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चंडीगढ़ से अमित शाह का कांग्रेस पर बड़ा हमला, 1984 के सिख नरसंहार की बरसी पर रैली को लेकर उठाए सवाल; पंजाब में NDA सरकार बनाने का किया दावा

चंडीगढ़ के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई अहम राजनीतिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर दिल्ली में आयोजित रैली को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जानबूझकर ऐसे दिन राजनीतिक कार्यक्रम रखा, जो हजारों सिख परिवारों के लिए बेहद दुखद और संवेदनशील है। उनके मुताबिक, जिस तारीख से सिख समुदाय के लोगों की दर्दनाक यादें जुड़ी हुई हैं, उसी दिन बड़े स्तर पर राजनीतिक आयोजन करना पीड़ितों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।

इस कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने चंडीगढ़ के विकास के लिए करीब 258 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। उन्होंने शहर की परिवहन व्यवस्था, पुलिस कर्मचारियों के आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके अलावा उन्होंने पंजाब की राजनीति को लेकर भी बड़ा बयान दिया और राज्य में आने वाले समय में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनाने का संकल्प दोहराया।

पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए तय किया लक्ष्य

अमित शाह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे देश को नशे से मुक्त करना है। इसके लिए 31 दिसंबर 2029 तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। शाह ने पंजाब की जनता से अपील की कि वह राज्य को नशे की समस्या से बाहर निकालने के प्रयासों में सहयोग करे।

उन्होंने कहा कि पंजाब में एनडीए की सरकार बनाने के लिए पार्टी पूरी ताकत लगाएगी। शाह ने कार्यकर्ताओं और प्रदेश की जनता से आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उनके इस बयान को पंजाब में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। चंडीगढ़ में दिए गए इस बयान के जरिए उन्होंने राज्य में कांग्रेस को चुनौती देने का भी प्रयास किया।

1984 की यादों को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

कार्यक्रम में अमित शाह का सबसे तीखा हमला कांग्रेस की दिल्ली रैली को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि 1, 2 और 3 नवंबर की तारीखें सिख समुदाय के इतिहास में बेहद दर्दनाक घटनाओं से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 1984 में इन दिनों सिख विरोधी हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और कई लोगों को लंबे समय तक उस हिंसा का दर्द झेलना पड़ा।

शाह ने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में कांग्रेस को किसी बड़े राजनीतिक आयोजन से बचना चाहिए था। भाजपा की ओर से पहले ही इस संबंध में कांग्रेस से अपील की गई थी। उन्होंने बताया कि पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भी कांग्रेस नेतृत्व से अनुरोध किया था कि 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में कोई बड़ी रैली या राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित न किया जाए।

गृह मंत्री के अनुसार, भाजपा ने कांग्रेस को याद दिलाया था कि इन तारीखों का सिख परिवारों के लिए क्या महत्व है। इसके बावजूद कांग्रेस ने रामलीला मैदान में रैली करने का फैसला लिया। शाह ने कहा कि यह फैसला उन परिवारों के पुराने जख्मों को दोबारा ताजा करने जैसा है, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनों को गंवाया था।

राजीव गांधी के पुराने बयान का भी किया जिक्र

अमित शाह ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान को भी याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। शाह ने इस बयान का संदर्भ देते हुए कांग्रेस की मौजूदा राजनीति पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के शासनकाल में 1984 की हिंसा हुई, उसे इस त्रासदी से जुड़ी तारीखों के प्रति विशेष संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने भाजपा की अपील को गंभीरता से नहीं लिया और अपनी राजनीतिक योजना के अनुसार उसी दिन कार्यक्रम आयोजित किया।

शाह ने कहा कि पंजाब और देश के लोग 1984 की घटनाओं को भुला नहीं सकते। यह केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा है, जिन्होंने उस दौरान असहनीय नुकसान उठाया। उन्होंने गुरुओं की धरती से कांग्रेस के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को पीड़ित समुदाय की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

राहुल गांधी की रैली और मॉक पार्लियामेंट पर भी टिप्पणी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए अमित शाह ने उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर तंज कसा। उन्होंने इंडिया गठबंधन के आह्वान पर दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली और मॉक पार्लियामेंट का जिक्र किया।

शाह ने कहा कि राहुल गांधी अगर देश के प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं तो उन्हें इस तरह के कार्यक्रम करते रहना चाहिए, लेकिन इससे उनकी प्रधानमंत्री बनने की संभावना पूरी नहीं होगी। उन्होंने राहुल गांधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ वाली राजनीति पर भी कटाक्ष किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस के इस राजनीतिक अभियान से नफरत के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा।

गृह मंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को राजनीतिक विरोध और ऐतिहासिक संवेदनशीलता के बीच अंतर समझना चाहिए। उनके अनुसार, 1984 की बरसी जैसे मौके पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करने के बजाय पीड़ित परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करना अधिक उचित होता।

चंडीगढ़ को मिली 258 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

राजनीतिक बयानबाजी के अलावा अमित शाह ने चंडीगढ़ के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 258 करोड़ रुपये बताई गई। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ देश के सबसे व्यवस्थित शहरों में शामिल है और यहां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जाना जरूरी है।

शाह ने सार्वजनिक परिवहन, पुलिस विभाग के बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों के लिए आवास जैसी सुविधाओं को शहर के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ की पुरानी मांगों को भी प्राथमिकता के आधार पर देख रही है।

गृह मंत्री ने संकेत दिया कि शहर की चार प्रमुख मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। इनमें से तीन मांगों को दीपावली के बाद पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा। इन फैसलों से संबंधित विस्तृत जानकारी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की ओर से अलग कार्यक्रम में साझा की जाएगी।

देश के बेहतर बस डिपो में शामिल होगा चंडीगढ़ का नया डिपो

अमित शाह ने करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली सिटी बस डिपो परियोजना को शहर के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के डिजाइन को उन्होंने खुद विस्तार से देखा है। इसका निर्माण इस तरह किया जा रहा है कि यह देश के बेहतरीन अंतरराज्यीय बस डिपो में अपनी जगह बना सके।

इस डिपो के बनने से चंडीगढ़ आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। साथ ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में भी मदद मिलेगी। शहर में बस सेवाओं का विस्तार होने से यात्रियों की आवाजाही आसान हो सकती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी आधुनिक शहर के विकास में मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की बड़ी भूमिका होती है। चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण शहर में आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। ऐसे में बेहतर बस डिपो का निर्माण भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अहम है।

पुलिसकर्मियों के लिए बनेंगे 196 नए सरकारी आवास

पुलिस विभाग के कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भी एक बड़ी परियोजना शुरू की जा रही है। इसके तहत लगभग 68 करोड़ रुपये खर्च करके 196 टाइप-3 आवासीय मकानों का निर्माण किया जाएगा।

अमित शाह ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस को राष्ट्रपति का निशान मिलना शहर और पुलिस बल के लिए गौरव की बात है। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य परिस्थितियां और आवास उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने लक्ष्य रखा कि वर्ष 2029 तक चंडीगढ़ पुलिस आवासीय संतुष्टि के मामले में देश के अग्रणी पुलिस बलों में पहले स्थान पर पहुंचे। इसके लिए पुलिस कर्मचारियों को पर्याप्त और बेहतर आवास उपलब्ध कराने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।

चंडीगढ़ के स्थापना दिवस का बताया विशेष महत्व

अपने संबोधन में अमित शाह ने एक नवंबर की तारीख को चंडीगढ़ के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 में इसी तारीख को चंडीगढ़ और हरियाणा की स्थापना हुई थी। इसी दिन चंडीगढ़ पुलिस की शुरुआत भी हुई थी। इस बार शहर की पुलिस को राष्ट्रपति का निशान मिलने से इस तारीख का महत्व और बढ़ गया है।

शाह ने चंडीगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि यह शहर शिवालिक पर्वतमाला की गोद में बसा हुआ है और इसका नाम मां चंडी से जुड़ा है। उन्होंने इसे महान सिख गुरुओं की कर्मभूमि बताते हुए कहा कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा के बीच एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

गृह मंत्री ने कहा कि जब भी देश में योजनाबद्ध तरीके से विकसित किए गए शहरों की चर्चा होती है तो चंडीगढ़ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इसकी पहचान केवल एक प्रशासनिक केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर भारत के महत्वपूर्ण शहर के रूप में भी है।

विकास और राजनीति दोनों मुद्दों पर केंद्रित रहा कार्यक्रम

चंडीगढ़ में आयोजित स्थापना दिवस समारोह के दौरान अमित शाह के संबोधन में विकास योजनाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति के मुद्दे भी प्रमुखता से सामने आए। एक ओर उन्होंने शहर के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया, वहीं दूसरी ओर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर कांग्रेस की रैली को लेकर सवाल उठाए।

राहुल गांधी पर तंज कसने से लेकर पंजाब में एनडीए की सरकार बनाने का संकल्प दोहराने तक, शाह ने अपने भाषण में कांग्रेस को कई मोर्चों पर घेरा। उन्होंने नशामुक्त भारत के लक्ष्य को भी दोहराया और पंजाब को इस अभियान का अहम हिस्सा बताया।

कुल मिलाकर, चंडीगढ़ का स्थापना दिवस समारोह विकास परियोजनाओं की शुरुआत के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने का भी मंच बना। अमित शाह ने जहां शहर के भविष्य के लिए परिवहन और आवास सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही, वहीं 1984 की घटनाओं का जिक्र कर कांग्रेस के सामने राजनीतिक और ऐतिहासिक जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया।