बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्नब ने देश के कई हिस्सों में मौसम की स्थिति बदल दी है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, चक्रवात के प्रभाव से पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को भी कई क्षेत्रों में खराब मौसम का सामना करना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और आसपास के इलाकों में मौसम को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है।
चक्रवात से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में आंध्र प्रदेश का तटीय हिस्सा शामिल है। यहां लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। ओडिशा में भी भारी बारिश की आशंका को देखते हुए कई जिलों में एहतियाती कदम उठाए गए हैं। स्कूल बंद रखने और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने जैसे फैसले लिए गए हैं।
आंध्र प्रदेश में तूफान से भारी नुकसान, हजारों लोग विस्थापित
चक्रवात अर्नब के तट से गुजरने के दौरान आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। मौसम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तटीय और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में लगभग 57 हजार लोगों को राहत शिविरों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
तूफान के प्रभाव से कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए और सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ। कुछ इलाकों में मकानों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। लगातार बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में पानी भरने की आशंका बढ़ गई, जिससे राहत एवं बचाव दलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के अधिकारियों के अनुसार, चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में राज्य में तीन लोगों की मौत की सूचना सामने आई थी। शुरुआती रिपोर्टों में 31 मकानों के क्षतिग्रस्त होने का भी उल्लेख किया गया। नुकसान का वास्तविक आकलन राहत कार्यों और प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं
चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दस्तक देते समय काफी तेज हवाओं के साथ बारिश कराई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तटों पर चक्रवात का प्रभाव दर्ज किया गया। इस दौरान हवा की लगातार रफ्तार लगभग 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि कुछ झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान था।
तेज हवाओं के कारण पेड़ों और बिजली के खंभों के गिरने से स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति और सड़क यातायात बाधित हो सकता है। तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति भी खराब रही। प्रशासन ने लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी।
तट से गुजरने के बाद चक्रवात की तीव्रता में कमी आने की जानकारी दी गई। हालांकि, इसके कमजोर पड़ने का अर्थ यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। चक्रवात के बाद होने वाली भारी बारिश, जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां भी लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं।
ओडिशा के 16 जिलों में स्कूल बंद, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
आंध्र प्रदेश के पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी चक्रवात के कारण मौसम खराब बना हुआ है। कई क्षेत्रों में भारी बारिश होने और तेज हवाएं चलने की आशंका के बीच प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। उपलब्ध खबरों के अनुसार, राज्य के 16 जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया, ताकि बच्चों और शिक्षकों को खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा न करनी पड़े।
राज्य में करीब 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की सूचना भी दी गई है। तटीय इलाकों के साथ-साथ निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लगातार बारिश होने की स्थिति में जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
ओडिशा में राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों को जल्द सहायता मिल सके। लोगों से कहा गया है कि वे समुद्र के किनारे जाने, जलभराव वाली सड़कों से गुजरने और कमजोर संरचनाओं के आसपास रुकने से बचें।
मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार, चक्रवात का असर केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकता। भारी बारिश के कारण राज्य के अंदरूनी हिस्सों में भी सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना
चक्रवात अर्नब का प्रभाव पूर्वी भारत से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश और बिहार के मौसम पर भी पड़ सकता है। मौसम विभाग के 29 अक्टूबर के पूर्वानुमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक और तेज हवाओं से जुड़ी मौसमी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
बारिश के दौरान बिजली गिरने और तेज हवा चलने का खतरा भी बना रह सकता है। ऐसे में खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी स्थानीय मौसम संबंधी सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
बिहार में भी कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ आंधी और बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। लगातार वर्षा होने पर निचले इलाकों में पानी जमा हो सकता है और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है।
दोनों राज्यों में रहने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी प्राप्त करें। यदि किसी जिले में प्रशासन की ओर से विशेष चेतावनी जारी की जाती है, तो उसका पालन करना जरूरी है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी बदलेगा मौसम
चक्रवात के प्रभाव से मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसमी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इसके अलावा गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। बारिश का असर स्थानीय यातायात, खेती और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है।
राजस्थान में भी मौसम पूरी तरह सामान्य रहने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पूरे राज्य में एक जैसी बारिश नहीं होती। किसी क्षेत्र में भारी वर्षा की संभावना हो सकती है, जबकि दूसरे इलाके में केवल बादल, हल्की बारिश या गरज-चमक देखने को मिले। इसलिए जिले के हिसाब से जारी मौसम पूर्वानुमान को देखना अधिक उपयोगी रहेगा।
मौसम में अचानक बदलाव होने पर लोगों को खुले स्थानों में काम करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित इमारत में रहना और तेज हवाओं के बीच कमजोर पेड़ों या अस्थायी ढांचों के पास खड़े होने से बचना जरूरी है।
चक्रवात कमजोर हुआ, लेकिन भारी बारिश का खतरा बरकरार
चक्रवात अर्नब के तट से गुजरने के बाद उसकी तीव्रता में कमी आने की सूचना है। फिर भी मौसम विशेषज्ञों के लिए अगले कुछ घंटों और दिनों में बारिश की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। चक्रवाती प्रणाली कमजोर होने के बाद भी उसके प्रभाव से नमी वाली हवाएं और बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
भारी बारिश का असर केवल जलभराव तक सीमित नहीं रहता। नदियों और नालों में पानी का स्तर बढ़ने, कमजोर मकानों को नुकसान पहुंचने, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जिन इलाकों में पहले से जमीन में नमी अधिक है, वहां अतिरिक्त बारिश के कारण पानी जमा होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए जरूरी है कि वे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी जारी रखें। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार रखी जाए। नागरिकों को भी अफवाहों से बचते हुए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।
खराब मौसम में इन बातों का रखें ध्यान
बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के बीच लोगों को कुछ बुनियादी सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे पहले, मौसम विभाग की ताजा जानकारी और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर नजर रखें। समुद्र के किनारे जाने या खराब मौसम में नाव से यात्रा करने से बचें। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान में न रुकें और पेड़ों के नीचे शरण न लें।
सड़कों पर पानी जमा होने की स्थिति में अनजान रास्तों से गुजरने से बचें। जलभराव वाली सड़क पर पानी की गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन न चलाएं। यदि तेज हवा के कारण पेड़ या बिजली के तार गिर जाएं, तो उनसे दूरी बनाए रखें और संबंधित विभाग को सूचना दें।
चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को जरूरी दवाइयां, पीने का पानी, टॉर्च और मोबाइल फोन चार्ज रखने जैसे छोटे लेकिन उपयोगी इंतजाम करने चाहिए। आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।
फिलहाल आंध्र प्रदेश और ओडिशा में राहत कार्य तथा मौसम की निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। अलग-अलग जिलों में मौसम की स्थिति बदल सकती है, इसलिए किसी एक सामान्य पूर्वानुमान के बजाय अपने क्षेत्र के लिए जारी नवीनतम चेतावनी को प्राथमिकता दें।