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The Scoopp

 

23 दिन के संघर्ष के बाद झोटा मामले में सरकार झुकी, परिवार को 2 करोड़ और नौकरी का भरोसा; कई मांगों पर लगी मुहर

पंजाब में परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए पिछले 23 दिनों से जारी आंदोलन में आखिरकार एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। राज्य सरकार और आंदोलनकारी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद कई अहम मांगों पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया गया है। इसके साथ ही जेल में बंद आंदोलन से जुड़े नेताओं की रिहाई, मामले की उच्च स्तरीय जांच और ख्याला कलां में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने जैसे मुद्दों पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

इस घटनाक्रम के बाद आंदोलनकारियों ने फिलहाल मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की अपनी योजना को टाल दिया है। पहले 5 नवंबर को बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की तैयारी थी। हालांकि, एक्शन कमेटी की ओर से साफ किया गया कि नेताओं की रिहाई समेत तय किए गए अन्य मुद्दों पर कार्रवाई होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस सहमति को लंबे समय से चल रहे संघर्ष के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पांच घंटे की बैठक के बाद निकला समाधान

सरकार और एक्शन कमेटी के बीच यह बातचीत करीब पांच घंटे तक चली। बैठक में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दूसरी तरफ आंदोलन का नेतृत्व कर रही एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को विस्तार से सामने रखा। बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर सहमति जल्दी बन गई, लेकिन गिरफ्तार नेताओं की रिहाई का मामला काफी देर तक अटका रहा।

एक्शन कमेटी का मुख्य जोर इस बात पर था कि जब तक जेल में बंद लाखा सिधाना और अन्य आंदोलनकारी नेताओं को रिहा नहीं किया जाता, तब तक परविंदर सिंह झोटा के शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। कमेटी के प्रतिनिधियों का कहना था कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को भी समाप्त किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चर्चा चलती रही।

बैठक के बाद कमेटी के मीडिया इंचार्ज हरदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि सरकार के साथ हुई बातचीत में कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और परिवार को आर्थिक सहायता तथा रोजगार देने का भरोसा भी मिला है।

दो करोड़ रुपये की सहायता और परिवार के सदस्य को रोजगार

इस पूरे विवाद में झोटा के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी उपलब्ध करवाने की मांग प्रमुख रही है। अब सरकार की ओर से परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने और नौकरी देने का आश्वासन दिया गया है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, परिवार को न्याय दिलाने के लिए शुरू किए गए संघर्ष में यह मांग बेहद अहम थी।

इसके अलावा दलजीत सिंह भम्मे के परिवार को भी आर्थिक मुआवजा और नौकरी देने का भरोसा दिया गया है। एक्शन कमेटी ने इस मामले को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया था। कमेटी की ओर से मांग की गई थी कि संघर्ष से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों को उचित राहत मिलनी चाहिए।

हालांकि, सरकार की ओर से दिए गए इन आश्वासनों को जमीन पर लागू करना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। आंदोलनकारी पक्ष की नजर अब इस बात पर रहेगी कि तय की गई मांगों पर निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई होती है या नहीं।

झोटा के नाम पर बनेगा ट्रॉमा सेंटर

बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला भी सामने आया। ख्याला कलां में परविंदर सिंह झोटा की याद में उनके नाम पर ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की मांग पर सरकार ने एक सप्ताह के भीतर मंजूरी देने का भरोसा दिया है।

इस मांग को आंदोलनकारियों ने विशेष महत्व दिया है। उनका कहना है कि झोटा के नाम पर बनने वाला ट्रॉमा सेंटर क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध करवाने के लिए ऐसी स्वास्थ्य सुविधा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

एक्शन कमेटी ने बैठक में इस परियोजना को लेकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखा। सरकार की ओर से एक सप्ताह के भीतर मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति जताई गई। अब इस संबंध में आधिकारिक स्वीकृति और आगे की कार्रवाई का इंतजार रहेगा।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जांच की मांग

झोटा प्रकरण में संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर भी आंदोलनकारी लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इसी कारण बैठक के दौरान पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच करवाने का मुद्दा उठाया गया।

एक्शन कमेटी की मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए और जिन अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है, उनके संबंध में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए। बातचीत में इस जांच को समयबद्ध तरीके से करवाने का भरोसा दिया गया है।

कमेटी का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता देने से मामला समाप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी वजह से जांच का विषय आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल रहा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस स्तर पर गठित की जाती है और उसे पूरा करने के लिए क्या समयसीमा निर्धारित होती है।

झोटा की याद में प्रतिमा लगाने पर भी बनी सहमति

बैठक में परविंदर सिंह झोटा की स्मृति को सुरक्षित रखने के लिए उनकी प्रतिमा स्थापित करने का विषय भी उठाया गया। परिवार के अनुसार, प्रतिमा लगाने को लेकर सरकार के प्रतिनिधियों और एक्शन कमेटी के बीच सहमति बन गई है।

हालांकि, प्रतिमा कहां स्थापित की जाएगी, इस पर दोनों पक्षों के बीच अंतिम फैसला नहीं हो सका। एक्शन कमेटी चाहती थी कि घटनास्थल पर ही झोटा की प्रतिमा लगाई जाए, ताकि उस स्थान को उनकी याद से जोड़ा जा सके। दूसरी ओर सरकार के प्रतिनिधियों ने बताया कि घटनास्थल निजी संपत्ति है। ऐसे में वहां प्रतिमा लगाने के लिए कानूनी अड़चनें पैदा हो सकती हैं।

इसी कारण प्रतिमा स्थापित करने के सिद्धांत पर सहमति बनने के बावजूद स्थान का चयन फिलहाल बाकी है। आने वाले समय में इस विषय पर परिवार और संबंधित पक्षों के बीच आगे बातचीत होने की संभावना है।

लाखा सिधाना समेत गिरफ्तार नेताओं की रिहाई का मुद्दा अहम

इस आंदोलन में गिरफ्तार किए गए नेताओं की रिहाई एक्शन कमेटी की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में शामिल रही है। बैठक के दौरान लाखा सिधाना और अन्य बंद नेताओं को जेल से बाहर लाने के मुद्दे पर काफी देर तक चर्चा हुई।

हरदीप सिंह सिद्धू के मुताबिक, बातचीत में अन्य मांगों पर सहमति बनने के बावजूद कमेटी अपने गिरफ्तार साथियों की रिहाई के बिना पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार नहीं थी। कमेटी ने स्पष्ट किया कि नेताओं को बिना शर्त रिहा किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे भी वापस लिए जाने चाहिए।

आंदोलनकारियों ने 13 अक्टूबर से शुरू हुए संघर्ष के दौरान दर्ज विभिन्न मामलों को रद्द करने की मांग रखी। इनमें भम्मे कलां, बुढलाडा और अकालिया से संबंधित मामले शामिल बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में फ्लेक्स फाड़ने के आरोप में दर्ज मुकदमों को समाप्त करने का मुद्दा भी उठाया गया।

कमेटी ने झोटा के पिता और एंटी ड्रग टास्क फोर्स से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ पहले से दर्ज कथित झूठे मामलों को रद्द करने की मांग भी सरकार के सामने रखी। एक्शन कमेटी का कहना है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को दर्ज मामलों के कारण परेशान नहीं किया जाना चाहिए। गिरफ्तार नेताओं की रिहाई और मुकदमों की वापसी को लेकर बनी सहमति पर अब आगे की सरकारी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार को लेकर तय हुआ अगला कदम

झोटा के शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार भी इस पूरे आंदोलन का एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। आंदोलनकारी लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि उनके साथी नेताओं को जेल से बाहर लाने के बाद ही आगे की धार्मिक और पारिवारिक रस्में पूरी की जाएंगी।

बैठक में बनी सहमति के अनुसार, गिरफ्तार नेताओं की रिहाई के बाद झोटा के शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। इसके अगले दिन अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस फैसले से आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है।

आंदोलनकारियों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार के साथ बातचीत के बाद फिलहाल 5 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। इस तरह लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शन में बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ा है।

बैठक में परिवार और आंदोलनकारी संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

सरकार के साथ हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में झोटा के परिवार की तरफ से भी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें भीम सिंह फौजी, बीबी मनप्रीत कौर और सूबेदार हरप्रीत सिंह शामिल रहे। परिवार के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों और अपेक्षाओं को बैठक में रखा।

इसके अलावा नशा विरोधी टास्क फोर्स से जुड़े कई प्रमुख नेता भी बातचीत का हिस्सा बने। इनमें गगनदीप सिरसीवाला, अमन पटवारी, कुलविंदर सिंह सुखी और भूपिंदर सिंह रूबी के नाम शामिल हैं। सभी प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने आंदोलन से संबंधित मुद्दों को उठाया।

23 दिनों से चल रहे झोटा इंसाफ आंदोलन में सरकार और एक्शन कमेटी के बीच बनी सहमति को एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। दो करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार को नौकरी, ट्रॉमा सेंटर की मंजूरी, प्रतिमा स्थापित करने का भरोसा और अधिकारियों की जांच जैसे मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है। हालांकि, गिरफ्तार नेताओं की रिहाई, मुकदमों की वापसी और अन्य आश्वासनों को लागू करना अभी महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई ही तय करेगी कि बैठक में बनी सहमति किस तरह पूरी तरह अमल में आती है।