पुलिस की कार्रवाई और दलजीत सिंह की मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मामले में तनाव बढ़ गया है। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सख्ती के जरिए आवाज दबाने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ, पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने एक युवक की मौत के मामले को लेकर प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, जिसके चलते कार्रवाई करनी पड़ी।
धरनास्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस
परविंदर झोटा को न्याय दिलाने की मांग के साथ मानसा में पिछले 15 दिनों से धरना दिया जा रहा है। इसी दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए कार्रवाई की। हिरासत में लिए गए लोगों में लक्खा सिधाना के अलावा मोहनजीत शेरो और अन्य प्रदर्शनकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने मोहनजीत शेरो को गांव भम्मे कलां से हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें कहां ले जाया गया, इस बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई।
कार्रवाई के दौरान लक्खा सिधाना और पुलिस के बीच कहासुनी के बाद झड़प होने की बात भी सामने आई है। पुलिस प्रदर्शन से जुड़े लोगों को अपने साथ ले गई। इस कार्रवाई को लेकर आंदोलनकारियों ने सवाल उठाए और इसे अनुचित बताते हुए विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे परविंदर झोटा के मामले में इंसाफ की मांग कर रहे हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। दूसरी तरफ, पुलिस प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की गतिविधियों से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा हुई थी। इसी आधार पर हिरासत में लेने की कार्रवाई की गई।
दलजीत सिंह की मौत को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे
इस विवाद के बीच गांव भम्मे कलां के युवक दलजीत सिंह की मौत का मामला भी महत्वपूर्ण हो गया है। पुलिस ने धरनास्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई के पीछे दलजीत सिंह की मौत को लेकर हो रहे प्रदर्शन और माहौल खराब करने की आशंका को वजह बताया है।
मानसा के पुलिस अधीक्षक वैभव चौधरी के अनुसार, धरना सामान्य रूप से शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन कुछ लोगों ने दलजीत सिंह की मौत को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए स्थिति को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि दलजीत सिंह की मौत नशे की ओवरडोज के कारण नहीं हुई है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मामला रंजिश या हत्या से जुड़ा हो सकता है और इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस के इस बयान के बाद मामले में मौत के कारणों को लेकर चर्चा और बढ़ गई है। हालांकि, पुलिस ने अभी जांच जारी होने की बात कही है। ऐसे में मौत के पीछे की वास्तविक वजह और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस अधीक्षक ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने दलजीत सिंह के शव का इस्तेमाल करके माहौल खराब करने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, शव को जिले से बाहर रखवाया गया है। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लेने की जानकारी भी दी है। फिलहाल जांच एजेंसियां घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं।
सरकार और पुलिस पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए सीपीआई-एमएल लिबरेशन, इंसाफ कमेटी और परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह ने इसे सरकार तथा पुलिस की मनमानी करार दिया है। उनका आरोप है कि आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उन्हें हिरासत में लेकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो विरोध प्रदर्शन और व्यापक रूप ले सकता है। उनके मुताबिक, यह लड़ाई केवल धरने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इंसाफ की मांग को लेकर जन आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को पूरे मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए और उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। हिरासत में लिए गए नेताओं और अन्य लोगों के बारे में जानकारी नहीं मिलने से भी आंदोलनकारियों की चिंता बढ़ी है। पुलिस उन्हें अज्ञात स्थान पर ले गई है, जिसके बाद उनके समर्थक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास के रूप में पेश किया गया है। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसा कदम उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे इलाके में तनाव बढ़े या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो।
अंतिम संस्कार को लेकर अड़े परविंदर झोटा के पिता
परविंदर झोटा के मामले में धरने की सबसे अहम बात यह है कि परिवार और प्रदर्शनकारी अंतिम संस्कार को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं। झोटा के पिता भीम सिंह ने दोहराया है कि मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे के साथ-साथ अन्य मांगों को लिखित रूप में स्वीकार किए जाने का प्रमाण मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
परिवार का कहना है कि केवल आश्वासन देने से उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी। वे चाहते हैं कि सरकार और संबंधित अधिकारी उनकी मांगों पर लिखित जवाब दें। इसी वजह से धरने को समाप्त करने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर फिलहाल सहमति नहीं बन पाई है।
इस रुख के चलते प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। एक ओर पुलिस कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी कार्रवाई का बचाव कर रही है, तो दूसरी तरफ आंदोलनकारी इसे अपने अधिकारों और इंसाफ की मांग से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच आगे बातचीत होती है या नहीं, इस पर भी स्थिति निर्भर करेगी।
15वें दिन भी जारी रहा विरोध प्रदर्शन
मंगलवार को मानसा में धरने का 15वां दिन रहा। लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन के कारण शहर में आवागमन को लेकर भी परेशानी सामने आई थी। स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए धरनास्थल पर एक रास्ता यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके बाद यातायात बहाल होने की जानकारी सामने आई।
रास्ता खोलने के फैसले से आम लोगों को राहत मिली, लेकिन इससे धरने की मूल मांगों पर कोई बदलाव नहीं आया। प्रदर्शनकारी अब भी परविंदर झोटा के मामले में इंसाफ, सरकार और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तथा अपनी अन्य मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
धरने के दौरान शहर के लोगों की सुविधा और आंदोलन के जारी रहने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जबकि प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
सीबीआई जांच से जुड़ी गतिविधियों पर भी नजर
इस घटनाक्रम के बीच मामले से संबंधित सीबीआई जांच को लेकर भी जानकारी सामने आई है। मंगलवार को सीबीआई की कोई गतिविधि दिखाई नहीं दी। वहीं, मामले में आरोपी अश्वनी कुमार की पत्नी नीलम रानी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की सूचना है।
इस पहलू को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस दलजीत सिंह की मौत के मामले की जांच कर रही है और हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में भी आगे की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
मानसा में जारी इस विवाद में अब कई मुद्दे एक साथ जुड़ गए हैं। परविंदर झोटा के लिए इंसाफ की मांग, दलजीत सिंह की मौत की जांच, पुलिस की कार्रवाई और मुख्यमंत्री तथा पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे की मांग ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है।
फिलहाल आंदोलनकारी धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं। दूसरी तरफ, पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का पक्ष रखा है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत, जांच की प्रगति और हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।