उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुई मतगणना के दौरान अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की स्थिति सामने आई। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल कई सीटों पर आगे दिखाई दिए, जबकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। बिहार में जन सुराज के उम्मीदवार ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। वहीं, कुछ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत रखी।
मतगणना मंगलवार सुबह 8 बजे शुरू हुई थी। शाम करीब 9 बजे तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवार कुल मिलाकर लगभग 16 सीटों पर आगे चल रहे थे। समाजवादी पार्टी तीन सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी, जबकि जन सुराज एक सीट पर आगे था। इसके अलावा चार सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को बढ़त मिली हुई थी। चार अन्य सीटों पर उस समय तक रुझान स्पष्ट नहीं हुए थे।
इन चुनावों में उत्तर प्रदेश और बिहार के नतीजों पर विशेष ध्यान रहा। उत्तर प्रदेश में सपा के उम्मीदवारों ने तीन सीटों पर बढ़त बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बनाया, जबकि बिहार में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों में अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को सफलता मिली।
बिहार में चार शिक्षक सीटों के नतीजे घोषित
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम सामने आ गए। इनमें पटना, तिरहुत, सारण और दरभंगा की सीटें शामिल हैं। घोषित परिणामों में राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय जनता पार्टी, निर्दलीय प्रत्याशी और जन सुराज के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार डॉ. संजीव ने जीत हासिल की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1,057 मतों के अंतर से हराया। इस सीट पर मुकाबले के बाद राजद उम्मीदवार को विजेता घोषित किया गया।
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के नरेंद्र सिंह ने सफलता हासिल की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 600 वोटों से पराजित किया। इस परिणाम के साथ भाजपा को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एक सीट मिली।
सारण शिक्षक सीट पर मुकाबले का परिणाम दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद सामने आया। यहां भाजपा के बागी उम्मीदवार राहुल राज निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर 1,815 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय विजयी रहे। इस सीट पर उनकी जीत पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रही। बिहार की इन चार सीटों के परिणामों ने यह दिखाया कि विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला केवल प्रमुख राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी निर्णायक भूमिका निभाई।
चार राज्यों में MLC चुनाव के नतीजों से बदली तस्वीर, कर्नाटक में NDA का प्रदर्शन, बिहार में जन सुराज की एंट्री
चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों के लिए हुई चुनावी प्रक्रिया के नतीजे अब धीरे-धीरे साफ होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में 23 अक्टूबर को मतदान कराया गया था, जबकि मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हुई। इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल थीं। चुनाव के नतीजों में भाजपा, उसके सहयोगी दलों, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जन सुराज और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला देखने को मिला।
शुरुआती जानकारी में भाजपा और उसके सहयोगियों को कई सीटों पर बढ़त मिली थी। हालांकि, मतगणना आगे बढ़ने के साथ कुछ सीटों पर अंतिम नतीजे भी घोषित किए गए। बिहार में जन सुराज के उम्मीदवार की जीत विशेष रूप से चर्चा में रही, क्योंकि इससे पार्टी को विधान परिषद में पहली बार प्रतिनिधित्व मिला। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने भी कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा को चुनौती दी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन चुनावों के तहत उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 सीटों पर मतदान हुआ था। मतदान के बाद मतपत्रों की गिनती में समय लगा और कई जगहों पर परिणाम देर शाम तक सामने आते रहे।
बिहार में जन सुराज ने दर्ज की पहली जीत
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम घोषित हुए। इनमें पटना, तिरहुत, सारण और दरभंगा शामिल हैं। इन चार सीटों पर राजद, भाजपा, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज के उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य मदन मोहन झा को 324 मतों से हराया। इस जीत के साथ प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को बिहार विधान परिषद में पहली सफलता मिली। पार्टी के लिए यह परिणाम इसलिए अहम रहा, क्योंकि वह राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल के डॉ. संजीव कुमार ने जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से पराजित किया। इस परिणाम के साथ पटना शिक्षक सीट पर राजद को सफलता मिली।
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह विजयी रहे। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार भूषण झा को हराया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र प्रसाद सिंह को 2,945 वोट मिले, जबकि भूषण झा के खाते में 2,351 मत आए। इस तरह भाजपा उम्मीदवार ने 594 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम भी खास रहा। यहां भाजपा से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे राहुल राज ने जीत हासिल की। दूसरी वरीयता के मतों की गणना के बाद उन्हें 1,815 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया। इस नतीजे ने दिखाया कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय प्रत्याशी भी राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को चुनौती देने की स्थिति में रहे।
चारों शिक्षक सीटों के परिणामों में अलग-अलग दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को सफलता मिली। बिहार की बाकी चार सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की थीं, जिनकी मतगणना भी चुनावी नतीजों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव हुआ। इनमें पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। चुनाव के दौरान भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला प्रमुख रहा। मतगणना के समय शुरुआती रुझानों में भाजपा कई सीटों पर आगे दिखाई दी, जबकि सपा ने भी कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त बनाई।
मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के दिनेश कुमार गोयल ने जीत दर्ज की। वहीं, मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के श्रीचंद शर्मा विजयी रहे। इन दोनों परिणामों से भाजपा को मेरठ में सफलता मिली।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की। इस परिणाम ने उत्तर प्रदेश में सपा की मौजूदगी को भी रेखांकित किया। चुनाव के दौरान मतगणना की प्रक्रिया को लेकर कुछ स्थानों पर राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए। सपा की ओर से निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करने की मांग भी की गई थी।
उत्तर प्रदेश में मतगणना के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। अलग-अलग जिलों में मतपत्रों की गिनती कराई गई। मतदान के दौरान कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे। ऐसे में मतगणना के दौरान प्रशासन की निगरानी और चुनावी प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों की नजर बनी रही।
इन चुनावों को उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, हालांकि विधान परिषद के इन निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। यहां स्नातक, शिक्षक और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पात्र मतदाता मतदान करते हैं।
कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन को सफलता
कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों पर चुनाव हुआ। यहां भाजपा और जनता दल-सेक्युलर के गठबंधन का मुकाबला कांग्रेस से था। चुनावी परिणामों में गठबंधन को सफलता मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत हासिल की, जिनमें भाजपा के हिस्से तीन और जेडीएस के हिस्से एक सीट आई।
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा सदस्य पुट्टन्ना को हराया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 मत प्राप्त हुए। इस तरह जेडीएस उम्मीदवार ने 908 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के शशिल जी. नमोशी ने जीत दर्ज की। इसके अलावा भाजपा को अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी सफलता मिली। कर्नाटक में इन नतीजों को कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस गठबंधन के बीच राजनीतिक मुकाबले के संदर्भ में देखा गया।
महाराष्ट्र की पांच सीटों पर रही नजर
महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के लिए चुनाव कराया गया। इनमें पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पुणे और अमरावती के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। इन सीटों पर भाजपा, महायुति के सहयोगी दलों और विपक्षी दलों के उम्मीदवार मैदान में थे।
मतगणना के शुरुआती दौर में सत्ताधारी महायुति गठबंधन के उम्मीदवार कुछ सीटों पर आगे दिखाई दिए। हालांकि, अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबले की स्थिति एक जैसी नहीं थी। कुछ सीटों पर विपक्षी उम्मीदवार भी बढ़त बनाए हुए थे। इसलिए शुरुआती रुझानों को अंतिम नतीजा मानना सही नहीं था।
महाराष्ट्र में इन चुनावों के लिए कुल 182 उम्मीदवार मैदान में थे। यहां पांच सीटों के परिणामों को लेकर राजनीतिक दलों की नजर बनी रही। मतपत्रों की गिनती और निर्वाचन क्षेत्रवार मतों के मिलान के कारण परिणामों में समय लगा।
मतगणना में देरी की वजह क्या रही?
चारों राज्यों में मतगणना की प्रक्रिया सामान्य विधानसभा चुनावों की तुलना में अलग रही, क्योंकि इन चुनावों में मतपत्रों का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरी वरीयता के मतों की गणना भी जरूरी थी। सारण शिक्षक सीट पर राहुल राज की जीत इसका उदाहरण रही, जहां दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर परिणाम तय हुआ।
बिहार में आठ सीटों के लिए 150 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इनमें चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल थीं। उत्तर प्रदेश में 11 सीटों के लिए मतगणना हुई, जबकि महाराष्ट्र में पांच और कर्नाटक में चार सीटों पर चुनावी नतीजे सामने आए।
इन चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को कई निर्वाचन क्षेत्रों में सफलता मिली, लेकिन विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अलग-अलग जगह जीत दर्ज की। बिहार में जन सुराज की पहली विधान परिषद जीत, उत्तर प्रदेश में सपा की वाराणसी सीट पर सफलता और कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन के नतीजे इस चुनावी प्रक्रिया के प्रमुख घटनाक्रम रहे।