देशभर में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच निर्वाचन आयोग ने छह राज्यों में प्रक्रिया से जुड़ी समयसीमा में बदलाव किया है। महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नगालैंड में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है। आयोग ने यह निर्णय संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की ओर से मिले अनुरोधों के आधार पर लिया है। इस बदलाव से मतदाताओं को अपने नाम से जुड़ी जानकारी की जांच करने, दावे प्रस्तुत करने और गलतियों को ठीक कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल उठाए गए हैं। बुधवार को दिल्ली में SIR से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पूछा था कि जब फिलहाल चुनाव होने वाले नहीं हैं, तो इस प्रक्रिया को इतनी तेजी से पूरा करने की जरूरत क्यों है। अदालत की इस टिप्पणी के अगले ही दिन आयोग ने छह राज्यों के कार्यक्रम में संशोधन किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समयसीमा बढ़ाने का औपचारिक आधार संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध हैं।
दिल्ली में दावे दाखिल करने के लिए अब 25 नवंबर तक का समय
चुनाव आयोग के नए कार्यक्रम के अनुसार, दिल्ली में मतदाता सूची के मसौदे को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख में बदलाव किया गया है। पहले मतदाताओं को इसके लिए 30 अक्टूबर तक का समय दिया गया था, लेकिन अब वे 25 नवंबर तक अपने दावे और आपत्तियां जमा कर सकेंगे। इस तरह लोगों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहले की तुलना में लगभग चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मिलेगा।
दिल्ली में केवल दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा ही नहीं बढ़ाई गई है, बल्कि उनके निपटारे के लिए भी अधिक समय निर्धारित किया गया है। पहले इस प्रक्रिया को 30 नवंबर तक पूरा किया जाना था, लेकिन संशोधित कार्यक्रम के तहत अब दावों और आपत्तियों का निपटारा 15 दिसंबर तक किया जाएगा।
इन बदलावों का असर अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख पर भी पड़ेगा। दिल्ली में अब अंतिम सूची 22 दिसंबर को जारी की जाएगी। इससे पहले इसके प्रकाशन के लिए अलग तारीख निर्धारित थी। नई समयसीमा के तहत निर्वाचन अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों की जांच करने और आवश्यक सुधारों को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
महाराष्ट्र में भी बढ़ी समयसीमा, 30 नवंबर को आएगी अंतिम सूची
महाराष्ट्र में भी SIR के तहत मतदाता सूची में सुधार से संबंधित कार्यक्रम को संशोधित किया गया है। राज्य में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख पहले 26 अक्टूबर तय की गई थी। अब इसे बढ़ाकर 13 नवंबर कर दिया गया है। इसका मतलब है कि जिन मतदाताओं को मसौदा सूची में किसी प्रकार की गलती दिखाई देती है या जिनके नाम से संबंधित कोई आपत्ति अथवा दावा है, उन्हें निर्धारित नियमों के तहत अपनी बात रखने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
राज्य में नोटिस जारी करने, संबंधित मामलों की जांच करने और दावों का निपटारा करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। अब यह काम 25 नवंबर तक किया जा सकेगा। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
महाराष्ट्र में मतदाता सूची की मसौदा प्रति 31 अगस्त को जारी की गई थी। पहले दावों और आपत्तियों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए 10 नवंबर तक का समय तय था। संशोधित कार्यक्रम के कारण अधिकारियों को लंबित मामलों की जांच के लिए अधिक समय मिलेगा। मतदाताओं के लिहाज से भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि मसौदा सूची में दर्ज जानकारी की पुष्टि करना और जरूरत पड़ने पर सुधार के लिए आवेदन करना इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
आंध्र प्रदेश, हरियाणा, नगालैंड और तेलंगाना में क्या बदला?
निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र और दिल्ली के अलावा चार अन्य राज्यों में भी SIR का कार्यक्रम संशोधित किया है। इनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा, नगालैंड और तेलंगाना शामिल हैं। इन राज्यों में नोटिस जारी करने तथा दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए अलग-अलग अंतिम तारीखें निर्धारित की गई हैं।
आंध्र प्रदेश और हरियाणा में संबंधित प्रक्रिया अब 20 नवंबर तक चलेगी। नगालैंड में इसके लिए 25 नवंबर तक का समय निर्धारित किया गया है, जबकि तेलंगाना में यह अवधि 26 नवंबर को समाप्त होगी।
इन चारों राज्यों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने के लिए 30 नवंबर की तारीख रखी गई है। इस प्रकार, अलग-अलग राज्यों में दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा अलग होने के बावजूद अंतिम सूची जारी करने की तारीख समान रखी गई है।
गौरतलब है कि SIR के कार्यक्रम में इससे पहले भी विभिन्न कारणों से बदलाव किए जा चुके हैं। इस बार भी छह राज्यों में समयसीमा बढ़ाने का निर्णय संबंधित अधिकारियों के अनुरोध के बाद लिया गया है। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने राज्य के निर्वाचन विभाग की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आवेदन और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करें।
तीसरे चरण में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा अभियान
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाई जा रही है। इसके तीसरे चरण के अंतर्गत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान चल रहा है। इस व्यापक कवायद के दौरान लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जाना है।
तीसरे चरण में शामिल राज्यों में हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड और दिल्ली जैसे राज्य भी हैं। अभियान का उद्देश्य मतदाता सूचियों में दर्ज नामों और संबंधित विवरणों की जांच करना तथा रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना है।
इस प्रक्रिया के तहत निर्वाचन तंत्र को मतदाताओं से संबंधित जानकारी की पुष्टि करनी होती है। इसके साथ ही सूची में मौजूद त्रुटियों की पहचान और निर्धारित नियमों के अनुसार जरूरी सुधार भी किए जाते हैं। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसके माध्यम से मतदाता मसौदा सूची में मौजूद कमियों की ओर अधिकारियों का ध्यान दिला सकते हैं।
आयोग की ओर से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले और दूसरे चरण में 10 राज्यों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इन दोनों चरणों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इससे अभियान का दायरा स्पष्ट होता है कि यह केवल कुछ राज्यों तक सीमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा है।
तीसरे चरण के बाद किन इलाकों में बाकी रहेगा SIR?
निर्वाचन आयोग की योजना के मुताबिक, SIR का तीसरा चरण पूरा होने के बाद देश के अधिकांश हिस्सों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। हालांकि, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में इस अभियान का कार्यक्रम अभी घोषित किया जाना बाकी है।
इन तीनों क्षेत्रों में SIR की समयसीमा और कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खराब मौसम और जनगणना से संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वहां का शेड्यूल अलग से तय किया जाएगा।
इस तरह तीसरे चरण के पूरा होने के बाद भी इन क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम शेष रहेगा। आयोग को वहां की परिस्थितियों के अनुरूप कार्यक्रम तय करना होगा, ताकि प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सके।
तीसरे चरण में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मतदाताओं की संख्या में भी बड़ा अंतर है। महाराष्ट्र में इस चरण के अंतर्गत आने वाले राज्यों में सबसे अधिक मतदाता हैं। दूसरी ओर, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में मतदाताओं की संख्या सबसे कम बताई गई है। इससे स्पष्ट है कि अभियान के दौरान निर्वाचन अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में मतदाता संख्या और स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से काम करना पड़ रहा है।
बिहार से शुरू हुआ था अभियान, पहले दो चरणों में 59 करोड़ मतदाता शामिल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को देशव्यापी स्तर पर कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को आदेश जारी किया था। इसके बाद अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
पहले चरण में बिहार को शामिल किया गया था, जहां सबसे पहले SIR की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद दूसरे चरण में 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभियान चलाया गया। आयोग के मुताबिक, पहले दो चरणों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं को इस प्रक्रिया के दायरे में लाया गया।
इस व्यापक अभियान में जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भी भूमिका रही। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पहले दो चरणों के दौरान लगभग 6.3 लाख बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और 9.2 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) प्रक्रिया में शामिल हुए थे।
BLO मतदाता सूची से जुड़े सत्यापन और अन्य निर्धारित कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त BLA भी मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में भाग लेते हैं। इतने बड़े स्तर पर कर्मचारियों और प्रतिनिधियों की भागीदारी इस अभियान के व्यापक स्वरूप को दर्शाती है।
आखिर क्या है SIR और मतदाता सूची में क्यों जरूरी है संशोधन?
SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है। यह निर्वाचन आयोग की ओर से संचालित ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से मतदाता सूची की विस्तार से जांच की जाती है। इसका प्रमुख उद्देश्य सूची में पात्र मतदाताओं के नाम और उनके विवरण को सही बनाए रखना है।
इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन किया जाता है। यदि किसी प्रविष्टि में गलती मिलती है या किसी नाम के संबंध में दावा अथवा आपत्ति सामने आती है, तो उसकी जांच निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है। इस तरह मतदाता सूची को अद्यतन करने का प्रयास किया जाता है, ताकि उसमें सही जानकारी दर्ज रहे।
भारत में लगभग 21 साल के अंतराल के बाद देशव्यापी स्तर पर इस तरह का व्यापक विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इससे पहले देशभर में ऐसा अभियान 2002 से 2004 के बीच चलाया गया था। आयोग ने यह भी बताया था कि देश में SIR की प्रक्रिया आठवीं बार आयोजित की जा रही है।
मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा होती है। इसलिए उसमें दर्ज नामों और विवरणों की सटीकता महत्वपूर्ण है। हालांकि, पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के लिए यह भी जरूरी है कि वे मसौदा सूची में अपना नाम और अन्य जानकारी जांचें तथा किसी गलती की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।
छह राज्यों में समयसीमा बढ़ाने के फैसले से मतदाताओं और निर्वाचन अधिकारियों को SIR से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। दिल्ली में अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को जारी होगी, जबकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, नगालैंड और तेलंगाना में अंतिम सूची के प्रकाशन के लिए 30 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है। आने वाले दिनों में इस अभियान की प्रगति और शेष क्षेत्रों के कार्यक्रम पर नजर रहेगी।